आलोचना (Criticism)

ज़िंदगी भर एक बात हमेशा याद रखना, जो तुम्हारी बुराई करे उसे हमेशा साथ रखना।

Always remember one thing throughout your life, always keep the one who criticise you with you.

हर इन्सान को अपनी तारीफ़ अच्छी लगती है। दुनियां में ऐसा कोई भी नहीं जिसे तारीफ़ से तकलीफ हो भले ही वो तारीफ झूठी ही क्यों न हो। मगर जब कोई आपकी बुराई करता है और आप में कमियां निकालता है।तब आपको बुरा लगता है और आप अपना मन मसोस कर रह जाते हैं। अगर आप उसे करारा जवाब दे सकने लायक हैं, तो आप वैसा ही करते हैं और अगर नहीं तो आप उसे मन ही मन गालियां देते हैं। पर क्या आपको पता है कि आपके जीवन में कुछ ऐसे ही लोग होने ही चाहिएं जो आपको;आपकी कमियां दिखा सकें।बात बात पर आपमें नुक्स निकालने वाला हर इन्सान आपका दुश्मन ही नहीं आपका दोस्त भी हो सकता है। आपको आईना दिखाने वाला शख्स बस आपको;आपकी सही तस्वीर दिखाए, फ़र्क नहीं पड़ता कि वो आपका दोस्त है या दुश्मन। कभी कभी हम अपनी कमियों को पहचान नहीं पाते और कभी कभी तो हमें एहसास ही नहीं होता कि हममें कोई कमी भी है। ऐसे शख्स से आपको ये फ़ायदा होता कि आपको ;अपनी कमियों को ढूंढना नहीं पड़ेगा। बल्कि कोई है, जो आपके लिए यह काम खुद कर रहा है। इससे आपकी शक्ति भी बचेगी, जिसे आप ख़ुद को तराशने में लगा सकते हैं। मगर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं,जो आपमें यूं ही नुक्स निकालते रहते हैं।उनकी बातों का कोई सिर-पैर नहीं होता। पर उनकी बातों को भी कभी नज़रंदाज़ न करें। उनकी बातें अर्थपूर्ण भी हो सकती हैं। यदि उनकी बातों में थोड़ी भी सच्चाई है तो आपको ख़ुद को निखारने का एक और मौका मिल जायेगा और अगर नहीं है तो आपका उत्साह बढ़ जायेगा,क्योंकि लोग बस उसी का रास्ता काटते हैं ,जो तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ रहा होता है। इसलिए ऐसे लोगों को वरदान मानिए जो आपको आईना दिखाकर, आपको संवारने में मदद कर सकते हैं और साथ ही साथ आपको बेहतर से बेहतरीन बन सकते हैं।

Every person likes to be praised. There is no one in the world who is hurt by praise, even if the praise is false. But when someone speaks ill of you and finds faults in you, then you feel bad and feel sad. If you are capable of giving him a befitting reply, you do so and if not, you abuse him in your mind. But do you know that there should be some people in your life who can show you your shortcomings. The person who finds faults in you in every conversation can be not only your enemy but also your friend. The person who shows you the mirror just shows you the true picture of you, it does not matter whether he is your friend or your enemy. Sometimes we are unable to recognize our shortcomings and sometimes we do not even feel that we have any shortcomings. You would benefit from such a person that you would not have to look for your shortcomings. Rather, there is someone who is doing this work for you himself. This will also save your energy, which you can use in carving yourself. But there are some people who keep finding faults in you. Their words have no basis. But never ignore their words either. His words may also be meaningful. If there is even a little truth in what they say then you will get another chance to improve yourself and if not then your enthusiasm will increase, because people only cross the path of those who are moving forward on the path of progress. Therefore, consider it a blessing to have such people who can show you a mirror and help you in grooming you and at the same time can help you become the best of the best.

सच्ची सीख(True lesson)

मुफ़्त में मिले ज्ञान को लोग उपदेश समझते हैं और उपदेश अक्सर भुला दिए जाते है।लेकिन वही ज्ञान जब पैसों से खरीदा जाए तो इन्सान उसे ज़िंदगी भर याद रखने की कोशिश करता है

हकीकत(Reality)

कितना भी खुद से भाग लो लेकिन। हकीकत से छुपकर कहां जाओगे?

