हकीकत(Reality)

कितना भी खुद से भाग लो लेकिन। हकीकत से छुपकर कहां जाओगे?

No matter how much you run away, Where will you go to hide from reality?

हम अपनी वास्तविकता से भले ही कितना भी किनारा क्यूं न कर लें। जो सच्चाई है वो कभी बदल नहीं सकती। चाहे यह बात हमारी पहचान से सम्बंध रखती हो या फिर हमारी तत्कालीन परिथितियों से। ज्यादातर लोग समस्याएं आने पर दूसरों को और भगवान को दोष देते हैं या अपने बुरे वक्त का रोना रोते हैं और सोचते हैं कि कोई आए और हम पर तरस खाए।वो देखे की हम ज़िंदगी के किस दौर से गुजर रहे हैं। इससे बात नहीं बनी तो हम खुद को नशे के अंधे कुएं में झोंक देते है,बस चन्द पल के लिए खुद को भरमाने के लिए कि अब जिंदगी में कोई गम नहीं है। इसके बाद अगली सुबह एक नया रोना या फिर नशे की लत।बस यही ज़िंदगी बन कर रह गई है। अपने हालातों पर रोना भी एक तरह का नशा है, जिससे हम अपने जीवन की वास्तविकता झुठला सकें।हम दूसरों के आगे जीवन भर रोते रहते हैं। हमें पता है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा और न ही हमारी मुसीबतें कम होंगी। फिर भी हम अपनी हरकतों से बाज नहीं आते। ज़रा सोचिए किसी को अपनी परेशानियां बताने से क्या हाल मिल जायेगा और अगर कोई दूसरा इन्सान इसका हल दे भी दे तो ये किस्सा कितने दिन चलेगा ?आप फिर नई मुसीबत आते ही किसी और को ढूंढोगे। इसका सीधा मतलब यह है कि आप हर परेशानी के लिए दूसरे पर आश्रित हो चुके हैं। आकर्षण का सिद्धांत ये कहता है कि हम जिस किसी वस्तु या भावना के बारे में ज्यादा सोचते हैं, उसे हम उतना ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसका मतलब है कि यदि हम ज्यादातर अपनी परेशानियों का रोना रोयेंगे और लगातार उसके बारे में सोचेंगे तो हमें और भी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए परेशानियों और जीवन की समस्याओं पर रोना नहीं , बल्कि उन्हें हल करना,उनसे लड़ना सीखिए और हो सके तो उन पर हंसना शुरू कीजिए। फिर आपकी ज़िंदगी भी मुस्कुराने लगेगी।

No matter how much we move away from our reality. The truth can never change. Whether it is related to our identity or our current circumstances. Most of the people blame others and God when they face problems or cry about their bad times and think that someone should come and take pity on us. He should see what phase of life we are going through. If this doesn’t work then we throw ourselves into the blind well of addiction, just to deceive ourselves for a few moments that there is no sorrow in life anymore. After this, the next morning a new cry or drug addiction. This is what life has become. Crying over our circumstances is also a kind of addiction, due to which we can deny the reality of our life. We keep crying in front of others throughout our life. We know that this will not make any difference nor will our troubles reduce. Still we do not desist from our actions. Just imagine what kind of situation you will get by telling your problems to someone and even if someone else gives the solution, how long will this story continue? You will then look for someone else as soon as a new problem arises. This simply means that you have become dependent on others for every problem. The law of attraction says that the more we think about any object or emotion, the more we attract it towards us. This means that if we mostly cry about our problems and constantly think about them, we will have to face even more problems. Therefore, do not cry over the troubles and problems of life, but learn to solve them, fight them and if possible, start laughing at them. Then your life will also start smiling.

जो दोगे वही पाओगे(You get what you give)

जो हम दूसरों से अपने लिए चाहते हैं, हमें वो दूसरों को पहले देना पड़ेगा। तब जाकर हम उस लायक बन पाएंगे, कि किसी से कोई उम्मीद कर सकें।

What we want from others for ourselves, we have to give to others first. Only then will we be able to become worthy enough to have expectations from anyone.

