स्पोर्ट्स और गेमिंग सट्टा प्लेटफॉर्म सफलता के लिए शॉर्टकट की चाबी या कुछ और……।(Betting:Sports and Gaming Platforms is Shortcut Key to Success or Something…)

हां मैं कोई नई बात नहीं बता रहा।सफलता के लिए कोई शॉर्ट कट नहीं होता।कोई भी नहीं। आपने सुना तो होगा सफलता समय मांगती है और जो समय नहीं दे सकता वो सफल भी नहीं हो सकता। मै इस बात को लेकर कोई उपदेश नहीं दे रहा।बस कुछ मुद्दे है जिन्हें मैं आपके सामने रखना चाहता हूं।

आजकल शॉर्टकट का ज़माना चल रहा हैं।हर कोई कम समय में बिना मेहनत या कम मेहनत करके बहुत जल्द ही सफ़लता चाहता है।आज के आधुनिक समय में धन को ही सफलता का मापदण्ड माना जाता है।जो जितना धनवान है वह उतना ही सफल समझा गया हैं।तो अब मुद्दे की बात पर आते हैं। इस भागदौड़ भरी दुनिया में सबके अपने-अपने सपने हैं,पर उनको हासिल करने की सीढ़ी पैसा बन चुका है।अब तो पैसे कमाने के लिए भी कई शॉर्टकट आ चुके है।

आज इंटरनेट का दौर चल रहा है। हर कोई इससे जुड़ा रहता है। बिना इन्टरनेट के एक पल भी बिताना मुश्किल हो चुका है।अब कई ऑनलाइन स्पोर्ट्स और गेमिंग प्लेटफार्म आ चुके हैं।जिन पर कुछ ही समय में लाखों रूपए जीते जा सकते हैं। अरे ….ये मैं नहीं कह रहा ।ये सोशल मीडिया पर चल रहे विज्ञापनों का कहना है। इसीलिए ये गेमिंग और स्पोर्ट्स एप हमारी नई पीढ़ी के आकर्षण का केन्द्र बने बैठे हैं।हर कोई मिनटों में लखपति या करोड़पति बनने के सपने में खोया हुआ है।

हम पैसे गवा रहे हैं और पैसा कोई और ही छाप रहा है।हम लोगों के पैसे से ही चन्द विजेताओं को ईनाम देकर ये करोड़ों खुद हज़म करते जा रहे हैं। आज करोड़ों लोग ऑनलाइन सट्टा लगा रहे हैं और उसमें चन्द ही विजेता होते है जिन्हें कोई बड़ी राशि मिलती है।

तकलीफ तो इस बात की है कि आज ज्यादतर सेलेब्रिटी जिन्हें हम और आप अपना रोल मॉडल मानते है,कुछ चंद पैसों के लिए इन सट्टेबाजी वाले प्लेटफार्म्स का भर भरकर प्रमोशन कर रहे हैं। और बात यहां तक ही नहीं है ये जानलेवा नशीले पदार्थों का भी जी खोलकर प्रचार प्रसार करते हैं।आज फिल्मी एक्टर्स और  स्पोर्ट्सपर्सन जिनसे हम प्रेरित होते हैं वो ही हमें राह दिखाने के स्थान पर राह भटका रहे है। पैसे के आगे उन्हें जनता तो विश्वास दिखाई नहीं देता।इस मुद्दे हमारी सरकार भी कुछ नहीं कर रही उन्हें टैक्स तो मिल ही रहा है।

जो इस प्रकार के हानिकारक विज्ञापन होते है, उनमें एक आम बात है-खोखली चेतावनी……। जैसे तम्बाकू से कैंसर होता है,शराब स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है,इस खेल में आदत लगना और वित्तीय जोखिम शामिल है कृपया समझदारी और जिम्मेदारी से खेलें आदि। ये सारे स्लोगन एक जरिया बन गए है,अपनी सामाजिक जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का।बस स्लोगन चिपकाओ और जिम्मेदारी से बच जाओ।अगर कोई समस्या आती है तो यह कहकर निकल जाना है।”चेतावनी पढ़ी या सुनी नहीं छोटे बच्चे हों क्या?”बस इतना काफ़ी है अपनी जान छुड़ाने के लिए।

