व्यक्ति का सरल व शान्त होना भी एक अपराध ही है।सच ही कहा गया है,आप हर किसी के साथ अच्छे नहीं हो सकते।कभी-कभी प्रतिरोध करना भी आवश्यक होता है।क्योंकि विद्युत धारा का प्रवाह भी उसी परिपथ में अधिक सरलता से होता है,जिसका प्रतिरोध अन्य परिपथों की तुलना में अपेक्षाकृत कम होता हैं। इसलिए खुद को इतना भी सस्ता न बनाएं कि कोई भी आए और खेल जाए।
It is also a crime for a person to be simple and calm. It is true that you cannot be nice with everyone. Sometimes resistance is also necessary. Because the flow of electric current also happens more easily in the same circuit, whose resistance is relatively less as compared to other circuits. So don’t make yourself so cheap that just anyone can come and play.
बुरे वक्त में ही होती है बस अपनों की पहचान, सच में भला ख़बर है किसे,अपना कौन है?
It is only in bad times that one gets to know one’s own people,who really knows who is one’s own?
जब सब कुछ ठीक या बेहतर चल रहा हो उस वक्त तो सभी साथ देते है ,लेकिन जब भी आप समस्या में हों, खासकर तब जब आपकी माली हालत खस्ता हो।तो ऐसी स्थिति में आप अकेले होते हैं।बस साथ होते हैं तो कुछ सच्चे दोस्त और आपका परिवार और कभी कभी तो वो भी नहीं। कड़वी सच्चाई है मुसीबत के मारे कोई भी सहारा नहीं देता। लेकिन उगते सूरज को सब सलाम करते हैं।जब आपका बुरा समय चल रहा हो तो आपको मालूम पड़ता है कि आपने अपने जीवन में क्या कमाया है । मतलब ऐसा कोई है जो मुसीबत में आपके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर खड़ा है या नहीं।अगर आपके पास कोई ऐसा है तो वही आपके जीवन की सच्ची कमाई है। लेकिन अगर नहीं तो या तो आपके सम्बंध अपनों के साथ अच्छे नहीं थे या फिर आपने लोगों को पहचानने में गलती कर दी है।सच ही कहा गया है बुरा वक्त एक आईना है जो सबकी सच्चाई को सामने दिखाता है। इसलिए इससे नफ़रत न करें और परेशान न हों, क्योंकि ये आपको मजबूत बनाएगा और अपने जीवन में सही लोगों को चुनना सिखाएगा।
When everything is going well or better, then everyone supports you, but whenever you are in trouble, especially when your financial condition is bad, then in such a situation you are alone. Friends and your family and sometimes not even that. The bitter truth is that no one provides support in times of trouble. But everyone salutes the rising sun. When you are going through bad times, you realize what you have earned in your life. Meaning whether there is someone who stands shoulder to shoulder with you in trouble or not. If you have someone like that then he is the true income of your life. But if not, then either your relations were not good with your loved ones or you have made a mistake in recognizing people. It is rightly said that bad times are a mirror which shows everyone’s truth. So don’t hate it and don’t be upset because it will make you stronger and teach you to choose the right people in your life.
कितना भी खुद से भाग लो लेकिन। हकीकत से छुपकर कहां जाओगे?
No matter how much you run away, Where will you go to hide from reality?
