प्रतिरोध(Resistance)

व्यक्ति का सरल व शान्त होना भी एक अपराध ही है।सच ही कहा गया है,आप हर किसी के साथ अच्छे नहीं हो सकते।कभी-कभी प्रतिरोध करना भी आवश्यक होता है।क्योंकि विद्युत धारा का प्रवाह भी उसी परिपथ में अधिक सरलता से होता है,जिसका प्रतिरोध अन्य परिपथों की तुलना में अपेक्षाकृत कम होता हैं। इसलिए खुद को इतना भी सस्ता न बनाएं कि कोई भी आए और खेल जाए।

It is also a crime for a person to be simple and calm. It is true that you cannot be nice with everyone. Sometimes resistance is also necessary. Because the flow of electric current also happens more easily in the same circuit, whose resistance is relatively less as compared to other circuits. So don’t make yourself so cheap that just anyone can come and play.

खुद को दिल से अपनाना बहुत मुश्किल है (It’s very difficult to accept yourself wholeheartedly)

किसी को माफ़ करना आसान है लेकिन, खुद को मन से स्वीकारना बहुत मुश्किल। 

हमारे आस-पास कुछ लोग होते हैं ।कुछ अपने,कुछ पराए,कुछ दोस्त,तो कुछ दुश्मन; लेकिन मानो अगर किसी से कोई गलती हो जाए। जिससे आपका जीवन बुरी तरह प्रभावित होता हो,तो आप क्या करेंगे? उससे बदला लेंगे या उसे सजा देंगे। कुछ लोग ऐसा ही करते हैं ,पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो दूसरों को गलतियों पर उन्हें माफ करने का जिगर रखते हैं। पर दूसरों को माफ़ करना हिम्मत का ही सही पर उतना मुश्किल काम नहीं है, जितना खुद की गलतियों पर खुद को ही दिल से माफ़ करना और खुद को स्वीकार करना।”खुद को माफ़ करना “यह एक बहुत बड़ी बात होती है। ये जितना सुनने में और कहने में आसान लगता है, उससे कहीं ज्यादा कठिन कार्य है। अब आप सोचेंगे कि ख़ुद को माफ़ करना ये तो बहुत ही आसन काम है,लेकिन मै कहूंगा “जी बिल्कुल नहीं”।क्या आपने; अपने जीवन में कुछ ऐसा काम किया है, कोई ऐसी गलती; जिसने आपकी ज़िंदगी का रुख ही बदल कर रख दिया हो।कुछ ऐसा जिसे याद करके आपको पछतावा होता है कि काश मुझसे ये गलती न हुई होती।सभी ने अपने जीवन में कोई न कोई ऐसा काम ज़रूर किया होता है।कोई ऐसी गलती या कोई चूक की होती है ,जिसका उसको जीवन भर पछतावा होता रहता है।अब ख़ुद से पूछिए आपको उस गलती की याद बार बार आ रही है या नहीं।अगर जवाब “नहीं”है तो मुबारक हो आप खुद को माफ़ कर चुके हैं और अगर आपका जवाब “हां” में है। आपको अपनी की हुई गलती बार बार याद आ रही है तो आपको खुद को दिल से माफ़ करने की जरूरत है पर बात यहां ही नहीं खत्म होती।