अच्छाई और बुराई एक ही सिक्के के दो पहलु हैं,
जो सभी के भीतर होती हैं। ये श्री कृष्ण और
मामा शकुनि की तरह हैं,जो हमारा गुरु बनकर हमें
राह दिखाती है।अब यह हम पर निर्भर है कि हम
क्या चुनते हैं? अर्जुन बनना या फिर दुर्योधन।

गुरु का हमारे जीवन में विशेष स्थान है, चाहे वह कोई भी हो। कोई महात्मा या कोई आम इन्सान जिससे भी हम कुछ अच्छा सीख सकें। किन्तु ध्यान रहे गुरु का चुनाव भी बहुत सोच समझकर करना चाहिए। किसी अल्पज्ञानी अथवा दुरबुद्धि व्यक्ति का चयन गुरु के रूप में करने से भयंकर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। अतः सोच समझकर दूरदर्शिता के साथ चुनाव करें।