हमारी एक बुरी आदत है कि हम अपने लिए दूसरों से अच्छे बर्ताव की उम्मीद करते हैं। हम चाहते हैं कि कोई हमारे बुरे वक्त में हमारा साथ दे और हमारी मदद करे। हमारा सम्मान करे, हमसे प्रेम करे, हमारी कमियों के साथ हमें अपनाए और हमारी बड़ी से बड़ी गलतियों पर हमें माफ़ भी कर दे। लेकिन क्या दूसरों को भी हमसे यही उम्मीद रखने का हक है? हम दूसरों में तो लाखों कमियां निकलते हैं।लेकिन क्या हमने खुद की खामियों पर कभी गौर किया है? अगर किसी से हमें वो नहीं मिल पाता जो हम उससे अपने लिए चाहते हैं तो वो हमारी निगाह में बुरा बन जाता है। लेकिन हमने उसके लिया क्या किया है, इस बात से हमें कोई भी मतलब नहीं है। हम ये बात भूल जाते हैं कि हम दूसरों को जो देते हैं वही दूसरों से पाते हैं। हम दूसरों को जो दे नहीं सकते वो हमें उनसे पाने की उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए।

One of our bad habits is that we expect good behavior from others. We want someone to support and help us in our bad times. Respect us, love us, accept us with our shortcomings and forgive us even our biggest mistakes. But do others also have the right to expect the same from us? We find millions of shortcomings in others. But have we ever noticed our own shortcomings? If we are not able to get what we want from someone then he becomes bad in our eyes. But we don’t care what we have done for him. We forget that what we give to others is what we get from others. What we cannot give to others, we should not expect to get from them.

मुंह की कोई सुनता है क्या?(Does anyone listen to the mouth?)

पतझड़ के पत्तों सा टूटा ,
गिरा कहीं कुछ खुद मुझमें।
अपनी कुछ उम्मीदें टूटी,
संग-संग टूटे कुछ सपने।
तिनका-तिनका बना घरौंदा,
उजड़ा बिखरा राहों में।
दिल का दर्द दिखेगा किसको?
मुंह की कोई सुनता है क्या?
मुंह की कोई सुनता है क्या?
कुछ दिन-कुछ पल या कुछ बातें,
थी चाह मेरी कोई सुनता।
पर दूजे की परवाह किसे?
है कौन यहां कुछ भी गुनता?
बस मतलब की यहां यारी है,
और मतलब की दुनियादारी।
सब मतलब पर ही याद करें,
सब मतलब पर परवाह करें।
कितने घाव लगे इस दिल पर,
देकर कोई गिनता है क्या?
दिल का दर्द दिखेगा किसको?
मुंह की कोई सुनता है क्या?
मुंह की कोई सुनता है क्या?
हर बार सोचकर कोशिश की,
हर बार उम्मीदें करता हूं।
है पता मुझे है बेमतलब,
फिर भी तकलीफे चुनता हूं।
जिन्हें खुद से ही लेना देना,
उनको रिश्तों की कहां पड़ी?
बस अपनी झोली भरने तक,
रिश्तों का साथ निभाते हैं।
किसकोअपने ज़ख्म दिखाएं ?
मरहम भी कोई रखता है क्या?
दिल का दर्द दिखेगा किसको?
मुंह की कोई सुनता है क्या?
मुंह की कोई सुनता है क्या?

लोग बदल रहे हैं(People are change)

लोग कहते हैं कि इन्सान को वक्त के साथ साथ खुद को बदलना चाहिए।
पर मैने लोगों को अपनी ज़रूरत के साथ ही बदलते देखा है।

जब आपका बुरा समय शुरू होता है तो आपके अपने, आपके सम्बन्धी सभी आपसे किनारा करने लगते है । जो आपके अच्छे दिनों में आपके साथ थे वो आपसे मिलने से कतराते हैं कि कहीं मिलते ही आप;उनसे कोई मदद न मांग ले और अगर आप उनसे मदद मांग भी लेते हैं तो अक्सर बहाने बनाकर आपकी बात टाल दी जाती है। ऐसे लोगों से दूर रहने और अपना काम से काम रखने का प्रयास करें। आप सुखी रहेंगे।

भूख(Hunger)

अक्सर ये सोचता था बड़ी तकलीफ़ है मुझे, पर ये आंख खुल गई जो निगाहें उधर गई। सड़कों के किनारे पे कचरे में हाथ में से, कोई शख्स मुझको आज रोटी उठाता हुआ मिला।

I often thought that I was in a lot of trouble, but my eyes were opened today when my eyes went to the place where I saw someone picking up bread from the garbage heap on the roadside.