एक बात और है जो मैं आपसे कहना चाहता हूं।आज समाज एक नई तरह की समस्या से जूझ रहा है, और वो है खुद की कमियों को स्वीकार न करना या खुद को खुद की कमियों के साथ स्वीकार न करना। अगर आप अपनी कमियों और गलतियों को दिल से नहीं स्वीकारते हैं तो आप उनसे सीख लेकर कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। कभी-कभी यह समस्या व्यक्तिगत अहंकार से जुड़ी होती है।लेकिन हम यहां उसकी बात नहीं कर रहे।हम बात कर रहे हैं।खुद को खुद की ही कामियों के साथ स्वीकारने की ,जो की अत्यन्त ही दुष्कर कार्य है।यह कमियां शारीरिक, मानसिक या व्यवहारिक किसी भी प्रकार ही हो सकती हैं।हो सकता है आपके अन्दर कोई जन्मजात दोष जैसे-तोतलापन,किसी भी प्रकार ही विकलांगता या फ़िर आपका व्यवहार।हो सकता है आप अन्य लोगों का जल्द ही यकीन कर लेते हैं इसलिए आप जल्दी धोखा खा जाते है।आपके व्यवहार से दूसरों को तो लाभ होता है पर आप हमेशा लोगों की चालाकी और षड्यंत्रों का शिकार हो जाते हैं। लेकिन ये जरूरी नहीं कि आपके साथ ये समस्या जन्मजात ही हो या वास्तव में यह कोई समस्या भी हो।यह आपके मानने पर निर्भर है।अगर मानवीय व्यवहार ही बात करें तो अगर कोई व्यक्ति सीधा है तो यह कोई दोष नहीं है। अपने इस व्यवहार के कारण अगर कोई परेशान है तो उसे बस यह समझने की आवश्यकता है कि हर व्यक्ति के साथ आप अच्छे नहीं हो सकते। यदि आप मे कोई शारीरिक या मानसिक दोष हैं तो इसके लिए रोने या पछताने की आवश्यकता नहीं है।मेरी बातें कड़वी लग सकती हैं, पर आप खुद सोचिए कि किसी भी कमी या दोष या किसी गलती पर यूं ही जीवन रोने और पछताने से कुछ होता है भला । इस चार दिनों की जीवन यात्रा को यदि रोते, पछताते बितायेंगे तो आपने जीवन कब जिएंगे?इसलिए यदि जीवन में आपको आगे हंसते-मुस्कुराते बढ़ना है तो खुद को खुद की कमियों के साथ स्वीकारिए और अपनी गलतियों के लिए खुद को माफ़ करते हुए आगे बढ़ते रहिए, नहीं तो सारा जीवन बस रोने में ही चला जाएगा और आप अपने जीवन में जो कुछ भी पाना चाहते हैं;आप उसे मिलने से पहले ही खो देंगे। इसलिए खुद और खुद के जीवन का सम्मान करें उसका अपमान नहीं क्योंकि ईश्वर ने जो कुछ भी इस धरती पर सृजन करके भेजा है, वो सर्वोत्तम है और यदि आपको कुछ कमी लग रही हो तो एक सत्य जान लीजिए कि इस संसार में ऐसा कुछ भी नहीं जिसमें बेहतर बनने की गुंजाइश न हो।