इनका जो है सो है अपना क्या है-दारू पियो मौज उड़ाओ, गुटखा खाओ थूकते जाओ और मन करे तो सट्टा लगाओ और एक मिनट में रोडपति से करोड़पति हो जाओ….।सच कहें तो हमे अपने पैसे की कदर ही नहीं है और न ही हम में सब्र है। सभी जानते है कि हमारे लिए क्या सही है और क्या गलत, फिर भी हम अंधे कुएं में छलांग लगाते रहते हैं। हमारी शॉर्टकट लेने की फितरत जो हो चुकी है।

एक छोटी सी बात समझो और खुद से सवाल करो कि जो भी लोग इन घटिया और  हानिकारक चीजों और प्लेटफार्म्स का प्रचार करते है।क्या उन्होने इस प्रकार की चीज़ों का इस्तेमाल भी कभी किया है?अगर हां, तो कम से कम उनका तो नहीं जिन्हें वो जनता के आगे परोस रहे हैं।

कड़वा सच है कि अगर सट्टेबाजी से करोड़पति बनना इतना ही आसान होता तो ये सारे सेलिब्रिटी अपना सब काम छोड़कर अपने मोबाइल पर ही सट्टा लगा रहे होते। इसीलिए अब हमें अपनी आंखें खोलने की जरूरत है क्योंकि सट्टेबाजी लक का गेम है,मेहनत और प्रैक्टिस का नहीं। ये बस पैसे वालों के शौक हैं। अगर उनका कुछ चला भी गया तो वो खुद को संभाल लेंगे मगर आप……?। हम सभी ज्यादातर मिडिल क्लास और गरीब लोग हैं।समझो अगर आपका लक इतना ही अच्छा होता तो आप ये सट्टे नहीं लगा रहे होते। बल्कि किसी अमीर घराने में पैदा हुए होते और ठाठ से जीवन जी रहे होते।

इसलिए अपनी आंखे खोलिए और अब जागिए क्योंकि अगर आपकी किस्मत चमकी और पैसा शॉर्टकट से मिल भी गया तो उसकी कद्र नहीं होगी।आप उसे संभाल नहीं पाएंगे और आप अगला सट्टा खेलते नज़र आयेंगे।

इसलिए आप अपने पैसे और वक्त की कीमत समझो और अब अपने हुनर पर काम करो। मेहनत करो,नई स्किल्स सीखो,जो आगे चलकर आपके काम आयेंगी। यूं खुद को बर्बाद करने से कुछ नहीं होता।अब निर्णय आपका है आप क्या चुनते है भाग्य का साथ या स्वयं के कर्म पर विश्वास।फैसला और जिम्मेदारी केवल और केवल आपकी है।

नोट: मेरा मकसद किसी का भी अपमान करना या किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं है। बस आपको आइना दिखाने की कोशिश की है। फिर भी यदि अगर आपकी भावनाओं को ठेस पहुंची हो,तो क्षमा प्रार्थी हूं।

Yes, I am not telling anything new. There is no short cut to success. None. You must have heard that success demands time and one who cannot give time cannot be successful. I am not giving any sermon on this matter. There are just some issues which I want to put before you.

Nowadays, the era of shortcuts is going on. Everyone wants to achieve success in a short period of time without or with less hard work. In today’s modern times, money is considered the only criterion of success. The wealthier one is, the more successful one is considered to be. So now we have come to the point of the issue. In this fast-paced world, everyone has their own dreams, but money has become the ladder to achieve them. Now many shortcuts have emerged to earn money.

Today the era of internet is going on. Everyone remains connected to it. It has become difficult to spend even a moment without internet. Now many online sports and gaming platforms have come on which lakhs of rupees can be won in a short time. Hey…I am not saying this. This is what the advertisements running on social media say. That is why these gaming and sports apps have become the center of attraction of our new generation. Everyone is lost in the dream of becoming a lakhpati or crorepati within minutes.

We are losing money and someone else is printing the money. By giving rewards to a few winners with our people’s money, they are consuming crores of rupees themselves. Today crores of people are betting online and there are only a few winners who get a huge amount of money.

The problem is that today most of the celebrities, whom we and you consider as our role models, are heavily promoting these betting platforms for a few bucks. And this is not all, they also openly promote deadly drugs. Today, the film actors and sports persons from whom we are inspired are misleading us instead of showing us the path. They don’t see public trust in front of money.Even our government is not doing anything on this issue, they are still getting taxes.

