मन की इतनी सुनता क्यूं है?(Why do you listen to your mind so much?)

जब-जब तूने पंख उठाए,
मन ने कितने खेल रचाए।
कोशिश तेरी है बिन मतलब,
पथ पर पग-पग ये भरमाए।
हुए पांव घायल जब तेरे,
फिर उठने से डरता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
हर बार जो तूने ज़िद ठानी,
चाहा जो सागर को तरना।
मन ने फिर प्रश्न खड़े करके,
चाहा बाधाओं को रखना।
बस अनसुलझे से धागे हैं ये,
मन में जाले बुनता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
कुछ भी सोचे कुछ भी चाहे,
मन ने कब मुश्किल राह चुनी।
भय खाता ये बदलावों से,
इसको तेरी परवाह नहीं।
हर बार है हारा जीवन में,
पछताया इसकी सुन-सुनकर।
कह दे अब तक क्या मिल पाया?
तुझको जीवन में डर-डरकर।
जीवन तो संग्राम है ठहरा,
लड़ने से फिर डरता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
बढ़ चला सफ़र की राह में जो,
हिम्मत की मुट्ठी को बांधे।
बाधाओं की परवाह न कर,
चलता चल तूं डर के आगे।
मंज़िल भी बाहें फैलाकर,
फ़िर तुझको गले लगाएगी।
राहों में बिछी जो शूल तेरे,
फूलों का पथ बन जायेगी।
बाधाओं से ही निखरेगी,
तेरे व्यक्तिव की हर क्षमता।
तूं छोड़ दे डर अब कदम बढ़ा,
पूरी होगी फिर हर मंशा।
आशा है,सपने भी होंगे,
पूरा करने से डरता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
लक्ष्य का पथ आसान कहां,
कहीं कंकड़ है कहीं कीचड़ है।
बिन कष्ट उठाए जीवन में,
पाना कुछ भी अति दुष्कर है।
बिन गूंथे माटी ना चाक चढ़े,
बिन स्वर्ण तपे कुन्दन कैसा?
बिन बाधाओं विपदाओं के
बिन जीत-हार जीवन कैसा?
हर हार तुझे सिखलाएगी,
असफलता से डरता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?

जब भी हम कुछ करना चाहते हैं तो हमारा मन हमें रोकता है। ये हमें डराता है,भ्रमित करता है और हमारे हृदय में शंका का बीज बोता है जिससे हम अपने लक्ष्य पथ से विमुख हो जाएं।एक बात समझ लिजिए कि हमारा मन हमें इन्द्रिय सुखों की ओर भटकता है जैसे-हद से ज्यादा सोना,आराम करना, आलस करना, नए बदलावों से इंकार करना आदि। ये हमें हर उस काम में लगाने की कोशिश करता है जिससे हमारा भला दूर दूर तक न हो सके।इसलिए हमें अपने मन की उन बातों को मानने से इनकार कर देना चाहिए जो हमारे विकास के मार्ग में बाधक हैं।

Whenever we want to do something our mind stops us. It scares us, confuses us and sows the seeds of doubt in our heart due to which we deviate from our target path. Understand one thing that our mind wanders towards physical pleasures like excessive sleeping, resting etc. , being lazy, refusing new changes etc. It tries to involve us in every work which cannot do us any good. Therefore, we should refuse to accept those things in our mind which are obstacles in the path of our development.