आलोचना (Criticism)

ज़िंदगी भर एक बात हमेशा याद रखना, जो तुम्हारी बुराई करे उसे हमेशा साथ रखना।

Always remember one thing throughout your life, always keep the one who criticise you with you.

हर इन्सान को अपनी तारीफ़ अच्छी लगती है। दुनियां में ऐसा कोई भी नहीं जिसे तारीफ़ से तकलीफ हो भले ही वो तारीफ झूठी ही क्यों न हो। मगर जब कोई आपकी बुराई करता है और आप में कमियां निकालता है।तब आपको बुरा लगता है और आप अपना मन मसोस कर रह जाते हैं। अगर आप उसे करारा जवाब दे सकने लायक हैं, तो आप वैसा ही करते हैं और अगर नहीं तो आप उसे मन ही मन गालियां देते हैं। पर क्या आपको पता है कि आपके जीवन में कुछ ऐसे ही लोग होने ही चाहिएं जो आपको;आपकी कमियां दिखा सकें।बात बात पर आपमें नुक्स निकालने वाला हर इन्सान आपका दुश्मन ही नहीं आपका दोस्त भी हो सकता है। आपको आईना दिखाने वाला शख्स बस आपको;आपकी सही तस्वीर दिखाए, फ़र्क नहीं पड़ता कि वो आपका दोस्त है या दुश्मन। कभी कभी हम अपनी कमियों को पहचान नहीं पाते और कभी कभी तो हमें एहसास ही नहीं होता कि हममें कोई कमी भी है। ऐसे शख्स से आपको ये फ़ायदा होता कि आपको ;अपनी कमियों को ढूंढना नहीं पड़ेगा। बल्कि कोई है, जो आपके लिए यह काम खुद कर रहा है। इससे आपकी शक्ति भी बचेगी, जिसे आप ख़ुद को तराशने में लगा सकते हैं। मगर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं,जो आपमें यूं ही नुक्स निकालते रहते हैं।उनकी बातों का कोई सिर-पैर नहीं होता। पर उनकी बातों को भी कभी नज़रंदाज़ न करें। उनकी बातें अर्थपूर्ण भी हो सकती हैं। यदि उनकी बातों में थोड़ी भी सच्चाई है तो आपको ख़ुद को निखारने का एक और मौका मिल जायेगा और अगर नहीं है तो आपका उत्साह बढ़ जायेगा,क्योंकि लोग बस उसी का रास्ता काटते हैं ,जो तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ रहा होता है। इसलिए ऐसे लोगों को वरदान मानिए जो आपको आईना दिखाकर, आपको संवारने में मदद कर सकते हैं और साथ ही साथ आपको बेहतर से बेहतरीन बन सकते हैं।

Every person likes to be praised. There is no one in the world who is hurt by praise, even if the praise is false. But when someone speaks ill of you and finds faults in you, then you feel bad and feel sad. If you are capable of giving him a befitting reply, you do so and if not, you abuse him in your mind. But do you know that there should be some people in your life who can show you your shortcomings. The person who finds faults in you in every conversation can be not only your enemy but also your friend. The person who shows you the mirror just shows you the true picture of you, it does not matter whether he is your friend or your enemy. Sometimes we are unable to recognize our shortcomings and sometimes we do not even feel that we have any shortcomings. You would benefit from such a person that you would not have to look for your shortcomings. Rather, there is someone who is doing this work for you himself. This will also save your energy, which you can use in carving yourself. But there are some people who keep finding faults in you. Their words have no basis. But never ignore their words either. His words may also be meaningful. If there is even a little truth in what they say then you will get another chance to improve yourself and if not then your enthusiasm will increase, because people only cross the path of those who are moving forward on the path of progress. Therefore, consider it a blessing to have such people who can show you a mirror and help you in grooming you and at the same time can help you become the best of the best.

अपनी गलतियों के लिए दूसरों को दोष देना बन्द करें(Stop blaming others for your mistakes)

हमारी एक बुरी आदत है।जब भी हमारे साथ कुछ गलत होता है,तो हम उसका दोष किसी दुसरे पर मढ़ देते हैं। जबकि हमें यह समझना जरूरी है कि हमारे साथ जो कुछ भी गलत हो रहा है,उसके जिम्मेदार हम स्वयं ही हैं। अगर कोई हमारा फ़ायदा उठाने की कोशिश करता है, तो इसके मतलब ये नहीं कि वो ही गलत है। अगर हम किसी को मौका ही न दे,तो भला हमारा कोई फायदा कैसे उठा सकता है? अगर हमें कोई धोखा देता है तो इसका मतलब बस ये है कि हम सजग नहीं थे। इसलिए अपने साथ जो भी कुछ गलत हो रहा है,उसके लिए किसी दुसरे को दोषी न ठहराना बन्द करें और अपने द्वारा की गई लापरवाही और गलतियों की जिम्मेदारी स्वयं लें।

मन की इतनी सुनता क्यूं है?(Why do you listen to your mind so much?)

