ज़माने को भलाई अब कहीं भी रास ना आती,
भलाई संग बुराई की भी थोड़ी सी ज़रूरत है।



बात कड़वी है फिर भी सच हैं अच्छे इंसान हालत जानवर की उस पूंछ की तरह रह गई हैं, जिसकी ज़रूरत तो होती है मगर सिर्फ मक्खियां उड़ाने के लिए। उसके सिवा उससे किसी और कोई लेना देना नहीं होता।जब भी लोगों को ज़रूरत होती इस्तेमाल करते हैं और जब नहीं होती तो दूध की मक्खी सा हाल करते हैं।

सही है।
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