No matter how much you run away, Where will you go to hide from reality?

हम अपनी वास्तविकता से भले ही कितना भी किनारा क्यूं न कर लें। जो सच्चाई है वो कभी बदल नहीं सकती। चाहे यह बात हमारी पहचान से सम्बंध रखती हो या फिर हमारी तत्कालीन परिथितियों से। ज्यादातर लोग समस्याएं आने पर दूसरों को और भगवान को दोष देते हैं या अपने बुरे वक्त का रोना रोते हैं और सोचते हैं कि कोई आए और हम पर तरस खाए।वो देखे की हम ज़िंदगी के किस दौर से गुजर रहे हैं। इससे बात नहीं बनी तो हम खुद को नशे के अंधे कुएं में झोंक देते है,बस चन्द पल के लिए खुद को भरमाने के लिए कि अब जिंदगी में कोई गम नहीं है। इसके बाद अगली सुबह एक नया रोना या फिर नशे की लत।बस यही ज़िंदगी बन कर रह गई है। अपने हालातों पर रोना भी एक तरह का नशा है, जिससे हम अपने जीवन की वास्तविकता झुठला सकें।हम दूसरों के आगे जीवन भर रोते रहते हैं। हमें पता है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा और न ही हमारी मुसीबतें कम होंगी। फिर भी हम अपनी हरकतों से बाज नहीं आते। ज़रा सोचिए किसी को अपनी परेशानियां बताने से क्या हाल मिल जायेगा और अगर कोई दूसरा इन्सान इसका हल दे भी दे तो ये किस्सा कितने दिन चलेगा ?आप फिर नई मुसीबत आते ही किसी और को ढूंढोगे। इसका सीधा मतलब यह है कि आप हर परेशानी के लिए दूसरे पर आश्रित हो चुके हैं। आकर्षण का सिद्धांत ये कहता है कि हम जिस किसी वस्तु या भावना के बारे में ज्यादा सोचते हैं, उसे हम उतना ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसका मतलब है कि यदि हम ज्यादातर अपनी परेशानियों का रोना रोयेंगे और लगातार उसके बारे में सोचेंगे तो हमें और भी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए परेशानियों और जीवन की समस्याओं पर रोना नहीं , बल्कि उन्हें हल करना,उनसे लड़ना सीखिए और हो सके तो उन पर हंसना शुरू कीजिए। फिर आपकी ज़िंदगी भी मुस्कुराने लगेगी।

No matter how much we move away from our reality. The truth can never change. Whether it is related to our identity or our current circumstances. Most of the people blame others and God when they face problems or cry about their bad times and think that someone should come and take pity on us. He should see what phase of life we are going through. If this doesn’t work then we throw ourselves into the blind well of addiction, just to deceive ourselves for a few moments that there is no sorrow in life anymore. After this, the next morning a new cry or drug addiction. This is what life has become. Crying over our circumstances is also a kind of addiction, due to which we can deny the reality of our life. We keep crying in front of others throughout our life. We know that this will not make any difference nor will our troubles reduce. Still we do not desist from our actions. Just imagine what kind of situation you will get by telling your problems to someone and even if someone else gives the solution, how long will this story continue? You will then look for someone else as soon as a new problem arises. This simply means that you have become dependent on others for every problem. The law of attraction says that the more we think about any object or emotion, the more we attract it towards us. This means that if we mostly cry about our problems and constantly think about them, we will have to face even more problems. Therefore, do not cry over the troubles and problems of life, but learn to solve them, fight them and if possible, start laughing at them. Then your life will also start smiling.

