मुझे है क्या पड़ी,जो ख़ुद ही ख़ुद को मैं बुरा बोलूं?
ज़माना है खड़ा संग में, वो किस दिन काम आयेगा?


आजकल किसी को अपनी कमियों या बुराईयों के बारे में सोचने की ज़रूरत ही नहीं होती। दुनिया और आस पड़ोस के लोग; हो ना हो आप में कुछ न कुछ नुक्स ढूंढ़ ही लेते हैं। इसलिए फ़िक्र न करें लोग तो हैं न आपका ज़िक्र करने के लिए।

