कोई व्यंग्य बाण से हो आहत,
पर अधरों पर मुस्कान लिए।
चलता रहता हो अविचल सा,
कड़वी बातों से ज्ञान लिए।
बाधाओं से अविरत लड़कर,
वो ही इतिहास बनाते हैं।
जिनके मुख पर हो मौन सजा,
इक दिन वो पूजे जाते है।
अपमान से हारा कौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
है दो शब्दों का मेल मात्र,
पर अद्भुत क्षमता का श्रोत यही।
जब जुड़ा रहा सद्भावों से,
निर्माण से ओत व प्रोत यही।
यदि मूल छिपी इसके कटुता,
या बैर भाव से हो दूषित।
तब महाविनाश का शस्त्र ये बन,
मानव का नाश कराती है।
जीवन-विनाश इस पर निर्भर,
किस भाव ने धारा मौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो गरजे ना बरसे बादल,
जो बरसे ना गरजे बादल।
जब मुख से फूटे शब्द ध्वनि,
संकल्प के पांव करे घायल।
निज भावों से उपर उठकर,
कुछ करके जो दिखलाते हैं।
जिनके मुख पर हो मौन सजा,
एक दिन वो पूजे जाते हैं।
दुर्भाव से हारा कौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
प्रायः ऐसा ही होता है,
मुख करते हैं आघात यहां।
दूजे के हिय की पीड़ा का,
किसको होता आभास यहां?
खल को ना अपने कर्म खले,
ना अपने कल की हो चिन्ता।
बस प्राण बसे अपकार में ही,
मुख से करते विष की वर्षा।
उपहास-अपमान के बाणों से,
हो घायल जो मुस्काते हैं।
जिनके मुख पर हो मौन सजा,
एक दिन वो पूजे जाते हैं।
कटु शब्द से हारा कौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
मौन में बड़ी शक्ति होती है। हम जब अपनी भावनाओं को दबाते है अर्थात् प्रर्दशित नहीं करते हैं तो उसमें अपार शक्ति संचित हो जाती है। जिसका उपयोग आप चाहें तो निर्माण के लिए करें अथवा विनाश के लिए, यह आप पर निर्भर है। उदाहरण के लिए जैसे कोई आपका अपमान करता है;आपको नीचा दिखाता है तो आपके पास उसे प्रतुत्तर देने के दो विकल्प हैं। पहला उसे तुरन्त प्रत्युत्तर देकर अर्थात् अपमान के बदले अपमान करके और दूसरा उसे भविष्य में निरुत्तर करके। आप भविष्य में अपना जवाब भी उसे दो तरीकों से दे सकते हैं। पहला भविष्य में उससे अपने अपमान का बदला लेकर अर्थात् उसे कष्ट पहुंचाकर और दूसरा अपने कर्मों से उसकी बोलती बन्द कराके।यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने अपमान के बदले उसका अहित करते हैं या अपनी सफलता से उसे गलत साबित करके उससे बदला लेते हैं। यदि आप उसका बुरा करेंगे तो आप खुले तौर पर उसे अपना दुश्मन बना लेंगे जो आपको हानि पहुंचाने का प्रयत्न करेगा और इससे आपका चरित्र भी दुष्प्रभावित होगा फिर आप भी उसकी ही तरह बन जायेंगे। या फिर इसके ठीक विपरीत आप अपनी उपलब्धियों से; अपनी सफलता से उसे प्रतुत्तर दे सकते हैं। जिससे वह स्वयं ही लज्जित हो जायेगा और अगली बार आपसे दुबारा दुर्व्यवहार नहीं करेगा। चयन आपका है कि आप अपमान के बदले अपमान करते हुए अपनी सज्जनता का नाश करते हैं या अपने कर्मों से ऐसे लोगों को निरुत्तर करते हैं। विचार अवश्य कीजिए।
There is great power in silence. When we suppress our emotions, that is, do not show them, immense power gets accumulated in it. Whether you want to use it for construction or destruction, it is up to you. For example, if someone insults you or puts you down, you have two options to respond to him. First by giving him immediate response i.e. by insulting him in return for insult and secondly by leaving him speechless in the future. You can also give your answer to him in two ways. First by taking revenge of your insult from him in the future by causing him pain and second by making him stop speaking through your actions. It depends on you whether you harm him in return for your insult or take revenge from him by proving him wrong with your success. . If you do bad to him then you will openly make him your enemy who will try to harm you and this will affect your character also and then you too will become like him. Or just the opposite, with your achievements; You can respond to him with your success. Due to which he himself will feel embarrassed and will not misbehave with you again next time. The choice is yours whether you destroy your gentlemanly self by giving insult for insult or render such people speechless with your actions. Please think about it.

