These types of harmful advertisements have one thing in common – hollow warnings. Like tobacco causes cancer, alcohol is injurious to health, this game involves habit forming and financial risk so please play wisely and responsibly etc. All these slogans have become a means to shirk one’s social responsibilities. Just stick the slogan and escape from the responsibility. If any problem arises, then go away saying “Have you not read or heard the warning? Are there small children?” This is enough to save your life.

What’s theirs is what’s yours – drink alcohol, have fun, eat gutkha, spit and if you feel like, bet and in a minute you can become a millionaire from a road pati…. To tell the truth, we do not value our money and Nor do we have patience. Everyone knows what is right and what is wrong for us, yet we keep jumping into the blind well. It has become our habit to take shortcuts.

Understand one small thing and ask yourself why those people promote these bad and harmful things and platforms. Have they ever used such things? If yes, then at least not those whom they are presenting in front of public.

The bitter truth is that if it were so easy to become a millionaire through betting, then all these celebrities would have left all their work and were betting on their mobiles. That is why now we need to open our eyes because betting is a game of luck, not of hard work and practice. These are just the hobbies of the rich. Even if he loses something, he will take care of himself but you…?We all are mostly middle class and poor people. Understand that if your luck was so good then you would not be making these bets. Rather, he would have been born in a rich family and would have been living a luxurious life.

So open your eyes and wake up now because even if you get lucky and get money through a shortcut, it will not be valued. You will not be able to handle it and you will be seen playing the next betting game.

Therefore, understand the value of your money and time and now work on your skills. Work hard, learn new skills, which will be useful to you in future. Nothing is achieved by ruining yourself like this. Now the decision is yours. Do you choose to follow luck or believe in your own karma. The decision and responsibility is yours and only yours.

Note: My intention is not to insult anyone or hurt anyone’s sentiments. Just tried to show you a mirror. Still, if your sentiments have been hurt, I apologize.

ध्वनि की प्रकृति (The Nature of Sound)

क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि जब दूर दराज़ कहीं खुले वातावरण में खासकर शादी या त्योहारों में जब भी कहीं कोई गाना बज रहा होता है तो हम भी जाने अनजाने में वही धुन या गीत गुनगुनाने लगते हैं।ये तो सभी जानते है कि ध्वनि एक तरंग ऊर्जा है और इसे प्रसारित होने के लिए माध्यम की आवश्यकता होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ध्वनि भी सकारात्मक और नकारात्मक प्रकृति की होती है। मैं कोई विशेषज्ञ तो नहीं लेकिन ध्वनि भी भावनाओं से प्रभावित होती है।जब भी आप कोई भूतिया मूवी देखने जाते हो तो आप जो बैकग्राउंड म्यूजिक सुनते हो या कोई दर्द भरा गीत सुनते हो तो उसमें एक नकारात्मक ऊर्जा होती है जो आपके मन-मस्तिष्क को प्रभावित करती है।ठीक जैसे जब हम मन्दिर जाते हैं या अपने पूजा घर में शंख और घंटियों की ध्वनि सुनते हैं तो मन को एक अलग सी शान्ति मिलती है। उदाहरण के लिए अगर बांसुरी की ही बात की जाय तो उससे उत्पन्न ध्वनि सुनकर हमारा मन सुख भी अनुभव कर सकता है और दुःख में डूब भी सकता है। कहने का मतलब ये है कि जैसे बांसुरी की ध्वनि किसी वादक की भावनाओ से प्रभावित होती है ठीक उसी प्रकार हम भी ध्वनि की प्रकृति से प्रभावित होते हैं। यदि ध्वनि सकारात्मक है तो हम प्रसन्न और यदि नकारात्मक है तो हम दुख का अनुभव करते है।यही बात हमारे द्वारा कहे जाने वाले शब्दों पर भी निर्भर है। यदि हम किसी को नकारात्मक वाणी बोलते है तो उस व्यक्ति का मन दुखी होता है या उसके मन में दुर्भावना उत्पन्न होती है और जब हम किसी दुखी व्यक्ति को सांत्वना देते हैं या उससे अच्छी बातें करते हैं तो वह प्रसन्न हो जाता है। अतः ध्वनि भी सकारात्मक और नकारात्मक प्रकृति की होती है हमारे विचारों और भावनाओं को प्रभावित करती है।

