मर्द को दर्द नहीं होता (Man does not feel pain)

मुस्कुराहट के पर्दे से तकलीफें छुपा रक्खी हैं जनाब, डरता हूं कि मेरी रोती हुई शक्ल कहीं कोई देख न जाए।

पुरुष हमेशा और हर किसी के आगे नहीं रोते और रोते हैं तो समझिए कि तकलीफ़ बर्दाश्त के बाहर है…..।औरतों और बच्चों को तो रोते हुए आपने देखा होगा पर किसी पुरुष को कभी रोते हुए देखा है क्या? कहते हैं मर्द को दर्द नहीं होता और उससे उम्मीद की जाती है कि वो दूसरों की तकलीफ को समझे ऐसा क्यों? जिसे तकलीफ़ नहीं होती भला वो किसी का दर्द क्या समझेगा? पर ऐसा नहीं है।नारियल बाहर से कठोर लेकिन अन्दर से नर्म होता है ये सभी जानते हैं। किसी पुरुष के मन का हाल भी ठीक वैसा ही होता है।या यूं कहें कि बना दिया जाता है। एक प्रसिद्ध वाक्य है मर्द कभी रोते नहीं। अरे ! अगर पुरुष रोना भी चाहे तो रो नहीं सकता क्योंकि लोग उसे जीने नहीं देंगे; उसे ताने मारने लगेंगे। लोग कहेंगे कि ये कमज़ोर दिल का है और कभी-कभी तो पुरुष को स्त्री की भी संज्ञा दी जाती है। हालांकि हमारे समाज में पहले से ही यह छोटी मानसिकता रही है कि स्त्रियां कमज़ोर होती हैं और पुरुष ताकतवर। इसलिए अगर रोना भी हो तो पुरुष को अकेले चुपचाप चोरी से रोना पड़ता है कि कहीं कोई देख ना जाए।आज जब स्त्री सशक्त होती है तो लोग वाह-वाही करते हैं,लेकिन जब कोई मर्द कमज़ोर हो तो लोग उसे जीने नहीं देते ऐसा क्यों? क्या केवल स्त्रियों को ही रोने का हक है पुरुषों को क्यों नहीं?मन और हृदय तो सबका कोमल होता है फ़िर भी हम पुरुष को ही भावनाहीन और कठोर हृदय मान लेते हैं ,क्योंकि वो जल्दी किसी के आगे नहीं रोता? सत्य है कि पुरुष तन से थोड़े कठोर होते हैं किन्तु इसका अर्थ ये नहीं कि उन्हें कोई तकलीफ़ नहीं होती। स्त्रियां तो अपना दुखड़ा किसी न किसी के आगे रो लेती हैं, पर पुरुष किसके आगे रोए ,किससे अपनी तकलीफ़ कहे? आज तक स्त्रियों को समाज में दबाया जाता रहा है लेकिन लोगों की आंखे धीरे धीरे खुलने लगी है और आज स्त्री; शक्ति के रुप में उभर रही है। किन्तु पुरुष की इस मनोदशा पर आजतक किसी की दृष्टि तक नहीं पड़ी।जब भी पुरुष अपनी तकलीफ किसी से बयां नहीं कर पाता, किसी से कुछ कह नहीं पाता तो अन्दर ही अन्दर घुटने लगता है और जब भावनाओं को दबाया जाता है तो उसकी यह भावनाए ज्यादातर गुस्से व चिड़चिड़ेपन का रुप ले लेती है।तो कभी न कभी, कहीं न कहीं यह ज्वालमुखी फट पड़ता है। यही कारण है कि वो अपनी भड़ास अपने घरवालों, पत्नी और बच्चों पर निकाल देते है,अगर कोई बार-बार उन्हें कुछ पूछता है या कहता है।हालंकि घरेलू हिंसा इस विषय में अनुचित और निन्दनीय है, लेकिन हम यहां पुरुष के डांट-फटकार की बात कर रहे हैं घरेलू हिंसा की नहीं।हम जानते हैं कि समाज का विकास स्त्री या पुरुष में से किसी अकेले के बस की बात नहीं है। इसलिए यदि हमें दोनों को समाज में समान अधिकार व सम्मान दिलाना है तो दोनों की भावनाओ और मनोभावों को समझना पड़ेगा और उनका सम्मान करना पड़ेगा। तभी समाज आगे जाकर विकसित हो पाएगा।

नोट: ऊपर दिए गए विचारों में यदि कोई त्रुटि हो या कुछ गलत कहा गया है ऐसा लगे तो कृपया मुझे क्षमा करें और अपने बहुमूल्य सुझावों और विचारों से मेरा मार्गदर्शन करें। धन्यवाद🙏

11 thoughts on “मर्द को दर्द नहीं होता (Man does not feel pain)

  1. I always have this question in my mind, how come the men are so strong and have control power on emotions? Is it by birth and blessing of the Almighty?? Your thoughts are uniquely inspiring facts 👌❤

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