हम अपनी वास्तविकता से भले ही कितना भी किनारा क्यूं न कर लें। जो सच्चाई है वो कभी बदल नहीं सकती। चाहे यह बात हमारी पहचान से सम्बंध रखती हो या फिर हमारी तत्कालीन परिथितियों से। ज्यादातर लोग समस्याएं आने पर दूसरों को और भगवान को दोष देते हैं या अपने बुरे वक्त का रोना रोते हैं और सोचते हैं कि कोई आए और हम पर तरस खाए।वो देखे की हम ज़िंदगी के किस दौर से गुजर रहे हैं। इससे बात नहीं बनी तो हम खुद को नशे के अंधे कुएं में झोंक देते है,बस चन्द पल के लिए खुद को भरमाने के लिए कि अब जिंदगी में कोई गम नहीं है। इसके बाद अगली सुबह एक नया रोना या फिर नशे की लत।बस यही ज़िंदगी बन कर रह गई है। अपने हालातों पर रोना भी एक तरह का नशा है, जिससे हम अपने जीवन की वास्तविकता झुठला सकें।हम दूसरों के आगे जीवन भर रोते रहते हैं। हमें पता है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा और न ही हमारी मुसीबतें कम होंगी। फिर भी हम अपनी हरकतों से बाज नहीं आते। ज़रा सोचिए किसी को अपनी परेशानियां बताने से क्या हाल मिल जायेगा और अगर कोई दूसरा इन्सान इसका हल दे भी दे तो ये किस्सा कितने दिन चलेगा ?आप फिर नई मुसीबत आते ही किसी और को ढूंढोगे। इसका सीधा मतलब यह है कि आप हर परेशानी के लिए दूसरे पर आश्रित हो चुके हैं। आकर्षण का सिद्धांत ये कहता है कि हम जिस किसी वस्तु या भावना के बारे में ज्यादा सोचते हैं, उसे हम उतना ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसका मतलब है कि यदि हम ज्यादातर अपनी परेशानियों का रोना रोयेंगे और लगातार उसके बारे में सोचेंगे तो हमें और भी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए परेशानियों और जीवन की समस्याओं पर रोना नहीं , बल्कि उन्हें हल करना,उनसे लड़ना सीखिए और हो सके तो उन पर हंसना शुरू कीजिए। फिर आपकी ज़िंदगी भी मुस्कुराने लगेगी।
No matter how much we move away from our reality. The truth can never change. Whether it is related to our identity or our current circumstances. Most of the people blame others and God when they face problems or cry about their bad times and think that someone should come and take pity on us. He should see what phase of life we are going through. If this doesn’t work then we throw ourselves into the blind well of addiction, just to deceive ourselves for a few moments that there is no sorrow in life anymore. After this, the next morning a new cry or drug addiction. This is what life has become. Crying over our circumstances is also a kind of addiction, due to which we can deny the reality of our life. We keep crying in front of others throughout our life. We know that this will not make any difference nor will our troubles reduce. Still we do not desist from our actions. Just imagine what kind of situation you will get by telling your problems to someone and even if someone else gives the solution, how long will this story continue? You will then look for someone else as soon as a new problem arises. This simply means that you have become dependent on others for every problem. The law of attraction says that the more we think about any object or emotion, the more we attract it towards us. This means that if we mostly cry about our problems and constantly think about them, we will have to face even more problems. Therefore, do not cry over the troubles and problems of life, but learn to solve them, fight them and if possible, start laughing at them. Then your life will also start smiling.
पतझड़ के पत्तों सा टूटा , गिरा कहीं कुछ खुद मुझमें। अपनी कुछ उम्मीदें टूटी, संग-संग टूटे कुछ सपने। तिनका-तिनका बना घरौंदा, उजड़ा बिखरा राहों में। दिल का दर्द दिखेगा किसको? मुंह की कोई सुनता है क्या? मुंह की कोई सुनता है क्या? कुछ दिन-कुछ पल या कुछ बातें, थी चाह मेरी कोई सुनता। पर दूजे की परवाह किसे? है कौन यहां कुछ भी गुनता? बस मतलब की यहां यारी है, और मतलब की दुनियादारी। सब मतलब पर ही याद करें, सब मतलब पर परवाह करें। कितने घाव लगे इस दिल पर, देकर कोई गिनता है क्या? दिल का दर्द दिखेगा किसको? मुंह की कोई सुनता है क्या? मुंह की कोई सुनता है क्या? हर बार सोचकर कोशिश की, हर बार उम्मीदें करता हूं। है पता मुझे है बेमतलब, फिर भी तकलीफे चुनता हूं। जिन्हें खुद से ही लेना देना, उनको रिश्तों की कहां पड़ी? बस अपनी झोली भरने तक, रिश्तों का साथ निभाते हैं। किसकोअपने ज़ख्म दिखाएं ? मरहम भी कोई रखता है क्या? दिल का दर्द दिखेगा किसको? मुंह की कोई सुनता है क्या? मुंह की कोई सुनता है क्या?
अक्सर ये सोचता था बड़ी तकलीफ़ है मुझे, पर ये आंख खुल गई जो निगाहें उधर गई। सड़कों के किनारे पे कचरे में हाथ में से, कोई शख्स मुझको आज रोटी उठाता हुआ मिला।
I often thought that I was in a lot of trouble, but my eyes were opened today when my eyes went to the place where I saw someone picking up bread from the garbage heap on the roadside.