मौन(Silence)

कोई व्यंग्य बाण से हो आहत,
पर अधरों पर मुस्कान लिए।
चलता रहता हो अविचल सा,
कड़वी बातों से ज्ञान लिए।
बाधाओं से अविरत लड़कर,
वो ही इतिहास बनाते हैं।
जिनके मुख पर हो मौन सजा,
इक दिन वो पूजे जाते है।
अपमान से हारा कौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
है दो शब्दों का मेल मात्र,
पर अद्भुत क्षमता का श्रोत यही।
जब जुड़ा रहा सद्भावों से,
निर्माण से ओत व प्रोत यही।
यदि मूल छिपी इसके कटुता,
या बैर भाव से हो दूषित।
तब महाविनाश का शस्त्र ये बन,
मानव का नाश कराती है।
जीवन-विनाश इस पर निर्भर,
किस भाव ने धारा मौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो गरजे ना बरसे बादल,
जो बरसे ना गरजे बादल।
जब मुख से फूटे शब्द ध्वनि,
संकल्प के पांव करे घायल।
निज भावों से उपर उठकर,
कुछ करके जो दिखलाते हैं।
जिनके मुख पर हो मौन सजा,
एक दिन वो पूजे जाते हैं।
दुर्भाव से हारा कौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
प्रायः ऐसा ही होता है,
मुख करते हैं आघात यहां।
दूजे के हिय की पीड़ा का,
किसको होता आभास यहां?
खल को ना अपने कर्म खले,
ना अपने कल की हो चिन्ता।
बस प्राण बसे अपकार में ही,
मुख से करते विष की वर्षा।
उपहास-अपमान के बाणों से,
हो घायल जो मुस्काते हैं।
जिनके मुख पर हो मौन सजा,
एक दिन वो पूजे जाते हैं।
कटु शब्द से हारा कौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?

मौन में बड़ी शक्ति होती है। हम जब अपनी भावनाओं को दबाते है अर्थात् प्रर्दशित नहीं करते हैं तो उसमें अपार शक्ति संचित हो जाती है। जिसका उपयोग आप चाहें तो निर्माण के लिए करें अथवा विनाश के लिए, यह आप पर निर्भर है। उदाहरण के लिए जैसे कोई आपका अपमान करता है;आपको नीचा दिखाता है तो आपके पास उसे प्रतुत्तर देने के दो विकल्प हैं। पहला उसे तुरन्त प्रत्युत्तर देकर अर्थात् अपमान के बदले अपमान करके और दूसरा उसे भविष्य में निरुत्तर करके। आप भविष्य में अपना जवाब भी उसे दो तरीकों से दे सकते हैं। पहला भविष्य में उससे अपने अपमान का बदला लेकर अर्थात् उसे कष्ट पहुंचाकर और दूसरा अपने कर्मों से उसकी बोलती बन्द कराके।यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने अपमान के बदले उसका अहित करते हैं या अपनी सफलता से उसे गलत साबित करके उससे बदला लेते हैं। यदि आप उसका बुरा करेंगे तो आप खुले तौर पर उसे अपना दुश्मन बना लेंगे जो आपको हानि पहुंचाने का प्रयत्न करेगा और इससे आपका चरित्र भी दुष्प्रभावित होगा फिर आप भी उसकी ही तरह बन जायेंगे। या फिर इसके ठीक विपरीत आप अपनी उपलब्धियों से; अपनी सफलता से उसे प्रतुत्तर दे सकते हैं। जिससे वह स्वयं ही लज्जित हो जायेगा और अगली बार आपसे दुबारा दुर्व्यवहार नहीं करेगा। चयन आपका है कि आप अपमान के बदले अपमान करते हुए अपनी सज्जनता का नाश करते हैं या अपने कर्मों से ऐसे लोगों को निरुत्तर करते हैं। विचार अवश्य कीजिए।