जब-जब तूने पंख उठाए,
मन ने कितने खेल रचाए।
कोशिश तेरी है बिन मतलब,
पथ पर पग-पग ये भरमाए।
हुए पांव घायल जब तेरे,
फिर उठने से डरता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
हर बार जो तूने ज़िद ठानी,
चाहा जो सागर को तरना।
मन ने फिर प्रश्न खड़े करके,
चाहा बाधाओं को रखना।
बस अनसुलझे से धागे हैं ये,
मन में जाले बुनता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
कुछ भी सोचे कुछ भी चाहे,
मन ने कब मुश्किल राह चुनी।
भय खाता ये बदलावों से,
इसको तेरी परवाह नहीं।
हर बार है हारा जीवन में,
पछताया इसकी सुन-सुनकर।
कह दे अब तक क्या मिल पाया?
तुझको जीवन में डर-डरकर।
जीवन तो संग्राम है ठहरा,
लड़ने से फिर डरता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
बढ़ चला सफ़र की राह में जो,
हिम्मत की मुट्ठी को बांधे।
बाधाओं की परवाह न कर,
चलता चल तूं डर के आगे।
मंज़िल भी बाहें फैलाकर,
फ़िर तुझको गले लगाएगी।
राहों में बिछी जो शूल तेरे,
फूलों का पथ बन जायेगी।
बाधाओं से ही निखरेगी,
तेरे व्यक्तिव की हर क्षमता।
तूं छोड़ दे डर अब कदम बढ़ा,
पूरी होगी फिर हर मंशा।
आशा है,सपने भी होंगे,
पूरा करने से डरता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
लक्ष्य का पथ आसान कहां,
कहीं कंकड़ है कहीं कीचड़ है।
बिन कष्ट उठाए जीवन में,
पाना कुछ भी अति दुष्कर है।
बिन गूंथे माटी ना चाक चढ़े,
बिन स्वर्ण तपे कुन्दन कैसा?
बिन बाधाओं विपदाओं के
बिन जीत-हार जीवन कैसा?
हर हार तुझे सिखलाएगी,
असफलता से डरता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?

जब भी हम कुछ करना चाहते हैं तो हमारा मन हमें रोकता है। ये हमें डराता है,भ्रमित करता है और हमारे हृदय में शंका का बीज बोता है जिससे हम अपने लक्ष्य पथ से विमुख हो जाएं।एक बात समझ लिजिए कि हमारा मन हमें इन्द्रिय सुखों की ओर भटकता है जैसे-हद से ज्यादा सोना,आराम करना, आलस करना, नए बदलावों से इंकार करना आदि। ये हमें हर उस काम में लगाने की कोशिश करता है जिससे हमारा भला दूर दूर तक न हो सके।इसलिए हमें अपने मन की उन बातों को मानने से इनकार कर देना चाहिए जो हमारे विकास के मार्ग में बाधक हैं।

Whenever we want to do something our mind stops us. It scares us, confuses us and sows the seeds of doubt in our heart due to which we deviate from our target path. Understand one thing that our mind wanders towards physical pleasures like excessive sleeping, resting etc. , being lazy, refusing new changes etc. It tries to involve us in every work which cannot do us any good. Therefore, we should refuse to accept those things in our mind which are obstacles in the path of our development.

मौन(Silence)