भूख बड़ी ज़ालिम होती है कभी ये नहीं देखती आपके पास उसे देने के लिए कुछ है या नहीं।बस लग जाती है। रोटी इन्सान की सबसे पहली ज़रूरत है बाकी चीजें तो इसके बाद ही आती हैं। पेट की आग बहुत तेज़ होती है । इसने कितनों के ही घर जला दिए है,कितनों को ही मार डाला है और कितनों को ही मजबूर कर रही है अनचाहा या गलत काम करने के लिए, खासकर छोटे बच्चों को।जिनके हाथ में किताबे और आंखों में सुनहरे सपने होने चाहिए थे,उनके हांथ में कचरे की बोरी और आंखो में भूख की तड़प है।कही कोई अपना बचपन छोड़कर कमाने निकल पड़ा है तो कहीं कोई चोरी करके अपना पेट पालने को मजबूर है। इस विषय को छोटे से अंश में पूर्ण रूप से वर्णित करना संभव नहीं है। इसलिए बस इतना ही कहना चाहूंगा कि आप उनकी सहायता करे न करें को सक्षम हैं पर उनकी सहायता करने से न चूकें जो असक्षम हैं। यही मानवता है जो हमें पशुओं से भिन्न बनाती है।

Hunger is very cruel, it never checks whether you have anything to give it or not. It just needs to eat something. Bread is the first need of a human being, other things come only after it. The stomach fire is very strong. It has burnt down so many houses, killed so many people and is forcing so many to do unwanted or wrong things, especially small children. Those who should have had books in their hands and golden dreams in their eyes, There is a sack of garbage in his hand and the pain of hunger in his eyes. Some people have left their childhood and set out to earn money while others are forced to survive by stealing. It is not possible to describe this topic completely in a small excerpt. So all I would like to say is that even if you do not help those who are capable, do not miss helping those who are unable. It is humanity that makes us different from animals.

सुकून(Inner Peace)

यहां हूं दर बदर भटका मैं तेरी चाह में लेकिन, न तेरा अक्स ही देखा न तेरी आहटें पाईं। भटकता चाह में तेरी कहीं तो पा सकूं तुझको, मगर मैं ही नहीं हर शख्स तुझको ढूंढता होगा।

Here I have wandered from place to place in search of you, but neither have I seen your reflection nor found your voice. I wander longing for you, I wish I could find you somewhere, but not only I, but every person must be searching for you.

हम दुनिया की चकाचौंध में खोए रहते हैं और बाहर खुशियों की तलाश करते हैं जिससे हमें सुकून मिल सके; शांति मिल सके। लेकिन हम जब भी खुद को दूर से देखते हैं , तो खुद को अकेला पाते हैं। सच कहें तो असली सुकून बाहर नहीं खुद के दिल के भीतर होना चाहिए। लेकिन इसी सुकून की तलाश में हम ज़िंदगी भर बाहर भटकते रहते हैं।

We remain lost in the glamor of the world and look for happiness outside which can give us peace. But whenever we look at ourselves from a distance, we find ourselves alone. To be honest, real peace should not be outside but within one’s own heart. But in search of this peace we keep wandering outside throughout our lives.

