खुद को दिल से अपनाना बहुत मुश्किल है (It’s very difficult to accept yourself wholeheartedly)

किसी को माफ़ करना आसान है लेकिन, खुद को मन से स्वीकारना बहुत मुश्किल। 

हमारे आस-पास कुछ लोग होते हैं ।कुछ अपने,कुछ पराए,कुछ दोस्त,तो कुछ दुश्मन; लेकिन मानो अगर किसी से कोई गलती हो जाए। जिससे आपका जीवन बुरी तरह प्रभावित होता हो,तो आप क्या करेंगे? उससे बदला लेंगे या उसे सजा देंगे। कुछ लोग ऐसा ही करते हैं ,पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो दूसरों को गलतियों पर उन्हें माफ करने का जिगर रखते हैं। पर दूसरों को माफ़ करना हिम्मत का ही सही पर उतना मुश्किल काम नहीं है, जितना खुद की गलतियों पर खुद को ही दिल से माफ़ करना और खुद को स्वीकार करना।”खुद को माफ़ करना “यह एक बहुत बड़ी बात होती है। ये जितना सुनने में और कहने में आसान लगता है, उससे कहीं ज्यादा कठिन कार्य है। अब आप सोचेंगे कि ख़ुद को माफ़ करना ये तो बहुत ही आसन काम है,लेकिन मै कहूंगा “जी बिल्कुल नहीं”।क्या आपने; अपने जीवन में कुछ ऐसा काम किया है, कोई ऐसी गलती; जिसने आपकी ज़िंदगी का रुख ही बदल कर रख दिया हो।कुछ ऐसा जिसे याद करके आपको पछतावा होता है कि काश मुझसे ये गलती न हुई होती।सभी ने अपने जीवन में कोई न कोई ऐसा काम ज़रूर किया होता है।कोई ऐसी गलती या कोई चूक की होती है ,जिसका उसको जीवन भर पछतावा होता रहता है।अब ख़ुद से पूछिए आपको उस गलती की याद बार बार आ रही है या नहीं।अगर जवाब “नहीं”है तो मुबारक हो आप खुद को माफ़ कर चुके हैं और अगर आपका जवाब “हां” में है। आपको अपनी की हुई गलती बार बार याद आ रही है तो आपको खुद को दिल से माफ़ करने की जरूरत है पर बात यहां ही नहीं खत्म होती।एक बात और है जो मैं आपसे कहना चाहता हूं।आज समाज एक नई तरह की समस्या से जूझ रहा है, और वो है खुद की कमियों को स्वीकार न करना या खुद को खुद की कमियों के साथ स्वीकार न करना। अगर आप अपनी कमियों और गलतियों को दिल से नहीं स्वीकारते हैं तो आप उनसे सीख लेकर कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। कभी-कभी यह समस्या व्यक्तिगत अहंकार से जुड़ी होती है।लेकिन हम यहां उसकी बात नहीं कर रहे।हम बात कर रहे हैं।खुद को खुद की ही कामियों के साथ स्वीकारने की ,जो की अत्यन्त ही दुष्कर कार्य है।यह कमियां शारीरिक, मानसिक या व्यवहारिक किसी भी प्रकार ही हो सकती हैं।हो सकता है आपके अन्दर कोई जन्मजात दोष जैसे-तोतलापन,किसी भी प्रकार ही विकलांगता या फ़िर आपका व्यवहार।हो सकता है आप अन्य लोगों का जल्द ही यकीन कर लेते हैं इसलिए आप जल्दी धोखा खा जाते है।आपके व्यवहार से दूसरों को तो लाभ होता है पर आप हमेशा लोगों की चालाकी और षड्यंत्रों का शिकार हो जाते हैं। लेकिन ये जरूरी नहीं कि आपके साथ ये समस्या जन्मजात ही हो या वास्तव में यह कोई समस्या भी हो।यह आपके मानने पर निर्भर है।अगर मानवीय व्यवहार ही बात करें तो अगर कोई व्यक्ति सीधा है तो यह कोई दोष नहीं है। अपने इस व्यवहार के कारण अगर कोई परेशान है तो उसे बस यह समझने की आवश्यकता है कि हर व्यक्ति के साथ आप अच्छे नहीं हो सकते। यदि आप मे कोई शारीरिक या मानसिक दोष हैं तो इसके लिए रोने या पछताने की आवश्यकता नहीं है।मेरी बातें कड़वी लग सकती हैं, पर आप खुद सोचिए कि किसी भी कमी या दोष या किसी गलती पर यूं ही जीवन रोने और पछताने से कुछ होता है भला । इस चार दिनों की जीवन यात्रा को यदि रोते, पछताते बितायेंगे तो आपने जीवन कब जिएंगे?इसलिए यदि जीवन में आपको आगे हंसते-मुस्कुराते बढ़ना है तो खुद को खुद की कमियों के साथ स्वीकारिए और अपनी गलतियों के लिए खुद को माफ़ करते हुए आगे बढ़ते रहिए, नहीं तो सारा जीवन बस रोने में ही चला जाएगा और आप अपने जीवन में जो कुछ भी पाना चाहते हैं;आप उसे मिलने से पहले ही खो देंगे। इसलिए खुद और खुद के जीवन का सम्मान करें उसका अपमान नहीं क्योंकि ईश्वर ने जो कुछ भी इस धरती पर सृजन करके भेजा है, वो सर्वोत्तम है और यदि आपको कुछ कमी लग रही हो तो एक सत्य जान लीजिए कि इस संसार में ऐसा कुछ भी नहीं जिसमें बेहतर बनने की गुंजाइश न हो।