हर बात बेबाक हो;कह देना यूं तो अच्छा है लेकिन, कुछ राज़ अगर दिल में दफ्न रहें तो ही अच्छा ।
दिल की कुछ बातें सभी को बताई नहीं जा सकती। अपनों को भी नहीं। क्योंकि कुछ बातें ऐसी भी होती हैं जिनको आप के सिवा कोई भी नहीं समझ सकता है। ये बात इसलिए भी ज़रूरी है,क्योंकि ज़िंदगी के कुछ किस्से ऐसे भी होते हैं;जो सिर्फ बस आपसे जुड़े होते हैं और जो बात दुसरे से जुड़ी न हो, तो लोग उसे या तो टाल देते हैं या एक कान से सुन दुसरे से निकाल देते हैं ।
मुसीबत की तपिश से घिरा कब से ढूंढ रहा हूं पर फिर भी, लाख कोशिशों के बावजूद; मुझे मेरा अक्स दिखाई नहीं देता।
जब सूरज सिर चढ़ता है तो अपनी परछाई भी छोड़ देती है। जब अपनी परछाई ने ही साथ नहीं दिया तो औरों से क्या शिकायत करना। लेकिन जो आपके बुरे वक्त में आपके साथ खड़ा रहे,वही आपका सच्चा साथी है; सम्बन्धी है।ऐसे लोग ही आपकी सच्ची पूँजी हैं। इसलिए ऐसे लोगों को कभी भी खोना नहीं चाहिए।
मुकम्मल है मगर फ़िर भी, मुक्कमल हो नहीं सकती। हमारी है मगर फ़िर भी, ये बस मेरी कहानी है। तू मेरा साथ दे;ना दे, मैं तेरे संग हूं हरदम। अगर दम ना रहे फ़िर भी, मुझे यारी निभानी है। मुकम्मल है मगर फ़िर भी, मुक्कमल हो नहीं सकती। हमारी है मगर फ़िर भी,ये बस मेरी कहानी है। यूं सोचा था हमारे भी, ज़माने में निशान होंगे। कुछ अपनी मंजिलें होंगी, कुछ अपने कारवां होंगे। मगर यूं देखता हूं, चन्द कदमों की जो दूरी पर, तेरी राहे-मेरी राहें, अलग होकर ही जानीं हैं । मुकम्मल है मगर फ़िर भी, मुक्कमल हो नहीं सकती। हमारी है मगर फ़िर भी, ये बस मेरी कहानी है…..।
रिश्ते अक्सर टूट जाते हैं या फ़िर इक तरफा होते हैं। ज़रूरी नहीं कि जिसे आप चाहें,वो भी आपको चाहे या फिर ये भी हो सकता है कोई वजह रही हो उसके दूर होने की। एक रास्ते पर चलने वालों की मंज़िल हमेशा एक ही हो ये ज़रूरी तो नहीं। ये बात बस लड़का और लड़की के बीच के आपसी रिश्ते की ही नहीं है, और भी कई रिश्ते हैं जिनका हाल ऐसा ही है। इसलिए जो रूठे हैं,हो सके तो उन्हें मना लें और जो जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दें। क्योंकि प्यार हो या अपनापन उससे बस किसी को जताया जा सकता है, उससे बांधा नहीं जा सकता।