आशा ही दुखों का मूल है(Hope is the root of suffering)

कुछ करने के बदले स्वयं को कुछ मिलने या पाने की संभावना का भाव ही आशा है।तो फ़िर निराशा क्या है?उत्तर है आशा का टूट जाना या अपने मानदंडों पर खरा न उतरना।

जब भी हम किसी के लिए या अपने लिए कुछ करते हैं तो उससे एक आशा जुड़ जाती है कि अंत में हमें ये मिलेगा या फिर हमारे साथ ऐसा होगा परन्तु यदि हमें हमारी सोच के अनुरूप परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं तो फ़िर वहां से हमारे अंतरमन में निराशा का जन्म होता है। जो हमारे दुखों का मूल कारण है।

जब भी हम निराश होते हैं तो हमें मानसिक कष्ट की अनुभूति होती है और यही मानसिक कष्ट ही दुःख कहलाता है। ये दुःख हमें अन्दर तक तोड़ देता है और हमारा सुख-चैन सब कुछ छीन लेता है। तब हमारा जीवन अन्धकार से घिर जाता है। तो क्या तरीका है इस दुःख से बाहर निकलने का; इससे पार पाने का।

दुःख से मुक्ति…..?यह एक अत्यन्त जटिल प्रश्न है, जिसका हल ढूंढने का प्रयास युगों-युगों से चलता आ रहा है। कई ऋषियों,महात्माओं, ज्ञानियों,साधुओं और संतों ने इस गूढ़ तथ्य का हल ढूंढने में अपना जीवन लगा दिया। फिर एक उत्तर मिला-“जो दुःख का मूल कारण है उससे दूर रहो”। आज इस उत्तर का अर्थ सभी के लिए अलग अलग है। हमने अपनी सोच-समझ के अनुरूप इसका भिन्न भिन्न अर्थ लगा लिया है। 

 आज अपने दुखों से सभी मुक्ति चाहते हैं परन्तु इसके कारण पर कोई विचार नहीं करता। किसी के लिए पैसे की कमी दुःख का कारण है तो किसी के लिए अपनों का साथ न देना। किसी को ईश्वर प्राप्ति में दुःख से मुक्ति दिखाई देती है तो किसी को सांसारिक भोग-विलास में। कोई असफल होने पर दुःख है तो कोई इच्छा की पूर्ति न होने से। इसके लिए किसी ने घर छोड़ा,तो किसी ने परिवार,किसी ने सन्यास लिया, तो किसी ने धन प्राप्ति में ख़ुद को झोंक दिया। परन्तु किसी को भी उसके दुख से मुक्ति नहीं मिली।

तो क्या है दुखों से मुक्ति का रहस्य जो हमारे समझ से परे है। आपको ज्ञात होगा कि जब आप आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे तो आपके मन में इससे बचने का क्या उपाय सूझा जो था धन कमाना। अब आपने सोचा कि इससे आपका दुख कम होगा। पर इससे बस आपकी समस्याएं कम हुईं,आपका दुख नहीं।अब आपकी आवश्यकता और इच्छा बढ़ी और आप फिर आशा  करते हैं कि और अधिक धन आपकी समस्या को सुलझा देगा।लेकिन फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ा।अब जो अपने आशा की वो निराशा में और आपकी निराशा दुःख में बदल गई। और आप फिर वहीं हैं जहां से आपने शुरू किया था।

  भगवान श्री कृष्ण ने गीता में  दुखों से मुक्ति का मार्ग बताया है,उन्होने कहा है कि “कर्म करो,फल की चिंता मत करो”। अर्थात् अपना कर्त्तव्य तो करते जाओ परन्तु उसके पश्चात्  मिलने वाले परिणाम की चिंता भूल जाओ। इसका एक अलग अर्थ यह भी है कि अपने कर्मों के बदले कुछ मिलने की आशा त्याग दो। यदि इसे ही छोड़ दिया तो इसके टूटने पर होने वाली निराशा और दुख नहीं होगा।