कोई व्यंग्य बाण से हो आहत,
पर अधरों पर मुस्कान लिए।
चलता रहता हो अविचल सा,
कड़वी बातों से ज्ञान लिए।
बाधाओं से अविरत लड़कर,
वो ही इतिहास बनाते हैं।
जिनके मुख पर हो मौन सजा,
इक दिन वो पूजे जाते है।
अपमान से हारा कौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
है दो शब्दों का मेल मात्र,
पर अद्भुत क्षमता का श्रोत यही।
जब जुड़ा रहा सद्भावों से,
निर्माण से ओत व प्रोत यही।
यदि मूल छिपी इसके कटुता,
या बैर भाव से हो दूषित।
तब महाविनाश का शस्त्र ये बन,
मानव का नाश कराती है।
जीवन-विनाश इस पर निर्भर,
किस भाव ने धारा मौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो गरजे ना बरसे बादल,
जो बरसे ना गरजे बादल।
जब मुख से फूटे शब्द ध्वनि,
संकल्प के पांव करे घायल।
निज भावों से उपर उठकर,
कुछ करके जो दिखलाते हैं।
जिनके मुख पर हो मौन सजा,
एक दिन वो पूजे जाते हैं।
दुर्भाव से हारा कौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
प्रायः ऐसा ही होता है,
मुख करते हैं आघात यहां।
दूजे के हिय की पीड़ा का,
किसको होता आभास यहां?
खल को ना अपने कर्म खले,
ना अपने कल की हो चिन्ता।
बस प्राण बसे अपकार में ही,
मुख से करते विष की वर्षा।
उपहास-अपमान के बाणों से,
हो घायल जो मुस्काते हैं।
जिनके मुख पर हो मौन सजा,
एक दिन वो पूजे जाते हैं।
कटु शब्द से हारा कौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?

मौन में बड़ी शक्ति होती है। हम जब अपनी भावनाओं को दबाते है अर्थात् प्रर्दशित नहीं करते हैं तो उसमें अपार शक्ति संचित हो जाती है। जिसका उपयोग आप चाहें तो निर्माण के लिए करें अथवा विनाश के लिए, यह आप पर निर्भर है। उदाहरण के लिए जैसे कोई आपका अपमान करता है;आपको नीचा दिखाता है तो आपके पास उसे प्रतुत्तर देने के दो विकल्प हैं। पहला उसे तुरन्त प्रत्युत्तर देकर अर्थात् अपमान के बदले अपमान करके और दूसरा उसे भविष्य में निरुत्तर करके। आप भविष्य में अपना जवाब भी उसे दो तरीकों से दे सकते हैं। पहला भविष्य में उससे अपने अपमान का बदला लेकर अर्थात् उसे कष्ट पहुंचाकर और दूसरा अपने कर्मों से उसकी बोलती बन्द कराके।यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने अपमान के बदले उसका अहित करते हैं या अपनी सफलता से उसे गलत साबित करके उससे बदला लेते हैं। यदि आप उसका बुरा करेंगे तो आप खुले तौर पर उसे अपना दुश्मन बना लेंगे जो आपको हानि पहुंचाने का प्रयत्न करेगा और इससे आपका चरित्र भी दुष्प्रभावित होगा फिर आप भी उसकी ही तरह बन जायेंगे। या फिर इसके ठीक विपरीत आप अपनी उपलब्धियों से; अपनी सफलता से उसे प्रतुत्तर दे सकते हैं। जिससे वह स्वयं ही लज्जित हो जायेगा और अगली बार आपसे दुबारा दुर्व्यवहार नहीं करेगा। चयन आपका है कि आप अपमान के बदले अपमान करते हुए अपनी सज्जनता का नाश करते हैं या अपने कर्मों से ऐसे लोगों को निरुत्तर करते हैं। विचार अवश्य कीजिए।

There is great power in silence. When we suppress our emotions, that is, do not show them, immense power gets accumulated in it. Whether you want to use it for construction or destruction, it is up to you. For example, if someone insults you or puts you down, you have two options to respond to him. First by giving him immediate response i.e. by insulting him in return for insult and secondly by leaving him speechless in the future. You can also give your answer to him in two ways. First by taking revenge of your insult from him in the future by causing him pain and second by making him stop speaking through your actions. It depends on you whether you harm him in return for your insult or take revenge from him by proving him wrong with your success. . If you do bad to him then you will openly make him your enemy who will try to harm you and this will affect your character also and then you too will become like him. Or just the opposite, with your achievements; You can respond to him with your success. Due to which he himself will feel embarrassed and will not misbehave with you again next time. The choice is yours whether you destroy your gentlemanly self by giving insult for insult or render such people speechless with your actions. Please think about it.