भूख बड़ी ज़ालिम होती है कभी ये नहीं देखती आपके पास उसे देने के लिए कुछ है या नहीं।बस लग जाती है। रोटी इन्सान की सबसे पहली ज़रूरत है बाकी चीजें तो इसके बाद ही आती हैं। पेट की आग बहुत तेज़ होती है । इसने कितनों के ही घर जला दिए है,कितनों को ही मार डाला है और कितनों को ही मजबूर कर रही है अनचाहा या गलत काम करने के लिए, खासकर छोटे बच्चों को।जिनके हाथ में किताबे और आंखों में सुनहरे सपने होने चाहिए थे,उनके हांथ में कचरे की बोरी और आंखो में भूख की तड़प है।कही कोई अपना बचपन छोड़कर कमाने निकल पड़ा है तो कहीं कोई चोरी करके अपना पेट पालने को मजबूर है। इस विषय को छोटे से अंश में पूर्ण रूप से वर्णित करना संभव नहीं है। इसलिए बस इतना ही कहना चाहूंगा कि आप उनकी सहायता करे न करें को सक्षम हैं पर उनकी सहायता करने से न चूकें जो असक्षम हैं। यही मानवता है जो हमें पशुओं से भिन्न बनाती है।
Hunger is very cruel, it never checks whether you have anything to give it or not. It just needs to eat something. Bread is the first need of a human being, other things come only after it. The stomach fire is very strong. It has burnt down so many houses, killed so many people and is forcing so many to do unwanted or wrong things, especially small children. Those who should have had books in their hands and golden dreams in their eyes, There is a sack of garbage in his hand and the pain of hunger in his eyes. Some people have left their childhood and set out to earn money while others are forced to survive by stealing. It is not possible to describe this topic completely in a small excerpt. So all I would like to say is that even if you do not help those who are capable, do not miss helping those who are unable. It is humanity that makes us different from animals.
मुस्कुराहट के पर्दे से तकलीफें छुपा रक्खी हैं जनाब, डरता हूं कि मेरी रोती हुई शक्ल कहीं कोई देख न जाए।
पुरुष हमेशा और हर किसी के आगे नहीं रोते और रोते हैं तो समझिए कि तकलीफ़ बर्दाश्त के बाहर है…..।औरतों और बच्चों को तो रोते हुए आपने देखा होगा पर किसी पुरुष को कभी रोते हुए देखा है क्या? कहते हैं मर्द को दर्द नहीं होता और उससे उम्मीद की जाती है कि वो दूसरों की तकलीफ को समझे ऐसा क्यों? जिसे तकलीफ़ नहीं होती भला वो किसी का दर्द क्या समझेगा? पर ऐसा नहीं है।नारियल बाहर से कठोर लेकिन अन्दर से नर्म होता है ये सभी जानते हैं। किसी पुरुष के मन का हाल भी ठीक वैसा ही होता है।या यूं कहें कि बना दिया जाता है। एक प्रसिद्ध वाक्य है मर्द कभी रोते नहीं। अरे ! अगर पुरुष रोना भी चाहे तो रो नहीं सकता क्योंकि लोग उसे जीने नहीं देंगे; उसे ताने मारने लगेंगे। लोग कहेंगे कि ये कमज़ोर दिल का है और कभी-कभी तो पुरुष को स्त्री की भी संज्ञा दी जाती है। हालांकि हमारे समाज में पहले से ही यह छोटी मानसिकता रही है कि स्त्रियां कमज़ोर होती हैं और पुरुष ताकतवर। इसलिए अगर रोना भी हो तो पुरुष को अकेले चुपचाप चोरी से रोना पड़ता है कि कहीं कोई देख ना जाए।आज जब स्त्री सशक्त होती है तो लोग वाह-वाही करते हैं,लेकिन जब कोई मर्द कमज़ोर हो तो लोग उसे जीने नहीं देते ऐसा क्यों? क्या केवल स्त्रियों को ही रोने का हक है पुरुषों को क्यों नहीं?मन और हृदय तो सबका कोमल होता है फ़िर भी हम पुरुष को ही भावनाहीन और कठोर हृदय मान लेते हैं ,क्योंकि वो जल्दी किसी के आगे नहीं रोता? सत्य है कि पुरुष तन से थोड़े कठोर होते हैं किन्तु इसका अर्थ ये नहीं कि उन्हें कोई तकलीफ़ नहीं होती। स्त्रियां तो अपना दुखड़ा किसी न किसी के आगे रो लेती हैं, पर पुरुष किसके आगे रोए ,किससे अपनी तकलीफ़ कहे? आज तक स्त्रियों को समाज में दबाया जाता रहा है लेकिन लोगों की आंखे धीरे धीरे खुलने लगी है और आज स्त्री; शक्ति के रुप में उभर रही है। किन्तु पुरुष की इस मनोदशा पर आजतक किसी की दृष्टि तक नहीं पड़ी।