अकेला(Alone)

अकेलेपन का गम उससे ज्यादा और कोई नहीं समझ सकता, जो अपनों के साथ रहने के बावजूद अकेला महसूस करता हो।

बहुत तकलीफ़ होती है जब अपने साथ होते हुए भी बहुत दूर होते हैं।एक अलग सा दर्द महसूस होता है । ऐसा नहीं कि अपने साथ नहीं देते, मगर कोई आपको समझने वाला नहीं होता। ऐसे में तकलीफ़ दुगनी हो जाती है और इस हाल में हम अक्सर गलत फैसले कर बैठते हैं या कोई गलत आदत अपना लेते हैं,अपनी मायूसी को छुपाने के लिए। लेकिन हमारी दिक्कतें कम नहीं होती, बल्कि और भी ज्यादा बढ़ने लगती हैं । इसलिए अगर आप अकेला महसूस करते हैं तो अपनों से इस बारे में बात कीजिए,अपने दोस्तों से मिलिए और खुद को खुश रहने की कोशिश कीजिए। तभी आप अकेलेपन के भॅवर से निकल सकते हैं वरना डूब जायेंगे।

अकेलापन(Lonliness)

अकेलेपन का किस्सा कुछ यूं है कि, जिसका साथ देता है उसे ही काट खाता है।

हालांकि अकेले इन्सान की सोच में बड़ी ताकत होती है। वो अपने इस स्थिति को अवसर में बदलना जनता है, वो अपने बहुमूल्य समय का उपयोग अपने ज्ञान और व्यक्तित्व के विकास में कर सकता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो अकेलापन एक अजगर भी है जो इन्सान को निगलने की ताकत रखता है। इसलिए जब भी आप अकेले हों, कुछ नया या रचनात्मक करने और सीखने में अपने समय का सदुपयोग करें। खुद को व्यस्त रखे जिससे आपके मन में हीन और नकारात्मक विचार अपनी जगह न बना सकें। इससे आपका विकास होगा और आप बुरे विचारों से दूर भी रहेंगे।

कौन कहता तूं अकेला ? (Who says you are alone?)

“अकेलेपन से निराश न हों इसे अवसर की तरह समझें जो आपको; खुद को समझने और अपनी खूबियों को पहचानने में मदद करता है।”

तनहाई(Loneliness)

एक वक्त वो था सब अपने थे।
एक वक्त ये है बेगाने सब।
पहले थे सब पहचाने से।
अब लगते हैं अंजाने सब।
किस्मत की ऐसी मार पड़ी।
ना जी ही सके ना मर ही सके।
ज़िंदों जीतना न प्यार मिला।
मुर्दों जैसी इज्ज़त न मिली।
अपना भी घर अपना न रहा।
तकदीर ने की ये कैसी हँसी।
थे खेल निराले बचपन के।
थे साथ लड़े- थे साथ हंसे।
था अपना प्यार अनोखा भी।
पलभर रूठे पलभर में मने।
मां का आंचल-घर का आंगन।
वो खेल-खिलौने बचपन के।
घर का झूला यारों का संग।
थे पल वो सुहाने सपनों से।
पर यादों का क्या बस यादें हैं।
धुंधली जैसी परछाई सी।
लूं हाथ बढ़ा पर छू न सकूं।
लाखो में है तनहाई सी।