मुख हैं कुछ तो बोलेंगे(There are mouths, they will say something)

जिसके उर जैसी सोच बसी,
अंतर के पट ही खोलेंगे।
मीठी-कड़वी सी कुछ बातें,
सुननी होंगी जब डोलेंगे।
मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे,
मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे।
मत सोच तेरी असफलता पर,
ये लोग व्यंग कर जाते हैं।
शायद तुझको है पता नहीं,
ये कोशिश से डर जाते हैं।
अरे जिसने न कभी कुछ की ठानी,
क्या सफल भला हो पायेंगे?
जिनको दूजा कोई कर्म नहीं,
बस अपना राग बजाएंगे।
जीतने भी हैं खाली बर्तन-2
नीचे गिरते ही बोलेंगे।
मीठी-कड़वी सी कुछ बातें,
सुननी होंगी जब डोलेंगे।
मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे,
मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे।
माना कि है तलवार नहीं पर,
कम भी इसका वार नहीं।
मन-हृदय चीर बढ़ जाता है,
विष बुझे बाण बरसाता है।
कभी पुष्पों की वर्षा करता,
कभी मन में फांस चुभाता है।
कटु शब्द है रोक सका कोई-2
मन में जो विष ही घोलेंगे।
मीठी-कड़वी सी कुछ बातें,
सुननी होंगी जब डोलेंगे।
मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे,
मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे।
शायद तुमने देखा होगा,
कुछ धूप-छांव के रंगो को
पल-पल जो वेश बदलते हैं,
धरते-तजते हैं संगों को।
कभी काग न गाए कोयल सा,
विषधर न अमृत दान करे।
जो बीज धरा में हो अरोपित,
वैसी ही उपज खलिहान करे।
ये अटल सत्य जाने फिर भी-2
जड़बुद्धि कहां चुप हो लेंगे।
मीठी-कड़वी सी कुछ बातें,
सुननी होंगी जब डोलेँगे
मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे,
मुख ही हैं कुछ तो बोलेंगे।

“अक्सर लोग किसी न किसी बहाने से औरों को नीचा दिखाने या हतोत्साहित करने का प्रयास करते हैं और अपनी भीतर झाँकते तक नहीं। इसलिए ऐसे लोगों की बातों को नज़रंदाज़ करते हुए अपने लक्ष्य की ओर निरन्तर बढ़ते रहें। क्योंकि जो आज कह रहे हैं कि तुमसे ना हो पाएगा कल वही तुम्हारी सफलता के गीत गायेंगे और कहेंगे मुझे पता था एक न एक दिन ये ज़रूर कुछ बड़ा करेगा।”

मर्द को दर्द नहीं होता (Man does not feel pain)

मुस्कुराहट के पर्दे से तकलीफें छुपा रक्खी हैं जनाब, डरता हूं कि मेरी रोती हुई शक्ल कहीं कोई देख न जाए।

