देवभूमि(Land of Gods)

देवभूमि अर्थात् देवताओं की भूमि जिसे सम्पूर्ण विश्व भारत के नाम से भी जानता है,क्योंकि यहां सर्वाधिक देवताओं का निवास है।भारत देवभूमि यूं ही नहीं कहलाता इस सम्बंध में कई विषय चर्चित हैं। लेकिन आज हम यहां केवल एक विषय की चर्चा करेंगे -देवीय अवतारों की।
अवतार क्या है ?यह बात हर भारतवासी को पता है।ईश्वर आदिकाल से ही समय समय पर मानवता की रक्षा के लिए अपने अंशरूप में धरती पर आते रहे हैं। परन्तु यह अर्धसत्य है।ईश्वरीय अवतारों का उद्देश्य केवल मानवों की रक्षा या फिर उनके कष्टों का निवारण ही नहीं हैं बल्कि उनको यह सीख देना भी है कि मानवता का उद्देश्य क्या है। इन्हीं कारणों से इस धरती पर ईश्वर;मानवीय रूप धारण कर अनेकों कष्ट सहते आए हैं। जिससे हमें यह सीख मिल सके कि पशु हो,दानव हो या फिर मानव;अपने सद्गुणों और धर्म के बल पर कोई भी देवत्व प्राप्त कर सकता है।
आदिकाल में जितने भी अवतार हुए चाहे वो श्रीराम हों या श्रीकृष्ण,माता सीता हो या बजरंगबली हनुमान,श्री परशुराम हों या श्री लक्ष्मण या फिर भगवान बुद्ध;सभी ने अपने जीवन में चरित्र,मर्यादा,धर्म और मानवता का पालन करते हुए अनेक कष्ट सहे, जिससे हमें उनके चरित्र से शिक्षा ले सकें।
तनिक सोचिए त्रेता में श्रीराम को आवश्यकता ही क्या थी कि उन्हें वन-वन भटकना पड़े और अपनी पत्नि सीता के लिए समुद्र पार करके रावण से लड़ना पड़े। वो चाहते तो अयोध्या का राज्य ग्रहण कर सकते थे और वानरों की सहायता लिए बिना ही एक बाण से रावण का वध कर सकते थे।परंतु नहीं ,उन्होंने जग को यह सन्देश दिया कि माता-पिता की आज्ञा देवताओं के लिए भी सर्वोपरि हैं,भाईयों में आपसी प्रेम और सहयोग की भावना हो तो मानव ;रावण जैसे अपराजेय शत्रु से भी जीत सकता है, नारी को बराबर का स्थान व सम्मान मिलना चाहिए और माता सीता ने सन्देश दिया कि एक नारी को सदैव अपने पति का साथ देना चहिए भले ही वह कितनी भी बुरी दशा में हो। हनुमान जी से निःस्वार्थ भक्ति और आस्था,लक्ष्मण जी से अनन्य भ्रातृप्रेम और सेवाभाव की शिक्षा मिलती है।
और द्वापर के श्रीकृष्ण से निश्चल प्रेम,निःस्वार्थ मित्रता के साथ-साथ यह सीख भी मिलती है कि यदि कोई मानव धर्म और नारी सम्मान की रक्षा के लिए खड़ा होता है तो स्वयं ईश्वर भी उसका सारथी बन उसे राह दिखाते हैं। अतः सभी देव अवतारों का उद्देश्य मानव को जीवन में प्रेम,त्याग,धर्म,कर्त्तव्य का महत्व समझाना रहा है।

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