प्रतिरोध(Resistance)

व्यक्ति का सरल व शान्त होना भी एक अपराध ही है।सच ही कहा गया है,आप हर किसी के साथ अच्छे नहीं हो सकते।कभी-कभी प्रतिरोध करना भी आवश्यक होता है।क्योंकि विद्युत धारा का प्रवाह भी उसी परिपथ में अधिक सरलता से होता है,जिसका प्रतिरोध अन्य परिपथों की तुलना में अपेक्षाकृत कम होता हैं। इसलिए खुद को इतना भी सस्ता न बनाएं कि कोई भी आए और खेल जाए।

It is also a crime for a person to be simple and calm. It is true that you cannot be nice with everyone. Sometimes resistance is also necessary. Because the flow of electric current also happens more easily in the same circuit, whose resistance is relatively less as compared to other circuits. So don’t make yourself so cheap that just anyone can come and play.

खुद को दिल से अपनाना बहुत मुश्किल है (It’s very difficult to accept yourself wholeheartedly)

किसी को माफ़ करना आसान है लेकिन, खुद को मन से स्वीकारना बहुत मुश्किल। 

हमारे आस-पास कुछ लोग होते हैं ।कुछ अपने,कुछ पराए,कुछ दोस्त,तो कुछ दुश्मन; लेकिन मानो अगर किसी से कोई गलती हो जाए। जिससे आपका जीवन बुरी तरह प्रभावित होता हो,तो आप क्या करेंगे? उससे बदला लेंगे या उसे सजा देंगे। कुछ लोग ऐसा ही करते हैं ,पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो दूसरों को गलतियों पर उन्हें माफ करने का जिगर रखते हैं। पर दूसरों को माफ़ करना हिम्मत का ही सही पर उतना मुश्किल काम नहीं है, जितना खुद की गलतियों पर खुद को ही दिल से माफ़ करना और खुद को स्वीकार करना।”खुद को माफ़ करना “यह एक बहुत बड़ी बात होती है। ये जितना सुनने में और कहने में आसान लगता है, उससे कहीं ज्यादा कठिन कार्य है। अब आप सोचेंगे कि ख़ुद को माफ़ करना ये तो बहुत ही आसन काम है,लेकिन मै कहूंगा “जी बिल्कुल नहीं”।क्या आपने; अपने जीवन में कुछ ऐसा काम किया है, कोई ऐसी गलती; जिसने आपकी ज़िंदगी का रुख ही बदल कर रख दिया हो।कुछ ऐसा जिसे याद करके आपको पछतावा होता है कि काश मुझसे ये गलती न हुई होती।सभी ने अपने जीवन में कोई न कोई ऐसा काम ज़रूर किया होता है।कोई ऐसी गलती या कोई चूक की होती है ,जिसका उसको जीवन भर पछतावा होता रहता है।अब ख़ुद से पूछिए आपको उस गलती की याद बार बार आ रही है या नहीं।अगर जवाब “नहीं”है तो मुबारक हो आप खुद को माफ़ कर चुके हैं और अगर आपका जवाब “हां” में है। आपको अपनी की हुई गलती बार बार याद आ रही है तो आपको खुद को दिल से माफ़ करने की जरूरत है पर बात यहां ही नहीं खत्म होती।एक बात और है जो मैं आपसे कहना चाहता हूं।आज समाज एक नई तरह की समस्या से जूझ रहा है, और वो है खुद की कमियों को स्वीकार न करना या खुद को खुद की कमियों के साथ स्वीकार न करना। अगर आप अपनी कमियों और गलतियों को दिल से नहीं स्वीकारते हैं तो आप उनसे सीख लेकर कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। कभी-कभी यह समस्या व्यक्तिगत अहंकार से जुड़ी होती है।लेकिन हम यहां उसकी बात नहीं कर रहे।हम बात कर रहे हैं।खुद को खुद की ही कामियों के साथ स्वीकारने की ,जो की अत्यन्त ही दुष्कर कार्य है।यह कमियां शारीरिक, मानसिक या व्यवहारिक किसी भी प्रकार ही हो सकती हैं।हो सकता है आपके अन्दर कोई जन्मजात दोष जैसे-तोतलापन,किसी भी प्रकार ही विकलांगता या फ़िर आपका व्यवहार।हो सकता है आप अन्य लोगों का जल्द ही यकीन कर लेते हैं इसलिए आप जल्दी धोखा खा जाते है।आपके व्यवहार से दूसरों को तो लाभ होता है पर आप हमेशा लोगों की चालाकी और षड्यंत्रों का शिकार हो जाते हैं। लेकिन ये जरूरी नहीं कि आपके साथ ये समस्या जन्मजात ही हो या वास्तव में यह कोई समस्या भी हो।यह आपके मानने पर निर्भर है।अगर मानवीय व्यवहार ही बात करें तो अगर कोई व्यक्ति सीधा है तो यह कोई दोष नहीं है। अपने इस व्यवहार के कारण अगर कोई परेशान है तो उसे बस यह समझने की आवश्यकता है कि हर व्यक्ति के साथ आप अच्छे नहीं हो सकते। यदि आप मे कोई शारीरिक या मानसिक दोष हैं तो इसके लिए रोने या पछताने की आवश्यकता नहीं है।मेरी बातें कड़वी लग सकती हैं, पर आप खुद सोचिए कि किसी भी कमी या दोष या किसी गलती पर यूं ही जीवन रोने और पछताने से कुछ होता है भला । इस चार दिनों की जीवन यात्रा को यदि रोते, पछताते बितायेंगे तो आपने जीवन कब जिएंगे?इसलिए यदि जीवन में आपको आगे हंसते-मुस्कुराते बढ़ना है तो खुद को खुद की कमियों के साथ स्वीकारिए और अपनी गलतियों के लिए खुद को माफ़ करते हुए आगे बढ़ते रहिए, नहीं तो सारा जीवन बस रोने में ही चला जाएगा और आप अपने जीवन में जो कुछ भी पाना चाहते हैं;आप उसे मिलने से पहले ही खो देंगे। इसलिए खुद और खुद के जीवन का सम्मान करें उसका अपमान नहीं क्योंकि ईश्वर ने जो कुछ भी इस धरती पर सृजन करके भेजा है, वो सर्वोत्तम है और यदि आपको कुछ कमी लग रही हो तो एक सत्य जान लीजिए कि इस संसार में ऐसा कुछ भी नहीं जिसमें बेहतर बनने की गुंजाइश न हो।

