भलाई और बुराई(Gudness & Badness)

ज़माने को भलाई अब कहीं भी रास ना आती,
भलाई संग बुराई की भी थोड़ी सी ज़रूरत है।

बात कड़वी है फिर भी सच हैं अच्छे इंसान हालत जानवर की उस पूंछ की तरह रह गई हैं, जिसकी ज़रूरत तो होती है मगर सिर्फ मक्खियां उड़ाने के लिए। उसके सिवा उससे किसी और कोई लेना देना नहीं होता।जब भी लोगों को ज़रूरत होती इस्तेमाल करते हैं और जब नहीं होती तो दूध की मक्खी सा हाल करते हैं।

मतलबी लोग(Selfish People)

सभी हैं मतलबी यारों,
कहीं मतलब की यारी है।
कहीं मतलब के रिश्ते है,
कहीं ये दुनियादारी है।
कोई मतलब का भूखा हैं,
कोई मतलब का है प्यासा,
कहीं मतलब की बोली है,
कहीं मतलब की है भाषा।
सभी हैं मतलबी जग में,
बातें मतलब की प्यारी हैं ।
जो भी कुछ दिख रहा तुमको,
सभी मतलब से भारी है।
सभी हैं मतलबी यारों,
कहीं मतलब की यारी है।
कहीं मतलब के रिश्ते है,
कहीं ये दुनियादारी है।

आजकल लोग बस मलतब के लिए रिश्ते निभाते या बनाते हैं। ये जानते हुए भी कि इन्सानी रिश्ते लेन देन पर टिके होते हैं, मतलब पर नहीं।इसमें अगर प्यार और सच्ची भावनाओं का लेन देन करोगे; तो मतलब तो अपने आप ही निकल जायेगा। फिर भी यहां देने की किसको पड़ी है,आजकाल सभी बस लेना जानते हैं। अगर काम निकालना हो तो अपना और निकल गया तो बुरा सपना।