सुकून(Peace of Heart)

दिल क्या ढूंढे दिल क्या चाहे?
क्यूं मारा मारा फिरता है?
अब इसे कौन सी कमी हुई?
जो बन बेचारा फिरता है।
कभी मन्दिर में मत्थे टेकें,
कभी गलियों की है खाक छनी।
कभी दरगाहें कभी गुरुद्वारे,
पर कहीं न कोई बात बनी।
कुछ तो चाहे ये दिल मेरा,
जो बन आवारा फिरता है।
दिल क्या ढूंढे दिल क्या चाहे?
क्यूं मारा मारा फिरता है?
अब इसे कौन सी कमी हुई?
जो बन बेचारा फिरता है।
हर राहों पर ढूंढा इसको,
कितनी सारी महफ़िल देखी।
पर चकाचौंध की दुनियां में,
खोजा जिसको मुझको न मिली।
लख किए जतन है हार गया,
अब हारा-हारा फिरता है।
दिल क्या ढूंढे दिल क्या चाहे?
क्यूं मारा मारा फिरता है?
अब इसे कौन सी कमी हुई?
जो बन बेचारा फिरता है।
हां लौटा थककर आया मैं,
घर की दहलीज़ के जब अन्दर।
होकर बेफिक्र जो सर रक्खा,
मैने अपनी मां के आंचल।
है सुकून मिला जो ढूंढा रहा ,
था मैं अपने घर के बाहर।
जिसकी खातिर दर-दर भटका,
वो पाया है खुद के अन्दर।
अब जान गया है दिल मेरा,
क्यूं बन बंजारा फिरता है।
ये क्या ढूंढे ये क्या चाहे,
क्यूं मारा-मारा फिरता है।
अब इसे कौन सी कमी हुई,
जो बन बेचारा फिरता है।

What does the heart seek?
What does the heart desire?
Why does he roam around?
Now what did it lack?
Who wanders around like a pauper.
Sometimes bow down in the temple, Sometimes the streets are filled with dust & ashes.
Sometimes Dargahs,sometimes Gurudwaras,
But somewhere something happened.
This heart of mine wants something,
Who wanders around like a vagabond.
What does the heart seek?
What does the heart desire?
Why does he roam around?
Now what did it lack?
Who wanders around like a pauper.
Saw so many gatherings.
But in the world of glitz,
Searched for something I couldn’t find.
I tried my best but got defeated.
Now he wanders around defeated.
What does the heart seek?
What does the heart desire?
Why does he roam around?
Now what did it lack?
Who wanders around like a pauper.
Yes, I came back tired.
When inside the threshold of the house.
Who kept his head carefree,I my mother’s lap.
I have found the peace I was looking for.
I was outside my house.
For whom I wandered from door to door,
He has found it within himself.
Now my heart knows,
Why does he roam around like a nomad?
What does he seek,
what does he want?
Why does he wander around?
Now what lack did it have?
Who wanders around like a pauper.

“भागता रहा ज़िंदगी भर सुकुन के पीछे मगर मां की गोद जैसा सुकुन दुनियां में कहीं भी और नहीं।”

“I kept running after peace all my life, but there is no peace like mother’s lap anywhere else in the world.”

उठो चिन्ता छोड़ो (Wake up,stop worrying)

उठो व्यर्थ की चिंता छोड़ो,
यत्न करो विपदाएं मोड़ो।
जीवन तो उस ओर पड़ा है,
रोता क्यूं चुपचाप खड़ा है?
रोने से कुछ हो जायेगा?
अगर नहीं तो क्रंदन छोड़ो।
उठो धनंजय चिन्ता छोड़ो।
उठो धनंजय चिन्ता छोड़ो।
कुछ पल का छोटा सा जीवन,
मृत्यु उठे कब संग ले जाए?
समय कहा जो व्यर्थ करेगा?
करना है कुछ और उपाय।
कोशिश बिन रहने से अच्छा,
कुछ कर भले हार हो जाय।
हार गए तो क्या अन्तर है?
अब हाय-हाय की आदत तोड़ो।
उठो धनंजय चिन्ता छोड़ो।
उठो धनंजय चिन्ता छोड़ो।
औरों के आगे रोने से,
तेरा क्या कुछ बन भी पाया?
किसने तेरे आंसू पोंछे?
किसने तुझको धीर बंधाया?
अगर रहा है कोई ऐसा?
किसने कब तक साथ निभाया?
सोच समझ है व्यर्थ ये रोना,
अब शोक के सागर का मुख मोड़ो।
उठो धनंजय चिन्ता छोड़ो।
उठो धनंजय चिन्ता छोड़ो।
चिन्ता चिता समान है जिसमें,
कितने ही जीवन राख हुए हैं।
फ़र्क नही है एक ही डूबा,
संग-संग अपने भी साथ रहे हैं।
इस रोने की आदत ने ही,
कितने ही घर बार डुबाए।
जो हैं तेरे खातिर ; उनकी खातिर,
अब ये कुंठा छोड़ो ।
उठो धनंजय चिन्ता छोड़ो।
उठो धनंजय चिन्ता छोड़ो।

