फ़िक्र(Tension)

“क्यों फिक्र करूं कि वो समझेगा मुझको।
मैं जानता हूं ख़ुद को क्या ये कम है?…..”

दूसरों से कभी हमदर्दी की उम्मीद न करें। उम्मीद अक्सर दिल को तोड़ देती है क्योंकि आप पर जो बीती है; हो सकता है, उसे सामने वाला समझ न पाये।

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