आशा ही दुखों का मूल है(Hope is the root of suffering)

कुछ करने के बदले स्वयं को कुछ मिलने या पाने की संभावना का भाव ही आशा है।तो फ़िर निराशा क्या है?उत्तर है आशा का टूट जाना या अपने मानदंडों पर खरा न उतरना।

जब भी हम किसी के लिए या अपने लिए कुछ करते हैं तो उससे एक आशा जुड़ जाती है कि अंत में हमें ये मिलेगा या फिर हमारे साथ ऐसा होगा परन्तु यदि हमें हमारी सोच के अनुरूप परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं तो फ़िर वहां से हमारे अंतरमन में निराशा का जन्म होता है। जो हमारे दुखों का मूल कारण है।

जब भी हम निराश होते हैं तो हमें मानसिक कष्ट की अनुभूति होती है और यही मानसिक कष्ट ही दुःख कहलाता है। ये दुःख हमें अन्दर तक तोड़ देता है और हमारा सुख-चैन सब कुछ छीन लेता है। तब हमारा जीवन अन्धकार से घिर जाता है। तो क्या तरीका है इस दुःख से बाहर निकलने का; इससे पार पाने का।

दुःख से मुक्ति…..?यह एक अत्यन्त जटिल प्रश्न है, जिसका हल ढूंढने का प्रयास युगों-युगों से चलता आ रहा है। कई ऋषियों,महात्माओं, ज्ञानियों,साधुओं और संतों ने इस गूढ़ तथ्य का हल ढूंढने में अपना जीवन लगा दिया। फिर एक उत्तर मिला-“जो दुःख का मूल कारण है उससे दूर रहो”। आज इस उत्तर का अर्थ सभी के लिए अलग अलग है। हमने अपनी सोच-समझ के अनुरूप इसका भिन्न भिन्न अर्थ लगा लिया है। 

 आज अपने दुखों से सभी मुक्ति चाहते हैं परन्तु इसके कारण पर कोई विचार नहीं करता। किसी के लिए पैसे की कमी दुःख का कारण है तो किसी के लिए अपनों का साथ न देना। किसी को ईश्वर प्राप्ति में दुःख से मुक्ति दिखाई देती है तो किसी को सांसारिक भोग-विलास में। कोई असफल होने पर दुःख है तो कोई इच्छा की पूर्ति न होने से। इसके लिए किसी ने घर छोड़ा,तो किसी ने परिवार,किसी ने सन्यास लिया, तो किसी ने धन प्राप्ति में ख़ुद को झोंक दिया। परन्तु किसी को भी उसके दुख से मुक्ति नहीं मिली।

तो क्या है दुखों से मुक्ति का रहस्य जो हमारे समझ से परे है। आपको ज्ञात होगा कि जब आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे तो आपके मन में इससे बचने का क्या उपाय सूझा जो था धन कमाना। अब आपने सोचा कि इससे आपका दुख कम होगा। पर इससे बस आपकी समस्याएं कम हुईं,आपका दुख नहीं।अब आपकी आवश्यकता और इच्छा बढ़ी और आप फिर आशा  करते हैं कि और अधिक धन आपकी समस्या को सुलझा देगा।लेकिन फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ा।अब जो अपने आशा की वो निराशा में और आपकी निराशा दुःख में बदल गई। और आप फिर वहीं हैं जहां से आपने शुरू किया था।

  भगवान श्री कृष्ण ने गीता में  दुखों से मुक्ति का मार्ग बताया है,उन्होने कहा है कि “कर्म करो,फल की चिंता मत करो”। अर्थात् अपना कर्त्तव्य तो करते जाओ परन्तु उसके पश्चात्  मिलने वाले परिणाम की चिंता भूल जाओ। इसका एक अलग अर्थ यह भी है कि अपने कर्मों के बदले कुछ मिलने की आशा त्याग दो। यदि इसे ही छोड़ दिया तो इसके टूटने पर होने वाली निराशा और दुख नहीं होगा।

      इसलिए यदि हम अपने या किसी के लिए कुछ कर रहे हों तो हमे उसके बाद जो मिले उसे स्वीकार करना चाहिए। जैसे आपने बुरे समय किसी का साथ दिया तो यह आशा न करें कि वो भी आपके बुरे समय में आपका साथ देगा। क्योंकि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आप हताश और निराश होंगे जो आपको दुख पहुंचाएगा। इस प्रश्न का यही उत्तर है कि किसी व्यक्ति या वस्तु के लिए कर्म करो मगर उम्मीद नहीं क्योंकि अगर ये टूटी तो आप भी टूट जाओगे। इसके स्थान पर अपने मन में संतोष और धीरज को धारण कर आप मानसिक दुख से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि यह करना अत्यन्त कठिन है पर असंभव नहीं।