Get up, give up unnecessary worries, 
 Make efforts to divert the calamities. 
 Life is lying on the other side, 
 Why do you stand silently crying? 
 Will crying do anything? 
 If not, then stop crying. 
 Get up Dhananjay. Stop worrying. 
 Get up Dhananjay, stop worrying. 
 Life is short for a few moments, 
 When will death take you with it? 
 Who will waste time? 
 Some other solution has to be done. 
 Instead of trying to fix nothing, 
Even if you do something and get defeated.
What difference does it make if you lose?
Now break the habit of complaining.
Get up Dhananjay, stop worrying.
Get up Dhananjay, stop worrying.
Don’t cry in front of others. From, 
What could I achieve for you?
Who wiped your tears?
Who made you patient?
If there is someone like this?
Who supported you for how long?
Thinking, this crying is in vain, 
Now you turn face of the ocean of sorrow.
Get up Dhananjay, give up worrying.
Get up Dhananjay, give up worrying.
Worry is like a pyre in which,
So many lives have been reduced to ashes.
There is no difference, only one has drowned, 
I have been with myself as well.
This habit of crying itself,
Has sunk many a house.
For the sake of who is there for you;
For sake them,
Now leave this frustration.
Get up Dhananjay Chinta. Leave it. 
Get up Dhananjay, leave the worry.

यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता(Nothing is wasted here)

कैसे छोटा सा बीज कोई,
एक वृहत वृक्ष बन जाता है।
कैसे माटी का इक ढेला,
जल में हिल्लोल(तरंग)बनाता है।
जग में प्रभु की जो भी रचना,
उसका अब मोल हु समझाता।
यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
हां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
नन्ही सी चींटी को देखो,
कैसे जी जान लगाती है।
कैसे छोटी की नाव कोई,
तूफानों से टकराती है।
दृढ़ हो निश्चय संकल्प-अटल,
सब कुछ संभव है हो जाता।
यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
हां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
कैसे वेगित हो जल धारा,
पाषाण चीर बढ़ जाती है।
देखो कैसे जल की बूंदे,
मिलकर सागर बन जाती है।
जलते दीपक से तुम सीखो,
अंधेरे से है लड़ जाता।
यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
हां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
निर्जीव-सजीव जो हैं जग में,
सबकी अपनी-अपनी प्रभुता।
स्वयंमेव से तुच्छ बनो न कभी,
प्रभु ने सौंपी अदभुत क्षमता।
जैसे छोटे से पग धरके,
कोई पथ लंघन कर जाता।
प्रभु ने जग में जो कुछ भेजा,
है कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।

How a small seed becomes a big tree.
How a earthen lump creates waves in water.
Whatever creation of God in the world,
now I have its value explains.
Nothing goes waste here.
Yes, nothing goes waste here.
Look at the little ant how it tries its best.
How a small boat collides with the storms. .
Be strong in your determination steadfast,
If your determination is strong, then everything is possible.
Nothing goes waste here.
Yes, nothing goes waste here.
How does a stream of water move faster, cutting through even the stones?.
See how the drops of water,
come together to become the ocean.
You learn from the burning lamp,
It fights the darkness.
Nothing goes waste here.
Yes, nothing goes waste.
The inanimate and living things in the world,
Everyone has their own sovereignty.
Never become insignificant on your own accord,
The Lord has given you amazing ability.
Just like taking a small step,
A path Would have skipped.
Whatever God has sent into the world,
nothing goes waste.
Yes nothing goes waste here.