जय(Victory)

जय एक दिवस की बात नहीं,
वर्षों का अथक परिश्रम है।
संकल्पों की ये गाथा है,
संघर्ष भरा इक जीवन है।
जय एक दिवस की बात नहीं,
वर्षो का अथक परिश्रम है…..।
हां विजय स्वप्न को लक्ष्य बना,
मानव जब जग से लड़ता है।
तब ही जयघोष स्वर्ण मुकुट,
योद्धा के सिर पर सजता है।
पर ये पथ भी आसान कहां,
जितना गाथाएं सुन लगता।
बाधाओं से टकराए बिन,
इस जग में कहां कुछ भी मिलता।
जय एक दिवस की बात नहीं,
वर्षो का अथक परिश्रम है।
संकल्पों की ये गाथा है,
संघर्ष भरा इक जीवन है।
जब भी कोई संकल्प करे,
अपने ही पथ भटकाते है।
कभी बहलाकर-कभी समझाकर,
कभी भय से रह भुलाते है।
गर साथ भी दे दें अपने तो,
औरों से लड़ना पड़ता है।
लोगों की पैनी बातों से,
पल-प्रतिपल बचना पड़ता है।
जो शंकाओं,उपहासों के,
काटों को मन में बोते हैं।
बच कर रहना उन लोगों से,
जो वास्तव में शत्रु होते हैं।
यदि पार हो चुकी हर विपदा,
तो दर्पण में खुद को देखो।
जो देख रहा है अब तुमको,
वो अब आखिर की बाधा है।
जय एक दिवस की बात नहीं,
वर्षो का अथक परिश्रम है।
संकल्पों की ये गाथा है,
संघर्ष भरा इक जीवन है।
अब बात है अन्त समस्या की,
खुद से ही खुद लड़ना होगा।
खुद के मन के बहकावे से,
हर पल तुमको बचना होगा।
सुख में तुमको भटकाएगा,
आलस की राह दिखायेगा।
ये कष्टों से डर बोलेगा,
अब तुमसे ना हो पाएगा।
इससे लड़ना आसान नहीं,
मन हर क्षण पथ भटकता है।
जिसने साधा अपने मन को,
निश्चित ही जय कर जाता है।
जय एक दिवस की बात नहीं,
वर्षो का अथक परिश्रम है।
संकल्पों की ये गाथा है,
संघर्ष भरा इक जीवन है।

Victory is not a matter of one day,it is years of tireless work.This is a story of resolutions, a life full of struggle. Victory is not a matter of one day, it is years of tireless hard work… Yes, victory becomes the goal of dreams when a person fights with the world. Only then does the golden crown of victory adorn the warrior’s head. But isn’t this path easy, no matter how many stories you hear? It seems. Where can anything be achieved in this world without hitting obstacles. Victory is not a matter of one day, it is years of tireless hard work. This is a saga of resolutions, a life full of struggle. Whenever someone makes a resolution, his own people start diverting him from the path. Sometimes by coaxing, sometimes by convincing, sometimes by scaring him, he is asked to forget his goal. Even if we support ourselves, we have to fight with others. We have to avoid sharp words from people at every moment. People who sow doubt in the mind, ridicule others, sow thorns in the mind. Stay away from those people who are actually my real enemies. If you have overcome every adversity, then look at yourself in the mirror. The one who is looking at you now is the last hurdle. Jai, it is not a matter of one day, it is years of tireless work. This is a story of resolutions, a life full of struggle. Now coming to the last problem, you will have to fight with yourself. From the illusion of one’s own mind. , you have to survive every moment. It will lead you astray in happiness, it will show you the path of laziness. It will make you afraid of pain, you will not be able to handle it anymore. It is not easy to fight this, the mind wanders every now and then. For a moment the person forgets his path. He who corrects his mind definitely wins. Victory is not a matter of one day, it is years of tireless hard work. This is a story of resolutions and struggle. It is a complete life.

