आजकल किसी की बुराई करना;मसाला चाय की तरह हो गई है।जिसे पीने और पिलाने वाले दोनों को मज़ा आता है।और ये जो हाल है वो हर घर,हर गली और मुहल्ले की कहानी हो गई है।पता नहीं कैसे मगर लोगों को अपने गिरेबान झांकने का मौक़ा मिले ना मिले,दूसरों की खिड़की में झांकने का मौक़ा निकाल ही लेते हैं। इसे ही कहते हैं सच्चा जनकल्याण,जिसमें किसी का कल्याण हो न हो एक दिन किसी की जान ज़रूर निकल जायेगी।
सभी हैं मतलबी यारों, कहीं मतलब की यारी है। कहीं मतलब के रिश्ते है, कहीं ये दुनियादारी है। कोई मतलब का भूखा हैं, कोई मतलब का है प्यासा, कहीं मतलब की बोली है, कहीं मतलब की है भाषा। सभी हैं मतलबी जग में, बातें मतलब की प्यारी हैं । जो भी कुछ दिख रहा तुमको, सभी मतलब से भारी है। सभी हैं मतलबी यारों, कहीं मतलब की यारी है। कहीं मतलब के रिश्ते है, कहीं ये दुनियादारी है।
आजकल लोग बस मलतब के लिए रिश्ते निभाते या बनाते हैं। ये जानते हुए भी कि इन्सानी रिश्ते लेन देन पर टिके होते हैं, मतलब पर नहीं।इसमें अगर प्यार और सच्ची भावनाओं का लेन देन करोगे; तो मतलब तो अपने आप ही निकल जायेगा। फिर भी यहां देने की किसको पड़ी है,आजकाल सभी बस लेना जानते हैं। अगर काम निकालना हो तो अपना और निकल गया तो बुरा सपना।
लड़खड़ाते कदमों और तोतली ज़ुबान पर आज वो हंसता रह गया। जिसे हमने चलने और बोलने का हुनर सिखाया है।
जाने-अनजाने में हम अपने बड़ों; ज्याद़ातर अपने माता-पिता और बुजुर्गों का अपमान करते रहते हैं। और जब ख़ुद पर बितती है,तो हमें तकलीफ़ होती है। हमें यह समझना चाहिए कि भावनाएं सभी के भीतर है। उम्र के जिस पड़ाव पर इन्सान की सहनशक्ति और शारीरिक क्षमता बहुत कम हो जाती है, उस पड़ाव हम उनकी इस प्रकार हँसी उड़ाते हैं और उन्हें अपशब्द बोलेते हैं। कहा जाता है बच्चे अपने बड़ों से ही सीखते हैं, यदि यह बात सच है तो सोच लो कल जब आपकी बारी आयेगी तो आपको कैसा लगेगा…….?
Knowingly or unknowingly we are our elders; Most of them keep insulting their parents and elders. And when it is spent on ourselves, we feel pain. We must understand that emotions are within everyone. At the stage of age at which the stamina and physical capacity of a person becomes very less, at that stage we make fun of them in this way and speak abusive words. It is said that children learn from their elders only, if this is true then think how will you feel tomorrow when your turn comes…….?
सड़क पर मर रहे घायल की मदद कौन करे? मुसीबत मोल लेने से अच्छा उसकी वीडियो ही वायरल करते हैं।😔
Who will help the injured dying on the road? It is better to make a video of it and make it viral than to get in trouble.😔
आज कल हमारी सोच इतनी घटिया होती जा रही है कि अगर कोई सड़क पर मर रहा हो या या कहीं कोई तकलीफ़ से गुजर रहा हो तो हम उसकी मदद करनी के बजाय उसका तमाशा देखते रहते हैं। सोशल मीडिया पर उसका वीडियो और तस्वीरें अपलोड कर देते हैं ।लेकिन बात जब हम पर आती है तो हम लोगों को इंसानियत की दुहाई देते हैं । क्या यही हमारी सोच है? क्या इसीलिए मानव को ईश्वर की सबसे उत्कृष्ट रचना माना गया हैं ? यदि मानव ही मानवता छोड़ दे तो हममें और पशुओं में अन्तर ही क्या है….?
Nowadays our thinking is becoming so bad that if someone is dying on the road or someone is going through trouble, instead of helping them, we keep watching their spectacle. We upload his videos and pictures on social media. But when it comes to our turn, we make people cry for humanity. Is this what we think? Is that why human is considered the excellent creation of God? If humans leave humanity, then what is the difference between us and animals…..?
दो दिन की जीत पर इंसान,यूं इतराना नहीं अच्छा। ये तो बस इक खेल था,अभी तो पूरी जंग बाकी है।
Man, on the victory of two days, it is not good to boast like this. This was just a game, the whole war is yet to come.
अपनी उपलब्धियों पर गर्व किया जा सकता है लेकिन घमंड नहीं। चन्द कामों में सफलता पाकर दूसरों के साथ अकड़कर बात करना अच्छी बात नहीं होती। इन्सान को अपनी विनम्रता कभी भी खोनी नहीं चाहिए।
सोशल मीडिया पर लोगों का दर्द देखकर आंखों में आंसुओं की बाढ़ सी आ जाती है।पर न जाने क्यों खुद के घर मे तड़प रहे मां-बाप किसी को नज़र ही नहीं आते।फ़र्क बस नज़रों का नहीं नज़रिए का है।
Seeing the pain of people on social media, tears well up in the eyes. But don’t know why no one can see the parents who are suffering in their own house. The difference is not just in the eyes but in the attitude.