पुरुष हमेशा और हर किसी के आगे नहीं रोते और रोते हैं तो समझिए कि तकलीफ़ बर्दाश्त के बाहर है…..।औरतों और बच्चों को तो रोते हुए आपने देखा होगा पर किसी पुरुष को कभी रोते हुए देखा है क्या? कहते हैं मर्द को दर्द नहीं होता और उससे उम्मीद की जाती है कि वो दूसरों की तकलीफ को समझे ऐसा क्यों? जिसे तकलीफ़ नहीं होती भला वो किसी का दर्द क्या समझेगा? पर ऐसा नहीं है।नारियल बाहर से कठोर लेकिन अन्दर से नर्म होता है ये सभी जानते हैं। किसी पुरुष के मन का हाल भी ठीक वैसा ही होता है।या यूं कहें कि बना दिया जाता है। एक प्रसिद्ध वाक्य है मर्द कभी रोते नहीं। अरे ! अगर पुरुष रोना भी चाहे तो रो नहीं सकता क्योंकि लोग उसे जीने नहीं देंगे; उसे ताने मारने लगेंगे। लोग कहेंगे कि ये कमज़ोर दिल का है और कभी-कभी तो पुरुष को स्त्री की भी संज्ञा दी जाती है। हालांकि हमारे समाज में पहले से ही यह छोटी मानसिकता रही है कि स्त्रियां कमज़ोर होती हैं और पुरुष ताकतवर। इसलिए अगर रोना भी हो तो पुरुष को अकेले चुपचाप चोरी से रोना पड़ता है कि कहीं कोई देख ना जाए।आज जब स्त्री सशक्त होती है तो लोग वाह-वाही करते हैं,लेकिन जब कोई मर्द कमज़ोर हो तो लोग उसे जीने नहीं देते ऐसा क्यों? क्या केवल स्त्रियों को ही रोने का हक है पुरुषों को क्यों नहीं?मन और हृदय तो सबका कोमल होता है फ़िर भी हम पुरुष को ही भावनाहीन और कठोर हृदय मान लेते हैं ,क्योंकि वो जल्दी किसी के आगे नहीं रोता? सत्य है कि पुरुष तन से थोड़े कठोर होते हैं किन्तु इसका अर्थ ये नहीं कि उन्हें कोई तकलीफ़ नहीं होती। स्त्रियां तो अपना दुखड़ा किसी न किसी के आगे रो लेती हैं, पर पुरुष किसके आगे रोए ,किससे अपनी तकलीफ़ कहे? आज तक स्त्रियों को समाज में दबाया जाता रहा है लेकिन लोगों की आंखे धीरे धीरे खुलने लगी है और आज स्त्री; शक्ति के रुप में उभर रही है। किन्तु पुरुष की इस मनोदशा पर आजतक किसी की दृष्टि तक नहीं पड़ी।जब भी पुरुष अपनी तकलीफ किसी से बयां नहीं कर पाता, किसी से कुछ कह नहीं पाता तो अन्दर ही अन्दर घुटने लगता है और जब भावनाओं को दबाया जाता है तो उसकी यह भावनाए ज्यादातर गुस्से व चिड़चिड़ेपन का रुप ले लेती है।तो कभी न कभी, कहीं न कहीं यह ज्वालमुखी फट पड़ता है। यही कारण है कि वो अपनी भड़ास अपने घरवालों, पत्नी और बच्चों पर निकाल देते है,अगर कोई बार-बार उन्हें कुछ पूछता है या कहता है।हालंकि घरेलू हिंसा इस विषय में अनुचित और निन्दनीय है, लेकिन हम यहां पुरुष के डांट-फटकार की बात कर रहे हैं घरेलू हिंसा की नहीं।हम जानते हैं कि समाज का विकास स्त्री या पुरुष में से किसी अकेले के बस की बात नहीं है। इसलिए यदि हमें दोनों को समाज में समान अधिकार व सम्मान दिलाना है तो दोनों की भावनाओ और मनोभावों को समझना पड़ेगा और उनका सम्मान करना पड़ेगा। तभी समाज आगे जाकर विकसित हो पाएगा।

नोट: ऊपर दिए गए विचारों में यदि कोई त्रुटि हो या कुछ गलत कहा गया है ऐसा लगे तो कृपया मुझे क्षमा करें और अपने बहुमूल्य सुझावों और विचारों से मेरा मार्गदर्शन करें। धन्यवाद🙏

पैसा(Wealth)

अगर जेब में भारीपन और कपड़ो में महंगाई की झलक हो,
तो दुनियां कभी ये नहीं पूछती कि ये दौलत कहां से आयी ?

इस दुनिया में पैसे की कीमत इन्सान से ज़्यादा हो गई है।इसके आगे प्यार, मुहब्बत, रिश्ते,नाते सब बे मायने होते जा रहे हैं।आज कल सफ़लता की निशानी बस पैसा हो गया है। बात कड़वी है; मगर सच है कि आजकल लोगों की ज़रूरतें और मानसिकता पैसे से इतनी ज़्यादा जुड़ चुकी है,कि आज मर रहे इंसान की ज़िंदगी के अलावा पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है। पैसे और सम्पत्ति के लिए भाई-भाई और दोस्त-दोस्त का दुश्मन बन बैठा है। अगर आप अमीर हैं, आपके पास बेहिसाब पैसा है तो आपसे कोई ये नहीं पूछेगा कि आपके पास इतना सारा पैसा कहां से आया । भले ही वो पैसे आपने किसी गलत रास्ते को अपनाकर ही क्यों न कमाया हो।

राज़ (The Secret)

हर बात बेबाक हो;कह देना यूं तो अच्छा है लेकिन,
कुछ राज़ अगर दिल में दफ्न रहें तो ही अच्छा ।

दिल की कुछ बातें सभी को बताई नहीं जा सकती। अपनों को भी नहीं। क्योंकि कुछ बातें ऐसी भी होती हैं जिनको आप के सिवा कोई भी नहीं समझ सकता है। ये बात इसलिए भी ज़रूरी है,क्योंकि ज़िंदगी के कुछ किस्से ऐसे भी होते हैं;जो सिर्फ बस आपसे जुड़े होते हैं और जो बात दुसरे से जुड़ी न हो, तो लोग उसे या तो टाल देते हैं या एक कान से सुन दुसरे से निकाल देते हैं ।

दिखावा (Show off)