प्रकृति हमें सिखाती है(Nature teaches us)

प्रकृति अर्थात् मां;जो जन्म देती है,सृजन है या यूं कहें कि हमें पालती है,हमारा भरण पोषण करती है।जैसे मां अपने बच्चे को 9 महीने अपने गर्भ में धारण करती है और उसका ख्याल रखती है,वैसे ही प्रकृति भी हमें चारों ओर से घेरे हुए ;अपने भीतर धारण किए हुए है। पर मां सिर्फ़ अपने बच्चे का ख्याल ही नहीं रखती बल्कि उसे शिक्षित भी करती है उसे सही और गलत का पाठ भी पढ़ाती है।ठीक उसी प्रकार प्रकृति भी हमें सिखाने का प्रयास करती है।प्रकृति ज्ञान का भण्डार है,इसमें अनेकों सजीव और निर्जीव वास करते हैं। किन्तु हमें सबसे कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। जिनमें सबसे पहली और बड़ी सीख है निस्वार्थ सेवा भावना। सूर्य,चन्द्रमा,धरती, आकाश, हवा, नदियां,पहाड़,पेड़-पौधे आदि सभी निस्वार्थ सेवा भाव रखते हैं। इन्होंने आज तक हमसे अपने लिए कुछ भी नहीं मांगा बल्कि हमें सदैव केवल दिया ही है।पेड़ों ने अपने फल नहीं खाएं,नदियों ने अपना पानी नहीं पिया,सूर्य और चंद्रमा अपना प्रकाश स्वयं नहीं लेते। इन्होंने अपने लिए कभी भी कुछ भी नहीं रखा। अब यहीं से दान और परोपकार की भावना का जन्म होता है।इसी प्रकार धरती से हमें धैर्य और सहनशक्ति तथा आकाश से विशाल हृदय बनने की सीख मिलती है। पहाड़ों से दृढ़ निश्चय और लक्ष्य से विचलित न होने तथा नदियों से हमें समानता की शिक्षा मिलती है।सूर्य हमें नियमितता और निरंतरता की शिक्षा तो देता ही है साथ ही साथ हमें दूसरों को सही राह दिखाना भी सिखाता है। चन्द्रमा से हमें बुरे समय व निराशा में मन को शान्त रखने और चींटी से अथक परिश्रम की शिक्षा मिलती है। ऐसे ही प्रकृति में हर किसी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है। ज़रूरत है बस उसे समझने की,उसे महसूस करने की। इसलिए प्रकृति को समझने और उससे जुड़ने का प्रयास करें उसे मिटाने का नहीं।

Nature means mother; who gives birth, creates or can say that nurtures us. Just like a mother carries her child in her womb for 9 months and takes care of him, similarly nature also surrounds us. Surrounded from all sides and holding it within itself. But the mother not only takes care of her child but also educates him, teaches him the lesson of right and wrong. In the same way, nature also tries to teach us. Nature is a storehouse of knowledge, there are many living and non-living things in it. We do. But we get to learn something from everyone. The first and biggest lesson in which is the spirit of selfless service. Sun, moon, earth, sky, air, rivers, mountains, trees and plants etc. all have selfless service. He has not asked us for anything till today, but has always given us only. Trees do not eat their fruits, rivers do not drink their water, sun and moon do not take their own light. He never kept anything for himself. Now it is from here that the spirit of charity and charity is born. Similarly, we learn patience and tolerance from the earth and a big heart from the sky. From the mountains we learn determination and not to be distracted from the goal and from the rivers we learn commonality. Sun not only teaches us regularity and continuity but also teaches us to show the right path to others. From the moon, we learn to keep our mind calm in bad times and despair, and from the ant we learn to work tirelessly. Similarly in nature one gets to learn something or the other from everyone. You just need to understand it, feel it. That’s why try to understand nature and connect with it, not to destroy it.