” किसी को भी ख़ुद के कम आंकते हुए उसे उसका उपहास या अपमान करने की भूल ना करें,हो सकता उसमें वह गुण हो जो आपकी क्षमता है परे है। क्योंकि ईश्वर की हर रचना स्वयं में अद्वितीय है।”

“Don’t make the mistake of underestimating or insulting someone; they may have qualities that are beyond your ability. Because every creation of God is unique in itself.”

बंटवारा(Partition)

जो बांट लगी है हम-तुम में,
वो बांट कहां तक ​​जाएगी?
बस जीवन को झुलसाएगी,
संबंधों को खा जाएगी।
जो बांट लगी है हम-तुम में,
वो बांट कहां तक ​​जाएगी?
हक की खातिर तो लड़ना बनता,
पर बांट भला अधिकार कहां।
छोटे-मोटे मतभेदों में,
प्रतिकार सा निम्न विचार कहां।
छोटी मोटी तू-तू-मैं मैं,
किस मोड़ भला पहुंचाएगी।
जो बांट लगी है हम-तुम में,
वो बांट कहां तक ​​जाएगी?
बस जीवन को झुलसाएगी,
संबंधों को खा जाएगी।
ये सोच सदा सब कुछ बांटे।
बांटी धरती-अम्बर-सागर।
घर-द्वार-पिता-मां-संबंधी,
सबको दो राहे पर लाकर।
यह दो शब्दों की रीति भला।
अब कौन सा खेल दिखाएगी?
बस जीवन को झुलसाएगी,
संबंधों को खा जाएगी।
जो बांट लगी है हम-तुम में,
वो बांट कहां तक जाएगी?
खुद की सोचे से है घटता,
धन-धान्य-शक्ति-भाईचारा।
सबके सोचे से है बढ़ता,
जग में जो कुछ भी है प्यारा।
यदि बांटे की मंशा तेरी,
तो बांट दया-शांति-समता,
दे बांट जो मन में प्रेम भरा,
हाँ बांट तू अच्छी सीख सदा।
ये सोच ही सच्ची जीवन की,
पीढ़ी को राह दिखायेगी।
अब बांट लगा सत्कर्मों
तेरी झोली भर जाएगी।
हाँ बांट लगा तू देर न कर।
खुशियां जग में मुस्काएंगी।

“आपसी मतभेदों के कारण हमनें आस पास लकीरें खींच रक्खी हैं । मानवता को बांटने के लिए हमनें जाति,धर्म,भाषा,समाज,देश;सबके टुकड़े कर दिए।किसी को भी नहीं छोड़ा और इसीलिए आज हमें अपने चारों ओर दुश्मन ही दुश्मन दिखाई देती हैं। इस दुश्मनी को अगर ख़त्म करना है तो हमें अपने दिल से इस बंटवारे की भावना का अन्त कर, प्रेम को स्थान देना होगा।”

कुछ लिखते हैं(Let’s write something)

चल कलम उठा कुछ लिखते हैं। कुछ मन की बातें लिखते हैं। कुछ गुज़रे कल,कुछ बीते पल, जो होंगे कल की लिखते हैं। चल कलम उठा कुछ लिखते हैं। कुछ मन की बातें लिखते हैं। जब लिखने का मैंने सोचा। था मन पर भारी बोझ लदा। कुछ जो बीती अपने दिल पर। कुछ किए का था अफ़सोस लदा। जो लिया-दिया इस जीवन में। अगर चाहूं उभरे इस दिल पर है। जब भी पड़ती हैं आंखे तो। बस कोरे पन्ने दिखते हैं-2। चल कलम उठा कुछ लिखते हैं। कुछ मन की बातें लिखते हैं। हां अध्याय नहीं मेरा जीवन। जो कोई पथ अनुगामी हो। पर व्यर्थ नहीं सब कुछ इसमे। जो लिखे शब्द निष्कामी हों। फिर भी कुछ कोशिश करनी है। दे सकूं किसी को कुछ ऐसा। एक नई सुबह एक नई किरण। सपने जो सचमुच दिखते हैं। चल कलम उठा कुछ लिखते हैं। कुछ मन की बातें लिखते हैं।