There is great power in silence. When we suppress our emotions, that is, do not show them, immense power gets accumulated in it. Whether you want to use it for construction or destruction, it is up to you. For example, if someone insults you or puts you down, you have two options to respond to him. First by giving him immediate response i.e. by insulting him in return for insult and secondly by leaving him speechless in the future. You can also give your answer to him in two ways. First by taking revenge of your insult from him in the future by causing him pain and second by making him stop speaking through your actions. It depends on you whether you harm him in return for your insult or take revenge from him by proving him wrong with your success. . If you do bad to him then you will openly make him your enemy who will try to harm you and this will affect your character also and then you too will become like him. Or just the opposite, with your achievements; You can respond to him with your success. Due to which he himself will feel embarrassed and will not misbehave with you again next time. The choice is yours whether you destroy your gentlemanly self by giving insult for insult or render such people speechless with your actions. Please think about it.

लोग बदल रहे हैं(People are change)

लोग कहते हैं कि इन्सान को वक्त के साथ साथ खुद को बदलना चाहिए।
पर मैने लोगों को अपनी ज़रूरत के साथ ही बदलते देखा है।

जब आपका बुरा समय शुरू होता है तो आपके अपने, आपके सम्बन्धी सभी आपसे किनारा करने लगते है । जो आपके अच्छे दिनों में आपके साथ थे वो आपसे मिलने से कतराते हैं कि कहीं मिलते ही आप;उनसे कोई मदद न मांग ले और अगर आप उनसे मदद मांग भी लेते हैं तो अक्सर बहाने बनाकर आपकी बात टाल दी जाती है। ऐसे लोगों से दूर रहने और अपना काम से काम रखने का प्रयास करें। आप सुखी रहेंगे।

सुकून(Inner Peace)

यहां हूं दर बदर भटका मैं तेरी चाह में लेकिन, न तेरा अक्स ही देखा न तेरी आहटें पाईं। भटकता चाह में तेरी कहीं तो पा सकूं तुझको, मगर मैं ही नहीं हर शख्स तुझको ढूंढता होगा।

Here I have wandered from place to place in search of you, but neither have I seen your reflection nor found your voice. I wander longing for you, I wish I could find you somewhere, but not only I, but every person must be searching for you.

हम दुनिया की चकाचौंध में खोए रहते हैं और बाहर खुशियों की तलाश करते हैं जिससे हमें सुकून मिल सके; शांति मिल सके। लेकिन हम जब भी खुद को दूर से देखते हैं , तो खुद को अकेला पाते हैं। सच कहें तो असली सुकून बाहर नहीं खुद के दिल के भीतर होना चाहिए। लेकिन इसी सुकून की तलाश में हम ज़िंदगी भर बाहर भटकते रहते हैं।

We remain lost in the glamor of the world and look for happiness outside which can give us peace. But whenever we look at ourselves from a distance, we find ourselves alone. To be honest, real peace should not be outside but within one’s own heart. But in search of this peace we keep wandering outside throughout our lives.

आशा ही दुखों का मूल है(Hope is the root of suffering)

कुछ करने के बदले स्वयं को कुछ मिलने या पाने की संभावना का भाव ही आशा है।तो फ़िर निराशा क्या है?उत्तर है आशा का टूट जाना या अपने मानदंडों पर खरा न उतरना।

जब भी हम किसी के लिए या अपने लिए कुछ करते हैं तो उससे एक आशा जुड़ जाती है कि अंत में हमें ये मिलेगा या फिर हमारे साथ ऐसा होगा परन्तु यदि हमें हमारी सोच के अनुरूप परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं तो फ़िर वहां से हमारे अंतरमन में निराशा का जन्म होता है। जो हमारे दुखों का मूल कारण है।

जब भी हम निराश होते हैं तो हमें मानसिक कष्ट की अनुभूति होती है और यही मानसिक कष्ट ही दुःख कहलाता है। ये दुःख हमें अन्दर तक तोड़ देता है और हमारा सुख-चैन सब कुछ छीन लेता है। तब हमारा जीवन अन्धकार से घिर जाता है। तो क्या तरीका है इस दुःख से बाहर निकलने का; इससे पार पाने का।