आलोचना (Criticism)

ज़िंदगी भर एक बात हमेशा याद रखना, जो तुम्हारी बुराई करे उसे हमेशा साथ रखना।

Always remember one thing throughout your life, always keep the one who criticise you with you.

हर इन्सान को अपनी तारीफ़ अच्छी लगती है। दुनियां में ऐसा कोई भी नहीं जिसे तारीफ़ से तकलीफ हो भले ही वो तारीफ झूठी ही क्यों न हो। मगर जब कोई आपकी बुराई करता है और आप में कमियां निकालता है।तब आपको बुरा लगता है और आप अपना मन मसोस कर रह जाते हैं। अगर आप उसे करारा जवाब दे सकने लायक हैं, तो आप वैसा ही करते हैं और अगर नहीं तो आप उसे मन ही मन गालियां देते हैं। पर क्या आपको पता है कि आपके जीवन में कुछ ऐसे ही लोग होने ही चाहिएं जो आपको;आपकी कमियां दिखा सकें।बात बात पर आपमें नुक्स निकालने वाला हर इन्सान आपका दुश्मन ही नहीं आपका दोस्त भी हो सकता है। आपको आईना दिखाने वाला शख्स बस आपको;आपकी सही तस्वीर दिखाए, फ़र्क नहीं पड़ता कि वो आपका दोस्त है या दुश्मन। कभी कभी हम अपनी कमियों को पहचान नहीं पाते और कभी कभी तो हमें एहसास ही नहीं होता कि हममें कोई कमी भी है। ऐसे शख्स से आपको ये फ़ायदा होता कि आपको ;अपनी कमियों को ढूंढना नहीं पड़ेगा। बल्कि कोई है, जो आपके लिए यह काम खुद कर रहा है। इससे आपकी शक्ति भी बचेगी, जिसे आप ख़ुद को तराशने में लगा सकते हैं। मगर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं,जो आपमें यूं ही नुक्स निकालते रहते हैं।उनकी बातों का कोई सिर-पैर नहीं होता। पर उनकी बातों को भी कभी नज़रंदाज़ न करें। उनकी बातें अर्थपूर्ण भी हो सकती हैं। यदि उनकी बातों में थोड़ी भी सच्चाई है तो आपको ख़ुद को निखारने का एक और मौका मिल जायेगा और अगर नहीं है तो आपका उत्साह बढ़ जायेगा,क्योंकि लोग बस उसी का रास्ता काटते हैं ,जो तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ रहा होता है। इसलिए ऐसे लोगों को वरदान मानिए जो आपको आईना दिखाकर, आपको संवारने में मदद कर सकते हैं और साथ ही साथ आपको बेहतर से बेहतरीन बन सकते हैं।