कुछ लिखते हैं(Let’s write something)

चल कलम उठा कुछ लिखते हैं। कुछ मन की बातें लिखते हैं। कुछ गुज़रे कल,कुछ बीते पल, जो होंगे कल की लिखते हैं। चल कलम उठा कुछ लिखते हैं। कुछ मन की बातें लिखते हैं। जब लिखने का मैंने सोचा। था मन पर भारी बोझ लदा। कुछ जो बीती अपने दिल पर। कुछ किए का था अफ़सोस लदा। जो लिया-दिया इस जीवन में। अगर चाहूं उभरे इस दिल पर है। जब भी पड़ती हैं आंखे तो। बस कोरे पन्ने दिखते हैं-2। चल कलम उठा कुछ लिखते हैं। कुछ मन की बातें लिखते हैं। हां अध्याय नहीं मेरा जीवन। जो कोई पथ अनुगामी हो। पर व्यर्थ नहीं सब कुछ इसमे। जो लिखे शब्द निष्कामी हों। फिर भी कुछ कोशिश करनी है। दे सकूं किसी को कुछ ऐसा। एक नई सुबह एक नई किरण। सपने जो सचमुच दिखते हैं। चल कलम उठा कुछ लिखते हैं। कुछ मन की बातें लिखते हैं।

Let’s pick up the pen and write something. Some write what is on their mind. Some yesterday passed, some past moments, which will happen tomorrow, they write. Let’s pick up the pen and write something. Some write what is on their mind. When I thought of writing, There was a heavy burden on my mind. My heart was filled with regret for something I had done in the past. Whatever was given in this life, If I want, it is on this heart. Whenever my eyes fall, I see only blank pages-2. Let’s pick up the pen, write something. Write the words of the mind. Yes chapter no my life. Someone who follows the path. But not everything in this is in vain. The words that are written should be useless. Still have to try something. I can give something like this to someone. A new dawn,a new ray of hope. Dreams that come true. Let’s pick up the pen, write something. Write the words of the mind.

युद्धक्षेत्र(Battlefield)

ना डर ​​तू उठ महारथी चुनौतियां पुकारती।
यहां न कृष्ण-पार्थ हैं स्वयं ही है तू सारथी।
विपत्तीयों के अंध को तू चीरता प्रकाश है।
है संशयों का स्थान क्या तू ही स्वयं विश्वास है।
हो भय भले सफल न हो विफल भी हो तो दुख नहीं।
जो थे हुए महान हैं प्रथम कोई सफल नहीं।
है कर्म तेरे हाथ में प्रयास कर प्रयास कर।
कि लक्ष्य प्राप्ति ध्येय हो न और कुछ विचार कर।
समय-2 की बात है तेरा कभी मेरा कभी।
ये गूढ़ तथ्य ज्ञान का भला किसे पता नहीं।
जीवन यह है युद्ध क्षेत्र व कर्म अस्त्र-शस्त्र हैं।
विचारता है क्यों भला यही तो मूल मंत्र है।
भले सगे हों या कोई;तेरा कोई सगा नहीं।
विपत्तियों के होड़ में तू एक संग कोई नहीं।
राह तेरी है कठिन व सामने पहाड़ है।
तू भय न खा कदम बढ़ा गगन सा तू विशाल है।
ना धीर तज निराश हो थका नहीं तू हारकर।
हां वीर है सशस्त्र तूं कि लक्ष्य पर प्रहार कर।

“चुनौतियां हमारे जीवन के सफलता का आधार हैं। ये हमें सुदृढ़ बनाते हुए हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं। इस धरती पर जितने भी प्रसिद्ध या महान विभूतियां हुईं हैं सभी ने अपने जीवन में चुनौतियों को स्वीकारा और महानतम उपलब्धियां हासिल की हैं।”