Let’s pick up the pen and write something. Some write what is on their mind. Some yesterday passed, some past moments, which will happen tomorrow, they write. Let’s pick up the pen and write something. Some write what is on their mind. When I thought of writing, There was a heavy burden on my mind. My heart was filled with regret for something I had done in the past. Whatever was given in this life, If I want, it is on this heart. Whenever my eyes fall, I see only blank pages-2. Let’s pick up the pen, write something. Write the words of the mind. Yes chapter no my life. Someone who follows the path. But not everything in this is in vain. The words that are written should be useless. Still have to try something. I can give something like this to someone. A new dawn,a new ray of hope. Dreams that come true. Let’s pick up the pen, write something. Write the words of the mind.

पथ के साथी(Fellow travelers)

जीवन का गंतव्य ढूंढने,
चला पथिक मैं अभिलाषी।
पथ पर चलकर सत्य ये जाना,
कोई नहीं पथ का साथी।
हुई घोर निराशा टूटी-आशा,
तब सहसा ही यह जाना।
लक्ष्य मेरा जीवन मेरा है,
मैं ही खुद का संगाती (साथी)।
सबके अपने स्वार्थ जुड़े हैं,
रिश्ते और जज़्बातों में।
तू मेरा है;मैं तेरा,
ये शब्द जुड़े आभासों से।
सोचो ना आशाएं होती,
तो बोलो फिर क्या होता?
होते सब जंगल के वासी(पशु समान),
या होते सब संन्यासी।
प्रेम-त्याग कलयुग में दिखता,
बस पुस्तक और बातें में।
मैं जानूं और सब ये जाने,
है स्वार्थ जुड़ा सब नातों से।
सत्संग और उपदेश व्‍यर्थ है,
अगर ये बात नहीं समझी।
मतलब के हैं रिश्ते-नाते,
मतलब की दुनियादारी।
सबकी अपनी-अपनी जरूरत,
सबके अपने-अपने बोल।
प्रेम के बदले प्रेम न मिलता,
रिश्ते हैं माटी के मोल।
सबके मुख पर एक मुखौटा,
जब उतरे तो भेद खुले।
समय बुरा हो जब भी अपना,
रिश्ता कौन निभाता है?
निश्चल प्रेम तो माता करती,
चाहे जो-जैसे हो तुम।
पर है पिता का स्थान नहीं कम,
जो पालन करते हर दम।
जिसने भी है सत्य ये,
जन मानव वो सच्चा ज्ञानी।
स्वार्थ रहित जो प्रेम साध ले,
होवे सबका विश्वासी।
जीवन के इस दुर्गम पथ पर,
चलते-चलते अब जाना।
जो देगा वो ही पायेगा,
कठिन नहीं है समझाना।
दूजों से चाहो जो कुछ भी,
पहले पहल तुझे करनी।
यदि सब सबका मुख लगे देखने,
बाद पड़ेगी पछतानी।

समय-समय की बात है बंधु,
समय बड़ा बलधारी है।
कभी मित्र सा परम हितैशी,
कभी ये अत्याचारी है।
सच ही कहा है बड़े जनों ने,
समय ही;समय पर बतलाता।
कौन यहां पर कितना अपना,
कितना कौन पराया है।

“मां-बाप के सिवा इस दुनिया में मुश्किल से ही ऐसे रिश्ते मिलना मुमकिन है जो आपसे सच्चा प्रेम करते हों।”