सहारा(Support)

“If the crutches are not destined, then they cannot take the traveler far with their support. Those who want to reach their destination have to decide their own path.”

जिंदगी का सफ़र(Journey of Life)

यह कविता मेरे जीवन की सच्ची घटना पर आधारित है। कोविड-19 महामारी का समय चल रहा था, उस समय लॉकडाउन से ठीक पहले मैं घर के लिए निकला, लेकिन बीच में ही फंस गया. और मुझे अपने एक मित्र के यहाँ एक महीने तक रहना पड़ा, उस समय मेरे मन में जो भावनाएँ थीं, उन्हें मैंने कागज़ पर उतार दिया था और अब उसे आपके सामने रख रहा हूं-

राह के भटके हुए को राह की पहचान क्या,
सैकड़ों की भीड़ में भी हमसफ़र कोई नहीं।
आशियाना छोड़कर यूं राह में निकले थे हम।
एक पल मुड़कर जो देखा थी डगर कोई नहीं।
बात पहले कुछ दिनों की चार थे हम चल दिए।
मीलों का लंबा सफर था; थी खुशी अब बढ़ चले।
पास फिर मंजिल के आकार आंख अपनी जब खुली।
रास्ते का ना ठिकाना मंज़िलें कोई नहीं।
राह के भटके हुए को राह की पहचान क्या, सैकड़ों की भीड़ में भी हमसफ़र कोई नहीं। सोचकर कुछ रुक गया था थम गया है ये सफ़र। वक्त का ऐसा असर है जिंदगी है बेअसर। शाख के पत्तों के जैसे हौसला है टूटता। हाथ से अपने उम्मीदों का है दामन छूटता। क्या यही किस्मत का लेखा क्या यही अंजाम है? खा समुंदर के थपेड़े डोलती अब नाव है। मौत की मजधार में पतवार भी कोई नहीं। राह के भटके हुए को राह की पहचान क्या, सैकड़ों की भीड़ में भी हमसफ़र कोई नहीं। रास्ते दो पास मेरे हार लूं या ठान लूं। खौफ की मुश्किल घड़ी में हार कैसे मान लूं। मिट गया जिसने ज़मीन पर अपने घुठने रख दिये।। चलते-चलते खुद ब खुद ही कफीलों से कट गए। वक्त है दुश्मन के जैसे पर क्यों हारें क्यों थकें। अगर हौसलों ने राह पकड़ी फिर मंजिलें मुश्किल नहीं। राह के भटके हुए को राह की पहचान क्या, सैकड़ों की भीड़ में भी हमसफ़र कोई नहीं।

This poem is based on a true incident of my life. The time of Covid-19 epidemic was going on, at that time I left for home just before the lockdown, but got stuck in the middle. And I had to stay with one of my friends for a month, at that time I have put down on the paper,feelings that were in my mind and now I present it t

What is the recognition of the path to the one who has lost his way? There is no companion even in a crowd of hundreds. Leaving our home, we had set out on the way like this. Turning back for a moment, what I had seen was no one else. It was only a matter of days before we left. It was a long journey of miles; There was happiness, now let it increase. Near again the shape of the floor When your eyes opened. There is no place on the way, no destination. Something had stopped thinking that this journey has stopped. Such is the effect of time that life is ineffective. Courage breaks like the leaves of a branch. The hem of our expectations is out of hand. Is this the article of fate, is this the result? Now the boat is rocking due to the thrashing of the sea. There is no rudder in the vertex of death. What is the recognition of the path to the one who has lost his way? Even in a crowd of hundreds, there is no companion. I have two options, give up or be determined. How to accept defeat in the difficult time of fear. The one who put his knees on the ground is gone. While moving along, they themselves got separated from a group of travelerss. Time is like an enemy, but why to lose, why to get tired. If the spirits hold the path, then the destination is not difficult. What is the recognition of the path to the one who has lost his way? There is no companion even in a crowd of hundreds.

“Obstacles are a part of our life. They are the teachers who help us to identify our strengths and weaknesses.”

