लोग कहते हैं कि इन्सान को वक्त के साथ साथ खुद को बदलना चाहिए। पर मैने लोगों को अपनी ज़रूरत के साथ ही बदलते देखा है।
जब आपका बुरा समय शुरू होता है तो आपके अपने, आपके सम्बन्धी सभी आपसे किनारा करने लगते है । जो आपके अच्छे दिनों में आपके साथ थे वो आपसे मिलने से कतराते हैं कि कहीं मिलते ही आप;उनसे कोई मदद न मांग ले और अगर आप उनसे मदद मांग भी लेते हैं तो अक्सर बहाने बनाकर आपकी बात टाल दी जाती है। ऐसे लोगों से दूर रहने और अपना काम से काम रखने का प्रयास करें। आप सुखी रहेंगे।
जिसके उर जैसी सोच बसी, अंतर के पट ही खोलेंगे। मीठी-कड़वी सी कुछ बातें, सुननी होंगी जब डोलेंगे। मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे, मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे। मत सोच तेरी असफलता पर, ये लोग व्यंग कर जाते हैं। शायद तुझको है पता नहीं, ये कोशिश से डर जाते हैं। अरे जिसने न कभी कुछ की ठानी, क्या सफल भला हो पायेंगे? जिनको दूजा कोई कर्म नहीं, बस अपना राग बजाएंगे। जीतने भी हैं खाली बर्तन-2 नीचे गिरते ही बोलेंगे। मीठी-कड़वी सी कुछ बातें, सुननी होंगी जब डोलेंगे। मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे, मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे। माना कि है तलवार नहीं पर, कम भी इसका वार नहीं। मन-हृदय चीर बढ़ जाता है, विष बुझे बाण बरसाता है। कभी पुष्पों की वर्षा करता, कभी मन में फांस चुभाता है। कटु शब्द है रोक सका कोई-2 मन में जो विष ही घोलेंगे। मीठी-कड़वी सी कुछ बातें, सुननी होंगी जब डोलेंगे। मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे, मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे। शायद तुमने देखा होगा, कुछ धूप-छांव के रंगो को पल-पल जो वेश बदलते हैं, धरते-तजते हैं संगों को। कभी काग न गाए कोयल सा, विषधर न अमृत दान करे। जो बीज धरा में हो अरोपित, वैसी ही उपज खलिहान करे। ये अटल सत्य जाने फिर भी-2 जड़बुद्धि कहां चुप हो लेंगे। मीठी-कड़वी सी कुछ बातें, सुननी होंगी जब डोलेँगे मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे, मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे।
“अक्सर लोग किसी न किसी बहाने से औरों को नीचा दिखाने या हतोत्साहित करने का प्रयास करते हैं और अपनी भीतर झाँकते तक नहीं। इसलिए ऐसे लोगों की बातों को नज़रंदाज़ करते हुए अपने लक्ष्य की ओर निरन्तर बढ़ते रहें। क्योंकि जो आज कह रहे हैं कि तुमसे ना हो पाएगा कल वही तुम्हारी सफलता के गीत गायेंगे और कहेंगे मुझे पता था एक न एक दिन ये ज़रूर कुछ बड़ा करेगा।”