बोलो किसकी गलती है?(Tell me whose fault is it?)

अक़्सर हम अपनी गलतियों का दोष दूसरों के सिर पर मढ़ देते हैं और हमेशा झूठे बहानों से ख़ुद को दिलासा देते रहते हैं। जबकि अपने जीवन में घटने वाली अच्छी या बुरी घटनाओं के उत्तरदायी हम स्वयं हैं। ये कविता हमें बस यही समझाने का प्रयास करती है।

तेरे बस की बात नहीं है,
यह कहकर किसने रोका?
जब जब पंख पसारे तुमने,
उड़ने से किसने टोका?
जब जब पथ पर कदम बढ़ाए,
चलने से थे हिचके तुम।
ढूंढें नए बहाने नित -दिन,
मन के संग-संग भटके तुम।
अब कहते हो वक्त बुरा है,
हालातों ने मार रखा।
अपने मन के भीतर झांको,
बोलो किसकी गलती है?
यह सब तेरी गलती है,
हां यह बस तेरी गलती है।
सबकी बातें तो छोड़ ही दो,
तुमने भी थे कुछ ख़्वाब बुने।

था पता तुम्हें बिन कोशिश के,
न खुद ही कोई बात बने।
यह मंशा जो सागर तरने की,
जल उतरे बिन साकार नहीं होगी।
अब कहते हो मैं क्या करता?
बस उसकी ही चलती है ।
खुद मन के भीतर झांको,
बोलो किसकी गलती है?
यह सब तेरी गलती है,
हां यह बस तेरी गलती है।
टाल रहे तुम बात-बात पर,
यूं हाथों पर हांथ धरे।
कहते मेरे दिन आएंगे,
मन में हो विश्वास भरे।
बोलो तुम ही बिन पग धारे,
किसने मंज़िल को पाया?
बाधाओं-विपदाओं से डर,
किसने ध्वज है लहराया?
जान-बूझ सब तुम ना बदले,
क्या दुजे की गलती है?
अपने मन के भीतर झांको,
बोलो किसकी गलती है?
यह सब तेरी गलती है,
हां यह बस तेरी गलती है।
जीवन में जो कष्ट उठाए,
तुमने ख़ुद को बहलाया।
दुजे सिर पर दोष मढ़ा बस
खुद को दुखिया बतलाया।
एक हांथ ताली ना बजती
तुम ही मुख से कहते हो।
जीवन में जो नाद है छाया
क्या बस एक हंथेली है?
अपने मन के भीतर झांको
बोलो किसकी गलती है?
यह सब तेरी गलती है।
हां यह बस तेरी गलती है।

“हमें आगे बढ़ने से रोकने वाला कोई और नहीं बल्कि हम स्वयं हैं हमारी राहों में किसी और ने नहीं बल्कि हमने ही पत्थर बिछा रखे हैं।जब तक हार न मानो;हार संभव नही ये तो मन की बस एक अवस्था मात्र है।”

“There is no one to stop us from moving forward but we ourselves, no one else but we have laid stones in our path. Unless you give up; defeat is not possible, it is just a state of mind.”

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