दुःख से मुक्ति…..?यह एक अत्यन्त जटिल प्रश्न है, जिसका हल ढूंढने का प्रयास युगों-युगों से चलता आ रहा है। कई ऋषियों,महात्माओं, ज्ञानियों,साधुओं और संतों ने इस गूढ़ तथ्य का हल ढूंढने में अपना जीवन लगा दिया। फिर एक उत्तर मिला-“जो दुःख का मूल कारण है उससे दूर रहो”। आज इस उत्तर का अर्थ सभी के लिए अलग अलग है। हमने अपनी सोच-समझ के अनुरूप इसका भिन्न भिन्न अर्थ लगा लिया है। 

 आज अपने दुखों से सभी मुक्ति चाहते हैं परन्तु इसके कारण पर कोई विचार नहीं करता। किसी के लिए पैसे की कमी दुःख का कारण है तो किसी के लिए अपनों का साथ न देना। किसी को ईश्वर प्राप्ति में दुःख से मुक्ति दिखाई देती है तो किसी को सांसारिक भोग-विलास में। कोई असफल होने पर दुःख है तो कोई इच्छा की पूर्ति न होने से। इसके लिए किसी ने घर छोड़ा,तो किसी ने परिवार,किसी ने सन्यास लिया, तो किसी ने धन प्राप्ति में ख़ुद को झोंक दिया। परन्तु किसी को भी उसके दुख से मुक्ति नहीं मिली।

तो क्या है दुखों से मुक्ति का रहस्य जो हमारे समझ से परे है। आपको ज्ञात होगा कि जब आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे तो आपके मन में इससे बचने का क्या उपाय सूझा जो था धन कमाना। अब आपने सोचा कि इससे आपका दुख कम होगा। पर इससे बस आपकी समस्याएं कम हुईं,आपका दुख नहीं।अब आपकी आवश्यकता और इच्छा बढ़ी और आप फिर आशा  करते हैं कि और अधिक धन आपकी समस्या को सुलझा देगा।लेकिन फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ा।अब जो अपने आशा की वो निराशा में और आपकी निराशा दुःख में बदल गई। और आप फिर वहीं हैं जहां से आपने शुरू किया था।

  भगवान श्री कृष्ण ने गीता में  दुखों से मुक्ति का मार्ग बताया है,उन्होने कहा है कि “कर्म करो,फल की चिंता मत करो”। अर्थात् अपना कर्त्तव्य तो करते जाओ परन्तु उसके पश्चात्  मिलने वाले परिणाम की चिंता भूल जाओ। इसका एक अलग अर्थ यह भी है कि अपने कर्मों के बदले कुछ मिलने की आशा त्याग दो। यदि इसे ही छोड़ दिया तो इसके टूटने पर होने वाली निराशा और दुख नहीं होगा।

      इसलिए यदि हम अपने या किसी के लिए कुछ कर रहे हों तो हमे उसके बाद जो मिले उसे स्वीकार करना चाहिए। जैसे आपने बुरे समय किसी का साथ दिया तो यह आशा न करें कि वो भी आपके बुरे समय में आपका साथ देगा। क्योंकि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आप हताश और निराश होंगे जो आपको दुख पहुंचाएगा। इस प्रश्न का यही उत्तर है कि किसी व्यक्ति या वस्तु के लिए कर्म करो मगर उम्मीद नहीं क्योंकि अगर ये टूटी तो आप भी टूट जाओगे। इसके स्थान पर अपने मन में संतोष और धीरज को धारण कर आप मानसिक दुख से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि यह करना अत्यन्त कठिन है पर असंभव नहीं।

कामयाबी(Success)

वक्त तो लगता है तराशने में खुद को, कामयाबी की चमक चेहरे पर यूं ही नहीं आती।

It takes time to hone yourself, the glow of success does not appear on your face just like that.

अक्सर हमारी सोच यही होती है कि हम जल्दी से कामयाब हो जाए;सफल हो जाए। लेकिन सफलता वक्त लेती है यूं नहीं मिलती। उसके लिए दिन-रात लगन के साथ मेहनत करनी पड़ती है। जैसे ईंट का मकान भी कभी एक दिन में नहीं बनता उसके लिए लम्बी योजना बनानी पड़ती है।सबसे पहले हम ज़मीन खरीदते हैं और फिर नींव डाली जाती है। जब नींव पकती है और तब कहीं जाकर मकान बनना शुरू होता है और मकान भी रहने लायक यूं हीं नहीं बन जाता। उसके लिए महीनों का वक्त लगता है। ठीक उसी तरह सफल होने के लिए भी योजना और उस पर अमल किया जाना ज़रूरी है। यूं हांथ पर हाथ धरे रहने के बाद ये उम्मीद करना बेवकूफी है कि हम एक दिन उठेंगे और झण्डे गाड़ देंगे। इसीलिए ख़ुद और खुद के प्रयासों को वक्त दीजिए क्योंकि चमत्कार सभी के साथ नहीं होते।