जब भी पुरुष अपनी तकलीफ किसी से बयां नहीं कर पाता, किसी से कुछ कह नहीं पाता तो अन्दर ही अन्दर घुटने लगता है और जब भावनाओं को दबाया जाता है तो उसकी यह भावनाए ज्यादातर गुस्से व चिड़चिड़ेपन का रुप ले लेती है।तो कभी न कभी, कहीं न कहीं यह ज्वालमुखी फट पड़ता है। यही कारण है कि वो अपनी भड़ास अपने घरवालों, पत्नी और बच्चों पर निकाल देते है,अगर कोई बार-बार उन्हें कुछ पूछता है या कहता है।हालंकि घरेलू हिंसा इस विषय में अनुचित और निन्दनीय है, लेकिन हम यहां पुरुष के डांट-फटकार की बात कर रहे हैं घरेलू हिंसा की नहीं।हम जानते हैं कि समाज का विकास स्त्री या पुरुष में से किसी अकेले के बस की बात नहीं है। इसलिए यदि हमें दोनों को समाज में समान अधिकार व सम्मान दिलाना है तो दोनों की भावनाओ और मनोभावों को समझना पड़ेगा और उनका सम्मान करना पड़ेगा। तभी समाज आगे जाकर विकसित हो पाएगा।
नोट: ऊपर दिए गए विचारों में यदि कोई त्रुटि हो या कुछ गलत कहा गया है ऐसा लगे तो कृपया मुझे क्षमा करें और अपने बहुमूल्य सुझावों और विचारों से मेरा मार्गदर्शन करें। धन्यवाद🙏
हर बात बेबाक हो;कह देना यूं तो अच्छा है लेकिन, कुछ राज़ अगर दिल में दफ्न रहें तो ही अच्छा ।
दिल की कुछ बातें सभी को बताई नहीं जा सकती। अपनों को भी नहीं। क्योंकि कुछ बातें ऐसी भी होती हैं जिनको आप के सिवा कोई भी नहीं समझ सकता है। ये बात इसलिए भी ज़रूरी है,क्योंकि ज़िंदगी के कुछ किस्से ऐसे भी होते हैं;जो सिर्फ बस आपसे जुड़े होते हैं और जो बात दुसरे से जुड़ी न हो, तो लोग उसे या तो टाल देते हैं या एक कान से सुन दुसरे से निकाल देते हैं ।
शक्ल-ओ-सूरत की मोहताज है सारी दुनियां, कोई अच्छा हो या बुरा कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता।
आज दुनिया दिखावे के पीछे पागल है। आजकल सुंदरता के आगे व्यक्तित्व और विचारों का कोई मूल्य नहीं है, जबकि ये बाहरी दिखावे पल भर के होते हैं। खूबसूरती का पहनावे से कोई लेना देना नहीं है। ज़रूरी नहीं जो देखने में अच्छा हो लगे वो वास्तव में वैसा ही हो। दिखावे के पीछे भागने वालों को ज़्यादातर कड़वे अनुभवों को झेलना पड़ता है। इसलिए सुन्दरता पर नहीं अच्छे स्वभाव और सरलता से प्रेम करो।
लड़खड़ाते कदमों और तोतली ज़ुबान पर आज वो हंसता रह गया। जिसे हमने चलने और बोलने का हुनर सिखाया है।
जाने-अनजाने में हम अपने बड़ों; ज्याद़ातर अपने माता-पिता और बुजुर्गों का अपमान करते रहते हैं। और जब ख़ुद पर बितती है,तो हमें तकलीफ़ होती है। हमें यह समझना चाहिए कि भावनाएं सभी के भीतर है। उम्र के जिस पड़ाव पर इन्सान की सहनशक्ति और शारीरिक क्षमता बहुत कम हो जाती है, उस पड़ाव हम उनकी इस प्रकार हँसी उड़ाते हैं और उन्हें अपशब्द बोलेते हैं। कहा जाता है बच्चे अपने बड़ों से ही सीखते हैं, यदि यह बात सच है तो सोच लो कल जब आपकी बारी आयेगी तो आपको कैसा लगेगा…….?
Knowingly or unknowingly we are our elders; Most of them keep insulting their parents and elders. And when it is spent on ourselves, we feel pain. We must understand that emotions are within everyone. At the stage of age at which the stamina and physical capacity of a person becomes very less, at that stage we make fun of them in this way and speak abusive words. It is said that children learn from their elders only, if this is true then think how will you feel tomorrow when your turn comes…….?
दो दिन की जीत पर इंसान,यूं इतराना नहीं अच्छा। ये तो बस इक खेल था,अभी तो पूरी जंग बाकी है।
Man, on the victory of two days, it is not good to boast like this. This was just a game, the whole war is yet to come.
अपनी उपलब्धियों पर गर्व किया जा सकता है लेकिन घमंड नहीं। चन्द कामों में सफलता पाकर दूसरों के साथ अकड़कर बात करना अच्छी बात नहीं होती। इन्सान को अपनी विनम्रता कभी भी खोनी नहीं चाहिए।