शक्ल-ओ-सूरत की मोहताज है सारी दुनियां, कोई अच्छा हो या बुरा कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता।

आज दुनिया दिखावे के पीछे पागल है। आजकल सुंदरता के आगे व्यक्तित्व और विचारों का कोई मूल्य नहीं है, जबकि ये बाहरी दिखावे पल भर के होते हैं। खूबसूरती का पहनावे से कोई लेना देना नहीं है। ज़रूरी नहीं जो देखने में अच्छा हो लगे वो वास्तव में वैसा ही हो। दिखावे के पीछे भागने वालों को ज़्यादातर कड़वे अनुभवों को झेलना पड़ता है। इसलिए सुन्दरता पर नहीं अच्छे स्वभाव और सरलता से प्रेम करो।

पुराने ज़ख्म (Old wound)

पुराने जख्मों को कुरेदने से क्या फ़ायदा
घाव जब भी हरे होंगे तकलीफ़ ही दे जायेंगे।

पुरानी कड़वी यादों और अनुभवों को बार बार सोचने से आपका दर्द कम नहीं होता बल्कि और बढ़ जाता है। इसलिए अगर खुद की या किसी और की वजह से आपको कोई तकलीफ़ हुई हो तो या तो उसे भुला दो या फ़िर माफ़ कर दो। ज़िंदगी में लकलीफें कम और सुकून ज्यादा पाओगे।

काश! मैने ये गलती न की होती।

कमियां (Flaws)

मुझे है क्या पड़ी,जो ख़ुद ही ख़ुद को मैं बुरा बोलूं?
ज़माना है खड़ा संग में, वो किस दिन काम आयेगा
?

आजकल किसी को अपनी कमियों या बुराईयों के बारे में सोचने की ज़रूरत ही नहीं होती। दुनिया और आस पड़ोस के लोग; हो ना हो आप में कुछ न कुछ नुक्स ढूंढ़ ही लेते हैं। इसलिए फ़िक्र न करें लोग तो हैं न आपका ज़िक्र करने के लिए।

चुगली(Backbiting)

आजकल किसी की बुराई करना;मसाला चाय की तरह हो गई है।जिसे पीने और पिलाने वाले दोनों को मज़ा आता है।और ये जो हाल है वो हर घर,हर गली और मुहल्ले की कहानी हो गई है।पता नहीं कैसे मगर लोगों को अपने गिरेबान झांकने का मौक़ा मिले ना मिले,दूसरों की खिड़की में झांकने का मौक़ा निकाल ही लेते हैं। इसे ही कहते हैं सच्चा जनकल्याण,जिसमें किसी का कल्याण हो न हो एक दिन किसी की जान ज़रूर निकल जायेगी।

मतलबी लोग(Selfish People)

सभी हैं मतलबी यारों,
कहीं मतलब की यारी है।
कहीं मतलब के रिश्ते है,
कहीं ये दुनियादारी है।
कोई मतलब का भूखा हैं,
कोई मतलब का है प्यासा,
कहीं मतलब की बोली है,
कहीं मतलब की है भाषा।
सभी हैं मतलबी जग में,
बातें मतलब की प्यारी हैं ।
जो भी कुछ दिख रहा तुमको,
सभी मतलब से भारी है।
सभी हैं मतलबी यारों,
कहीं मतलब की यारी है।
कहीं मतलब के रिश्ते है,
कहीं ये दुनियादारी है।

आजकल लोग बस मलतब के लिए रिश्ते निभाते या बनाते हैं। ये जानते हुए भी कि इन्सानी रिश्ते लेन देन पर टिके होते हैं, मतलब पर नहीं।इसमें अगर प्यार और सच्ची भावनाओं का लेन देन करोगे; तो मतलब तो अपने आप ही निकल जायेगा। फिर भी यहां देने की किसको पड़ी है,आजकाल सभी बस लेना जानते हैं। अगर काम निकालना हो तो अपना और निकल गया तो बुरा सपना।

रिश्तों की सच्चाई(Truth of Relationship)

मुसीबत की तपिश से घिरा कब से ढूंढ रहा हूं पर फिर भी,
लाख कोशिशों के बावजूद; मुझे मेरा अक्स दिखाई नहीं देता।

जब सूरज सिर चढ़ता है तो अपनी परछाई भी छोड़ देती है। जब अपनी परछाई ने ही साथ नहीं दिया तो औरों से क्या शिकायत करना। लेकिन जो आपके बुरे वक्त में आपके साथ खड़ा रहे,वही आपका सच्चा साथी है; सम्बन्धी है।ऐसे लोग ही आपकी सच्ची पूँजी हैं। इसलिए ऐसे लोगों को कभी भी खोना नहीं चाहिए।