Often our thinking is that we should achieve success quickly. But success takes time and is not achieved just like that. For that one has to work diligently day and night. Just like a brick house is never built in a day, a long plan has to be made for it. First of all we buy land and then the foundation is laid. When the foundation is ready and then the construction of a house starts and the house also does not become habitable just like that. It takes months for that. Similarly, to be successful, it is important to plan and implement it. After sitting idle like this, it is foolish to expect that one day we will wake up and achieve success. Therefore, give time to yourself and your efforts because miracles do not happen to everyone.

प्रकृति हमें सिखाती है(Nature teaches us)

प्रकृति अर्थात् मां;जो जन्म देती है,सृजन है या यूं कहें कि हमें पालती है,हमारा भरण पोषण करती है।जैसे मां अपने बच्चे को 9 महीने अपने गर्भ में धारण करती है और उसका ख्याल रखती है,वैसे ही प्रकृति भी हमें चारों ओर से घेरे हुए ;अपने भीतर धारण किए हुए है। पर मां सिर्फ़ अपने बच्चे का ख्याल ही नहीं रखती बल्कि उसे शिक्षित भी करती है उसे सही और गलत का पाठ भी पढ़ाती है।ठीक उसी प्रकार प्रकृति भी हमें सिखाने का प्रयास करती है।प्रकृति ज्ञान का भण्डार है,इसमें अनेकों सजीव और निर्जीव वास करते हैं। किन्तु हमें सबसे कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। जिनमें सबसे पहली और बड़ी सीख है निस्वार्थ सेवा भावना। सूर्य,चन्द्रमा,धरती, आकाश, हवा, नदियां,पहाड़,पेड़-पौधे आदि सभी निस्वार्थ सेवा भाव रखते हैं। इन्होंने आज तक हमसे अपने लिए कुछ भी नहीं मांगा बल्कि हमें सदैव केवल दिया ही है।पेड़ों ने अपने फल नहीं खाएं,नदियों ने अपना पानी नहीं पिया,सूर्य और चंद्रमा अपना प्रकाश स्वयं नहीं लेते। इन्होंने अपने लिए कभी भी कुछ भी नहीं रखा। अब यहीं से दान और परोपकार की भावना का जन्म होता है।इसी प्रकार धरती से हमें धैर्य और सहनशक्ति तथा आकाश से विशाल हृदय बनने की सीख मिलती है। पहाड़ों से दृढ़ निश्चय और लक्ष्य से विचलित न होने तथा नदियों से हमें समानता की शिक्षा मिलती है।सूर्य हमें नियमितता और निरंतरता की शिक्षा तो देता ही है साथ ही साथ हमें दूसरों को सही राह दिखाना भी सिखाता है। चन्द्रमा से हमें बुरे समय व निराशा में मन को शान्त रखने और चींटी से अथक परिश्रम की शिक्षा मिलती है। ऐसे ही प्रकृति में हर किसी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। ज़रूरत है बस उसे समझने की,उसे महसूस करने की। इसलिए प्रकृति को समझने और उससे जुड़ने का प्रयास करें उसे मिटाने का नहीं।

Nature means mother; who gives birth, creates or can say that nurtures us. Just like a mother carries her child in her womb for 9 months and takes care of him, similarly nature also surrounds us. Surrounded from all sides and holding it within itself. But the mother not only takes care of her child but also educates him, teaches him the lesson of right and wrong. In the same way, nature also tries to teach us. Nature is a storehouse of knowledge, there are many living and non-living things in it. We do. But we get to learn something from everyone. The first and biggest lesson in which is the spirit of selfless service. Sun, moon, earth, sky, air, rivers, mountains, trees and plants etc. all have selfless service. He has not asked us for anything till today, but has always given us only. Trees do not eat their fruits, rivers do not drink their water, sun and moon do not take their own light. He never kept anything for himself. Now it is from here that the spirit of charity and charity is born. Similarly, we learn patience and tolerance from the earth and a big heart from the sky. From the mountains we learn determination and not to be distracted from the goal and from the rivers we learn commonality. Sun not only teaches us regularity and continuity but also teaches us to show the right path to others. From the moon, we learn to keep our mind calm in bad times and despair, and from the ant we learn to work tirelessly. Similarly in nature one gets to learn something or the other from everyone. You just need to understand it, feel it. That’s why try to understand nature and connect with it, not to destroy it.

यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता(Nothing is wasted here)

कैसे छोटा सा बीज कोई,
एक वृहत वृक्ष बन जाता है।
कैसे माटी का इक ढेला,
जल में हिल्लोल(तरंग)बनाता है।
जग में प्रभु की जो भी रचना,
उसका अब मोल हु समझाता।
यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
हां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
नन्ही सी चींटी को देखो,
कैसे जी जान लगाती है।
कैसे छोटी की नाव कोई,
तूफानों से टकराती है।
दृढ़ हो निश्चय संकल्प-अटल,
सब कुछ संभव है हो जाता।
यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
हां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
कैसे वेगित हो जल धारा,
पाषाण चीर बढ़ जाती है।
देखो कैसे जल की बूंदे,
मिलकर सागर बन जाती है।
जलते दीपक से तुम सीखो,
अंधेरे से है लड़ जाता।
यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
हां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
निर्जीव-सजीव जो हैं जग में,
सबकी अपनी-अपनी प्रभुता।
स्वयंमेव से तुच्छ बनो न कभी,
प्रभु ने सौंपी अदभुत क्षमता।
जैसे छोटे से पग धरके,
कोई पथ लंघन कर जाता।
प्रभु ने जग में जो कुछ भेजा,
है कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।

How a small seed becomes a big tree.
How a earthen lump creates waves in water.
Whatever creation of God in the world,
now I have its value explains.
Nothing goes waste here.
Yes, nothing goes waste here.
Look at the little ant how it tries its best.
How a small boat collides with the storms. .
Be strong in your determination steadfast,
If your determination is strong, then everything is possible.
Nothing goes waste here.
Yes, nothing goes waste here.
How does a stream of water move faster, cutting through even the stones?.
See how the drops of water,
come together to become the ocean.
You learn from the burning lamp,
It fights the darkness.
Nothing goes waste here.
Yes, nothing goes waste.
The inanimate and living things in the world,
Everyone has their own sovereignty.
Never become insignificant on your own accord,
The Lord has given you amazing ability.
Just like taking a small step,
A path Would have skipped.
Whatever God has sent into the world,
nothing goes waste.
Yes nothing goes waste here.

” किसी को भी ख़ुद के कम आंकते हुए उसे उसका उपहास या अपमान करने की भूल ना करें,हो सकता उसमें वह गुण हो जो आपकी क्षमता है परे है। क्योंकि ईश्वर की हर रचना स्वयं में अद्वितीय है।”

“Don’t make the mistake of underestimating or insulting someone; they may have qualities that are beyond your ability. Because every creation of God is unique in itself.”

अकेला(Alone)

अकेलेपन का गम उससे ज्यादा और कोई नहीं समझ सकता, जो अपनों के साथ रहने के बावजूद अकेला महसूस करता हो।

बहुत तकलीफ़ होती है जब अपने साथ होते हुए भी बहुत दूर होते हैं।एक अलग सा दर्द महसूस होता है । ऐसा नहीं कि अपने साथ नहीं देते, मगर कोई आपको समझने वाला नहीं होता। ऐसे में तकलीफ़ दुगनी हो जाती है और इस हाल में हम अक्सर गलत फैसले कर बैठते हैं या कोई गलत आदत अपना लेते हैं,अपनी मायूसी को छुपाने के लिए। लेकिन हमारी दिक्कतें कम नहीं होती, बल्कि और भी ज्यादा बढ़ने लगती हैं । इसलिए अगर आप अकेला महसूस करते हैं तो अपनों से इस बारे में बात कीजिए,अपने दोस्तों से मिलिए और खुद को खुश रहने की कोशिश कीजिए। तभी आप अकेलेपन के भॅवर से निकल सकते हैं वरना डूब जायेंगे।