इक तरफा मुहब्बत (One sided Love)

मुकम्मल है मगर फ़िर भी, मुक्कमल हो नहीं सकती।
हमारी है मगर फ़िर भी, ये बस मेरी कहानी है।
तू मेरा साथ दे;ना दे, मैं तेरे संग हूं हरदम।
अगर दम ना रहे फ़िर भी, मुझे यारी निभानी है।
मुकम्मल है मगर फ़िर भी, मुक्कमल हो नहीं सकती।
हमारी है मगर फ़िर भी,ये बस मेरी कहानी है।
यूं सोचा था हमारे भी, ज़माने में निशान होंगे।
कुछ अपनी मंजिलें होंगी, कुछ अपने कारवां होंगे।
मगर यूं देखता हूं, चन्द कदमों की जो दूरी पर,
तेरी राहे-मेरी राहें, अलग होकर ही जानीं हैं ।
मुकम्मल है मगर फ़िर भी, मुक्कमल हो नहीं सकती।
हमारी है मगर फ़िर भी, ये बस मेरी कहानी है
…..।

रिश्ते अक्सर टूट जाते हैं या फ़िर इक तरफा होते हैं। ज़रूरी नहीं कि जिसे आप चाहें,वो भी आपको चाहे या फिर ये भी हो सकता है कोई वजह रही हो उसके दूर होने की। एक रास्ते पर चलने वालों की मंज़िल हमेशा एक ही हो ये ज़रूरी तो नहीं। ये बात बस लड़का और लड़की के बीच के आपसी रिश्ते की ही नहीं है, और भी कई रिश्ते हैं जिनका हाल ऐसा ही है। इसलिए जो रूठे हैं,हो सके तो उन्हें मना लें और जो जाना चाहते हैं, उन्हें जाने दें। क्योंकि प्यार हो या अपनापन उससे बस किसी को जताया जा सकता है, उससे बांधा नहीं जा सकता।

अपमान (Disrespect)

लड़खड़ाते कदमों और तोतली ज़ुबान पर आज वो हंसता रह गया। जिसे हमने चलने और बोलने का हुनर सिखाया है।

जाने-अनजाने में हम अपने बड़ों; ज्याद़ातर अपने माता-पिता और बुजुर्गों का अपमान करते रहते हैं। और जब ख़ुद पर बितती है,तो हमें तकलीफ़ होती है। हमें यह समझना चाहिए कि भावनाएं सभी के भीतर है। उम्र के जिस पड़ाव पर इन्सान की सहनशक्ति और शारीरिक क्षमता बहुत कम हो जाती है, उस पड़ाव हम उनकी इस प्रकार हँसी उड़ाते हैं और उन्हें अपशब्द बोलेते हैं। कहा जाता है बच्चे अपने बड़ों से ही सीखते हैं, यदि यह बात सच है तो सोच लो कल जब आपकी बारी आयेगी तो आपको कैसा लगेगा…….?

Knowingly or unknowingly we are our elders; Most of them keep insulting their parents and elders. And when it is spent on ourselves, we feel pain. We must understand that emotions are within everyone. At the stage of age at which the stamina and physical capacity of a person becomes very less, at that stage we make fun of them in this way and speak abusive words. It is said that children learn from their elders only, if this is true then think how will you feel tomorrow when your turn comes…….?

घाव(Wound)

दूसरा मार भी डाले तो कोई ग़म नही, पर अपनों के दिए घाव बर्दाश्त नहीं होते….।

अपनों का मारा हुआ इन्सान खुद ही मर जाता है, किसी और को ये ज़हमत उठाने ही ज़रूरत नहीं पड़ती।

कड़वा सच(Bitter truth)

सोशल मीडिया पर लोगों का दर्द देखकर आंखों में आंसुओं की बाढ़ सी आ जाती है।पर न जाने क्यों खुद के घर मे तड़प रहे मां-बाप किसी को नज़र ही नहीं आते।फ़र्क बस नज़रों का नहीं नज़रिए का है।

Seeing the pain of people on social media, tears well up in the eyes. But don’t know why no one can see the parents who are suffering in their own house. The difference is not just in the eyes but in the attitude.

ग़म(Sadness)

दिल के अंधेरे कोने में झांकने की इजाज़त कैसे दे दूं ? अपनों के दिए ज़ख्म ख़ुद से ही छुपाए बैठा हूं।

अपनों का दिया दर्द ना ही छुपाते बनता हैं और ना ही दिखाते…….।

धैर्य(Patience)

धैर्य एक सकारात्मक भावना है,जो हमारे असुरक्षात्मक ;नकारात्मक विचारों से हमारी सुरक्षा करता है। इससे एक आशा जुड़ी होती है कि एक दिन सब अच्छा हो जायेगा। धैर्य रखने की आवश्यकता तब होती है जब परिस्थितियां हमारे नियंत्रण से बाहर हो।यह विपत्ति या किसी भी परिणाम की प्रतीक्षा से होने वाली बेचैनी के समय स्वयं पर आत्मनियंत्रण रखने का एक शक्तिशाली साधन है, जो हमें जल्दबाज़ी मे गलत निर्णय लेने से रोकता है।इसीलिए जब तक परिस्थितियां और परिणाम आपके अनुकूल न हों,स्वयं पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए धैर्य रखें।

यदि कोई इस बात से असहमत हो तो कृपया इस पर अपने बहुमूल्य सुझाव दें।

Patience is a positive emotion, which protects us from our insecure; negative thoughts. There is a hope attached to it that one day everything will be fine. Patience is needed when circumstances are out of our control. It is a powerful means of self-control in times of adversity or uneasiness of waiting for any outcome, which prevents us from making rash decisions. That’s why be patient to maintain control over yourself until the circumstances and results are not in your favor. .

f anyone disagrees with this, please give your valuable suggestions on this.

रिश्ते (Relation)

अपनों से नाराज़ होकर दूर जाने से अच्छा।
संग बैठकर मसले सुलझा लिए जाएं।
शायद कोई गुंजाईश बची हो इन रिश्तों में।

“It is better to get angry with loved ones than to go away.
The issues should be resolved by sitting together.
Maybe there is some scope left in these relationships.”

रिश्तों को तोड़ना बहुत ही आसान है पर निभाना मुश्किल। रिश्ते बने ही हैं एक-दूसरे को संभालने, समझने और बुरे वक्त में एक-दूसरे का साथ निभाने के लिए। इसलिए जब भी कोई रूठ जाए तो उसे समझा बुझा कर माना लेना चाहिए।

“खुशनसीब हैं वो लोग जिनके पास कोई तो है खयाल रखने को,कुछ बदनसीबों को तो बस ठोकरें ही नसीब होती हैं।”

फ़िक्र(Tension)

“क्यों फिक्र करूं कि वो समझेगा मुझको।
मैं जानता हूं ख़ुद को क्या ये कम है?…..”

दूसरों से कभी हमदर्दी की उम्मीद न करें। उम्मीद अक्सर दिल को तोड़ देती है क्योंकि आप पर जो बीती है; हो सकता है, उसे सामने वाला समझ न पाये।

आत्मसम्मान (Self respect)

“बार-बार किसी के पीछे जाकर बेईज़्जती मत करवाना जो इज्ज़त और प्यार करते हैं वो कभी नखरे नहीं दिखाते।”

चाहत(Desire)

“चाहता था सुकुन के दो पल जी लूं,
मगर जो आराम से कटे वो ज़िंदगी कैसी ?”