      इसलिए यदि हम अपने या किसी के लिए कुछ कर रहे हों तो हमे उसके बाद जो मिले उसे स्वीकार करना चाहिए। जैसे आपने बुरे समय किसी का साथ दिया तो यह आशा न करें कि वो भी आपके बुरे समय में आपका साथ देगा। क्योंकि यदि ऐसा नहीं हुआ तो आप हताश और निराश होंगे जो आपको दुख पहुंचाएगा। इस प्रश्न का यही उत्तर है कि किसी व्यक्ति या वस्तु के लिए कर्म करो मगर उम्मीद नहीं क्योंकि अगर ये टूटी तो आप भी टूट जाओगे। इसके स्थान पर अपने मन में संतोष और धीरज को धारण कर आप मानसिक दुख से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि यह करना अत्यन्त कठिन है पर असंभव नहीं।

जय(Victory)

जय एक दिवस की बात नहीं,
वर्षों का अथक परिश्रम है।
संकल्पों की ये गाथा है,
संघर्ष भरा इक जीवन है।
जय एक दिवस की बात नहीं,
वर्षो का अथक परिश्रम है…..।
हां विजय स्वप्न को लक्ष्य बना,
मानव जब जग से लड़ता है।
तब ही जयघोष स्वर्ण मुकुट,
योद्धा के सिर पर सजता है।
पर ये पथ भी आसान कहां,
जितना गाथाएं सुन लगता।
बाधाओं से टकराए बिन,
इस जग में कहां कुछ भी मिलता।
जय एक दिवस की बात नहीं,
वर्षो का अथक परिश्रम है।
संकल्पों की ये गाथा है,
संघर्ष भरा इक जीवन है।
जब भी कोई संकल्प करे,
अपने ही पथ भटकाते है।
कभी बहलाकर-कभी समझाकर,
कभी भय से रह भुलाते है।
गर साथ भी दे दें अपने तो,
औरों से लड़ना पड़ता है।
लोगों की पैनी बातों से,
पल-प्रतिपल बचना पड़ता है।
जो शंकाओं,उपहासों के,
काटों को मन में बोते हैं।
बच कर रहना उन लोगों से,
जो वास्तव में शत्रु होते हैं।
यदि पार हो चुकी हर विपदा,
तो दर्पण में खुद को देखो।
जो देख रहा है अब तुमको,
वो अब आखिर की बाधा है।
जय एक दिवस की बात नहीं,
वर्षो का अथक परिश्रम है।
संकल्पों की ये गाथा है,
संघर्ष भरा इक जीवन है।
अब बात है अन्त समस्या की,
खुद से ही खुद लड़ना होगा।
खुद के मन के बहकावे से,
हर पल तुमको बचना होगा।
सुख में तुमको भटकाएगा,
आलस की राह दिखायेगा।
ये कष्टों से डर बोलेगा,
अब तुमसे ना हो पाएगा।
इससे लड़ना आसान नहीं,
मन हर क्षण पथ भटकता है।
जिसने साधा अपने मन को,
निश्चित ही जय कर जाता है।
जय एक दिवस की बात नहीं,
वर्षो का अथक परिश्रम है।
संकल्पों की ये गाथा है,
संघर्ष भरा इक जीवन है।

Victory is not a matter of one day,it is years of tireless work.This is a story of resolutions, a life full of struggle. Victory is not a matter of one day, it is years of tireless hard work… Yes, victory becomes the goal of dreams when a person fights with the world. Only then does the golden crown of victory adorn the warrior’s head. But isn’t this path easy, no matter how many stories you hear? It seems. Where can anything be achieved in this world without hitting obstacles. Victory is not a matter of one day, it is years of tireless hard work. This is a saga of resolutions, a life full of struggle. Whenever someone makes a resolution, his own people start diverting him from the path. Sometimes by coaxing, sometimes by convincing, sometimes by scaring him, he is asked to forget his goal. Even if we support ourselves, we have to fight with others. We have to avoid sharp words from people at every moment. People who sow doubt in the mind, ridicule others, sow thorns in the mind. Stay away from those people who are actually my real enemies. If you have overcome every adversity, then look at yourself in the mirror. The one who is looking at you now is the last hurdle. Jai, it is not a matter of one day, it is years of tireless work. This is a story of resolutions, a life full of struggle. Now coming to the last problem, you will have to fight with yourself. From the illusion of one’s own mind. , you have to survive every moment. It will lead you astray in happiness, it will show you the path of laziness. It will make you afraid of pain, you will not be able to handle it anymore. It is not easy to fight this, the mind wanders every now and then. For a moment the person forgets his path. He who corrects his mind definitely wins. Victory is not a matter of one day, it is years of tireless hard work. This is a story of resolutions and struggle. It is a complete life.

यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता(Nothing is wasted here)

कैसे छोटा सा बीज कोई,
एक वृहत वृक्ष बन जाता है।
कैसे माटी का इक ढेला,
जल में हिल्लोल(तरंग)बनाता है।
जग में प्रभु की जो भी रचना,
उसका अब मोल हु समझाता।
यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
हां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
नन्ही सी चींटी को देखो,
कैसे जी जान लगाती है।
कैसे छोटी की नाव कोई,
तूफानों से टकराती है।
दृढ़ हो निश्चय संकल्प-अटल,
सब कुछ संभव है हो जाता।
यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
हां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
कैसे वेगित हो जल धारा,
पाषाण चीर बढ़ जाती है।
देखो कैसे जल की बूंदे,
मिलकर सागर बन जाती है।
जलते दीपक से तुम सीखो,
अंधेरे से है लड़ जाता।
यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
हां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
निर्जीव-सजीव जो हैं जग में,
सबकी अपनी-अपनी प्रभुता।
स्वयंमेव से तुच्छ बनो न कभी,
प्रभु ने सौंपी अदभुत क्षमता।
जैसे छोटे से पग धरके,
कोई पथ लंघन कर जाता।
प्रभु ने जग में जो कुछ भेजा,
है कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।
यहां कुछ भी व्यर्थ नहीं जाता।

How a small seed becomes a big tree.
How a earthen lump creates waves in water.
Whatever creation of God in the world,
now I have its value explains.
Nothing goes waste here.
Yes, nothing goes waste here.
Look at the little ant how it tries its best.
How a small boat collides with the storms. .
Be strong in your determination steadfast,
If your determination is strong, then everything is possible.
Nothing goes waste here.
Yes, nothing goes waste here.
How does a stream of water move faster, cutting through even the stones?.
See how the drops of water,
come together to become the ocean.
You learn from the burning lamp,
It fights the darkness.
Nothing goes waste here.
Yes, nothing goes waste.
The inanimate and living things in the world,
Everyone has their own sovereignty.
Never become insignificant on your own accord,
The Lord has given you amazing ability.
Just like taking a small step,
A path Would have skipped.
Whatever God has sent into the world,
nothing goes waste.
Yes nothing goes waste here.

” किसी को भी ख़ुद के कम आंकते हुए उसे उसका उपहास या अपमान करने की भूल ना करें,हो सकता उसमें वह गुण हो जो आपकी क्षमता है परे है। क्योंकि ईश्वर की हर रचना स्वयं में अद्वितीय है।”

“Don’t make the mistake of underestimating or insulting someone; they may have qualities that are beyond your ability. Because every creation of God is unique in itself.”

अकेला(Alone)

अकेलेपन का गम उससे ज्यादा और कोई नहीं समझ सकता, जो अपनों के साथ रहने के बावजूद अकेला महसूस करता हो।

बहुत तकलीफ़ होती है जब अपने साथ होते हुए भी बहुत दूर होते हैं।एक अलग सा दर्द महसूस होता है । ऐसा नहीं कि अपने साथ नहीं देते, मगर कोई आपको समझने वाला नहीं होता। ऐसे में तकलीफ़ दुगनी हो जाती है और इस हाल में हम अक्सर गलत फैसले कर बैठते हैं या कोई गलत आदत अपना लेते हैं,अपनी मायूसी को छुपाने के लिए। लेकिन हमारी दिक्कतें कम नहीं होती, बल्कि और भी ज्यादा बढ़ने लगती हैं । इसलिए अगर आप अकेला महसूस करते हैं तो अपनों से इस बारे में बात कीजिए,अपने दोस्तों से मिलिए और खुद को खुश रहने की कोशिश कीजिए। तभी आप अकेलेपन के भॅवर से निकल सकते हैं वरना डूब जायेंगे।