बाधाएं तो हमारे जीवन का हिस्सा हैं।ये वो शिक्षक है जो हमारी खूबियों और ताकत को पहचानने में हमारी मदद करती है।

कुछ लिखते हैं(Let’s write something)

चल कलम उठा कुछ लिखते हैं। कुछ मन की बातें लिखते हैं। कुछ गुज़रे कल,कुछ बीते पल, जो होंगे कल की लिखते हैं। चल कलम उठा कुछ लिखते हैं। कुछ मन की बातें लिखते हैं। जब लिखने का मैंने सोचा। था मन पर भारी बोझ लदा। कुछ जो बीती अपने दिल पर। कुछ किए का था अफ़सोस लदा। जो लिया-दिया इस जीवन में। अगर चाहूं उभरे इस दिल पर है। जब भी पड़ती हैं आंखे तो। बस कोरे पन्ने दिखते हैं-2। चल कलम उठा कुछ लिखते हैं। कुछ मन की बातें लिखते हैं। हां अध्याय नहीं मेरा जीवन। जो कोई पथ अनुगामी हो। पर व्यर्थ नहीं सब कुछ इसमे। जो लिखे शब्द निष्कामी हों। फिर भी कुछ कोशिश करनी है। दे सकूं किसी को कुछ ऐसा। एक नई सुबह एक नई किरण। सपने जो सचमुच दिखते हैं। चल कलम उठा कुछ लिखते हैं। कुछ मन की बातें लिखते हैं।

Let’s pick up the pen and write something. Some write what is on their mind. Some yesterday passed, some past moments, which will happen tomorrow, they write. Let’s pick up the pen and write something. Some write what is on their mind. When I thought of writing, There was a heavy burden on my mind. My heart was filled with regret for something I had done in the past. Whatever was given in this life, If I want, it is on this heart. Whenever my eyes fall, I see only blank pages-2. Let’s pick up the pen, write something. Write the words of the mind. Yes chapter no my life. Someone who follows the path. But not everything in this is in vain. The words that are written should be useless. Still have to try something. I can give something like this to someone. A new dawn,a new ray of hope. Dreams that come true. Let’s pick up the pen, write something. Write the words of the mind.

पथ के साथी(Fellow travelers)

जीवन का गंतव्य ढूंढने,
चला पथिक मैं अभिलाषी।
पथ पर चलकर सत्य ये जाना,
कोई नहीं पथ का साथी।
हुई घोर निराशा टूटी-आशा,
तब सहसा ही यह जाना।
लक्ष्य मेरा जीवन मेरा है,
मैं ही खुद का संगाती (साथी)।
सबके अपने स्वार्थ जुड़े हैं,
रिश्ते और जज़्बातों में।
तू मेरा है;मैं तेरा,
ये शब्द जुड़े आभासों से।
सोचो ना आशाएं होती,
तो बोलो फिर क्या होता?
होते सब जंगल के वासी(पशु समान),
या होते सब संन्यासी।
प्रेम-त्याग कलयुग में दिखता,
बस पुस्तक और बातें में।
मैं जानूं और सब ये जाने,
है स्वार्थ जुड़ा सब नातों से।
सत्संग और उपदेश व्‍यर्थ है,
अगर ये बात नहीं समझी।
मतलब के हैं रिश्ते-नाते,
मतलब की दुनियादारी।
सबकी अपनी-अपनी जरूरत,
सबके अपने-अपने बोल।
प्रेम के बदले प्रेम न मिलता,
रिश्ते हैं माटी के मोल।
सबके मुख पर एक मुखौटा,
जब उतरे तो भेद खुले।
समय बुरा हो जब भी अपना,
रिश्ता कौन निभाता है?
निश्चल प्रेम तो माता करती,
चाहे जो-जैसे हो तुम।
पर है पिता का स्थान नहीं कम,
जो पालन करते हर दम।
जिसने भी है सत्य ये,
जन मानव वो सच्चा ज्ञानी।
स्वार्थ रहित जो प्रेम साध ले,
होवे सबका विश्वासी।
जीवन के इस दुर्गम पथ पर,
चलते-चलते अब जाना।
जो देगा वो ही पायेगा,
कठिन नहीं है समझाना।
दूजों से चाहो जो कुछ भी,
पहले पहल तुझे करनी।
यदि सब सबका मुख लगे देखने,
बाद पड़ेगी पछतानी।

समय-समय की बात है बंधु,
समय बड़ा बलधारी है।
कभी मित्र सा परम हितैशी,
कभी ये अत्याचारी है।
सच ही कहा है बड़े जनों ने,
समय ही;समय पर बतलाता।
कौन यहां पर कितना अपना,
कितना कौन पराया है।

“मां-बाप के सिवा इस दुनिया में मुश्किल से ही ऐसे रिश्ते मिलना मुमकिन है जो आपसे सच्चा प्रेम करते हों।”

कुछ करता जा(Do Something)

