आह्वान(Evoke)

ऐ भारत के वीर सपूतों!
विजय पताका फहराओ।
उठो करो संधान लक्ष्य का,
बिना रुके चल जाओ।
सन्देह नहीं कि मार्ग है दुष्कर,
पर खिलता है पंक(कीचड़ )में पुष्कर
रत्नाकर-वन-नभ-पर्वत-जन,
आज सभी को बतलाओ।
ऐ भारत के वीर सपूतों!
विजय पताका फहराओ।
विपिनचंद्र-आज़ाद-भगत,
सावरकर ने बलिदान किया।
गांधी-सुभाष-पंडित-पटेल,
सबने आधार प्रदान किया।
इनकी अभिमानी गौरव गाथा,
जीवन भर गाते जाओ।
ऐ भारत के वीर सपूतों!
विजय पताका फहराओ।
जन्मभूमि यह दशरथ सुत की,
जिन्होंने जन कल्याण किया।
पितृ वचन के मान हेतु,
दुर्जन वन को प्रस्थान किया।
राम राज्य विस्तार करेंगे,
अब संकल्प करे आओ।
ऐ भारत के वीर सपूतों!
विजय पताका फहराओ।

O brave sons of India!; Hoist the flag of victory . Get up, hit the target, Move on without stopping. There is no doubt that the path is difficult. But the lotus blooms in the mud. Sea-Forest-Sky-Mountain, And People tell everyone today. O brave sons of India!; Hoist the flag of victory . Vipinchandra-Azad-Bhagat Singh And Savarkar are sacrificed. Gandhi-Subhash-Pandit-Patel, All provided the base. Keep singing his pride saga, For the rest of your life. O brave sons of India!; Hoist the flag of victory. This is the birthplace of Dashrath’sson (Lord Rama), Who did public welfare. For the honor of father’s promise, He left his home and went to the fearsome forest. Let’s make a resolution that, We will expand the kingdom of Lord Rama. O brave sons of India!; Hoist the flag of victory.

संपत्ति के बांटे धन घटे।
बन्धु बंटे बल जाय ।
भेद के बांटे मान घटे।
प्रेम बंटे सब जाय।
धर्म के बांटे ईश बंटे।
जाति बंटे मत जाय।
और राष्ट्र के बांटे प्रगति घटे।
परवश(पराधीन) होत सहाय।
उमेश कुमार मिश्र

युद्धक्षेत्र(Battlefield)

ना डर ​​तू उठ महारथी चुनौतियां पुकारती।
यहां न कृष्ण-पार्थ हैं स्वयं ही है तू सारथी।
विपत्तीयों के अंध को तू चीरता प्रकाश है।
है संशयों का स्थान क्या तू ही स्वयं विश्वास है।
हो भय भले सफल न हो विफल भी हो तो दुख नहीं।
जो हुए महान हैं प्रथम कोई सफल नहीं।
है कर्म तेरे हाथ में प्रयास कर प्रयास कर।
कि लक्ष्य प्राप्ति ध्येय हो न और कुछ विचार कर।
समय-2 की बात है तेरा कभी मेरा कभी।
ये गूढ़ तथ्य ज्ञान का भला किसे पता नहीं।
जीवन यह है युद्ध क्षेत्र व कर्म अस्त्र-शस्त्र हैं।
विचारता है क्यों भला यही तो मूल मंत्र है।
भले सगे हों या कोई;तेरा कोई सगा नहीं।
विपत्तियों के होड़ में तू एक संग कोई नहीं।
राह तेरी है कठिन व सामने पहाड़ है।
तू भय न खा कदम बढ़ा गगन सा तू विशाल है।
ना धीर तज निराश हो थका नहीं तू हारकर।
हां वीर है सशस्त्र तूं कि लक्ष्य पर प्रहार कर।