जो आया है वो जाएगा।
जो आज है क्या टिक पाएगा?
है भीड़ भरी दुनिया प्यारे।
तू कौन है कौन बताएगा?
गर चाहे तुझको जाने सब।
था कौन तुझे पहचानें सब।
जग को कुछ ऐसा देता जा।
जाते-जाते कुछ करता जा।
बनके दरिया तू बहता जा-2
नदिया को तो देखा होगा ?
जिस ग्राम-नगर से जाती है।
जल-अन्ना-हरित संग।
खुशहाली की सौगातें दे जाती है।
लोगों को जो खुशियां बांटे।
कुछ बातें-काम तू करता जा।
जाते-जाते कुछ करता जा।
बनके दरिया तू बहता जा-2
खुद का हित तो पशु भी सोचे।
सबकी सोचे इंसान वही।
बिन लालन-पालन मां की भी।
शिशु के सम्मुख पहचान नहीं।
जब गढ़नी है मूरत खुद की।
कुछ खाली घट भी भरता जा।
जाते-जाते कुछ करता जा।
बनके दरिया तू बहता जा-2

What has come will go. What is there today, will it last? It’s a crowded world dear. Who are you? Who will tell? Even if everyone wants to know you. Everyone should recognize you. Keep giving something like this to the world. Keep doing something while going. You keep flowing like a river. You must have seen the river. The village-town from which it goes. With water-grains-greenery. Gifts of happiness are given. The one who distributed happiness to the people. You keep doing some things else. Keep doing something while going. You keep flowing like a river. Even animals think of their own interest. Everyone’s thoughts are the same person. Without the upbringing of the mother too. No recognition in front of the baby. When you have to make your own idol. Keep filling some empty pitchers too. Keep doing something while going. You keep flowing like a river.

बोलो किसकी गलती है?(Tell me whose fault is it?)

अक़्सर हम अपनी गलतियों का दोष दूसरों के सिर पर मढ़ देते हैं और हमेशा झूठे बहानों से ख़ुद को दिलासा देते रहते हैं। जबकि अपने जीवन में घटने वाली अच्छी या बुरी घटनाओं के उत्तरदायी हम स्वयं हैं। ये कविता हमें बस यही समझाने का प्रयास करती है।

तेरे बस की बात नहीं है,
यह कहकर किसने रोका?
जब जब पंख पसारे तुमने,
उड़ने से किसने टोका?
जब जब पथ पर कदम बढ़ाए,
चलने से थे हिचके तुम।
ढूंढें नए बहाने नित -दिन,
मन के संग-संग भटके तुम।
अब कहते हो वक्त बुरा है,
हालातों ने मार रखा।
अपने मन के भीतर झांको,
बोलो किसकी गलती है?
यह सब तेरी गलती है,
हां यह बस तेरी गलती है।
सबकी बातें तो छोड़ ही दो,
तुमने भी थे कुछ ख़्वाब बुने।

था पता तुम्हें बिन कोशिश के,
न खुद ही कोई बात बने।
यह मंशा जो सागर तरने की,
जल उतरे बिन साकार नहीं होगी।
अब कहते हो मैं क्या करता?
बस उसकी ही चलती है ।
खुद मन के भीतर झांको,
बोलो किसकी गलती है?
यह सब तेरी गलती है,
हां यह बस तेरी गलती है।
टाल रहे तुम बात-बात पर,
यूं हाथों पर हांथ धरे।
कहते मेरे दिन आएंगे,
मन में हो विश्वास भरे।
बोलो तुम ही बिन पग धारे,
किसने मंज़िल को पाया?
बाधाओं-विपदाओं से डर,
किसने ध्वज है लहराया?
जान-बूझ सब तुम ना बदले,
क्या दुजे की गलती है?
अपने मन के भीतर झांको,
बोलो किसकी गलती है?
यह सब तेरी गलती है,
हां यह बस तेरी गलती है।
जीवन में जो कष्ट उठाए,
तुमने ख़ुद को बहलाया।
दुजे सिर पर दोष मढ़ा बस
खुद को दुखिया बतलाया।
एक हांथ ताली ना बजती
तुम ही मुख से कहते हो।
जीवन में जो नाद है छाया
क्या बस एक हंथेली है?
अपने मन के भीतर झांको
बोलो किसकी गलती है?
यह सब तेरी गलती है।
हां यह बस तेरी गलती है।

“हमें आगे बढ़ने से रोकने वाला कोई और नहीं बल्कि हम स्वयं हैं हमारी राहों में किसी और ने नहीं बल्कि हमने ही पत्थर बिछा रखे हैं।जब तक हार न मानो;हार संभव नही ये तो मन की बस एक अवस्था मात्र है।”

“There is no one to stop us from moving forward but we ourselves, no one else but we have laid stones in our path. Unless you give up; defeat is not possible, it is just a state of mind.”