Every person likes to be praised. There is no one in the world who is hurt by praise, even if the praise is false. But when someone speaks ill of you and finds faults in you, then you feel bad and feel sad. If you are capable of giving him a befitting reply, you do so and if not, you abuse him in your mind. But do you know that there should be some people in your life who can show you your shortcomings. The person who finds faults in you in every conversation can be not only your enemy but also your friend. The person who shows you the mirror just shows you the true picture of you, it does not matter whether he is your friend or your enemy. Sometimes we are unable to recognize our shortcomings and sometimes we do not even feel that we have any shortcomings. You would benefit from such a person that you would not have to look for your shortcomings. Rather, there is someone who is doing this work for you himself. This will also save your energy, which you can use in carving yourself. But there are some people who keep finding faults in you. Their words have no basis. But never ignore their words either. His words may also be meaningful. If there is even a little truth in what they say then you will get another chance to improve yourself and if not then your enthusiasm will increase, because people only cross the path of those who are moving forward on the path of progress. Therefore, consider it a blessing to have such people who can show you a mirror and help you in grooming you and at the same time can help you become the best of the best.

अपनी गलतियों के लिए दूसरों को दोष देना बन्द करें(Stop blaming others for your mistakes)

हमारी एक बुरी आदत है।जब भी हमारे साथ कुछ गलत होता है,तो हम उसका दोष किसी दुसरे पर मढ़ देते हैं। जबकि हमें यह समझना जरूरी है कि हमारे साथ जो कुछ भी गलत हो रहा है,उसके जिम्मेदार हम स्वयं ही हैं। अगर कोई हमारा फ़ायदा उठाने की कोशिश करता है, तो इसके मतलब ये नहीं कि वो ही गलत है। अगर हम किसी को मौका ही न दे,तो भला हमारा कोई फायदा कैसे उठा सकता है? अगर हमें कोई धोखा देता है तो इसका मतलब बस ये है कि हम सजग नहीं थे। इसलिए अपने साथ जो भी कुछ गलत हो रहा है,उसके लिए किसी दुसरे को दोषी न ठहराना बन्द करें और अपने द्वारा की गई लापरवाही और गलतियों की जिम्मेदारी स्वयं लें।

सच्ची सीख(True lesson)

मुफ़्त में मिले ज्ञान को लोग उपदेश समझते हैं और उपदेश अक्सर भुला दिए जाते है।लेकिन वही ज्ञान जब पैसों से खरीदा जाए तो इन्सान उसे ज़िंदगी भर याद रखने की कोशिश करता है

जो दोगे वही पाओगे(You get what you give)

जो हम दूसरों से अपने लिए चाहते हैं, हमें वो दूसरों को पहले देना पड़ेगा। तब जाकर हम उस लायक बन पाएंगे, कि किसी से कोई उम्मीद कर सकें।

What we want from others for ourselves, we have to give to others first. Only then will we be able to become worthy enough to have expectations from anyone.

हमारी एक बुरी आदत है कि हम अपने लिए दूसरों से अच्छे बर्ताव की उम्मीद करते हैं। हम चाहते हैं कि कोई हमारे बुरे वक्त में हमारा साथ दे और हमारी मदद करे। हमारा सम्मान करे, हमसे प्रेम करे, हमारी कमियों के साथ हमें अपनाए और हमारी बड़ी से बड़ी गलतियों पर हमें माफ़ भी कर दे। लेकिन क्या दूसरों को भी हमसे यही उम्मीद रखने का हक है? हम दूसरों में तो लाखों कमियां निकलते हैं।लेकिन क्या हमने खुद की खामियों पर कभी गौर किया है? अगर किसी से हमें वो नहीं मिल पाता जो हम उससे अपने लिए चाहते हैं तो वो हमारी निगाह में बुरा बन जाता है। लेकिन हमने उसके लिया क्या किया है, इस बात से हमें कोई भी मतलब नहीं है। हम ये बात भूल जाते हैं कि हम दूसरों को जो देते हैं वही दूसरों से पाते हैं। हम दूसरों को जो दे नहीं सकते वो हमें उनसे पाने की उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए।

One of our bad habits is that we expect good behavior from others. We want someone to support and help us in our bad times. Respect us, love us, accept us with our shortcomings and forgive us even our biggest mistakes. But do others also have the right to expect the same from us? We find millions of shortcomings in others. But have we ever noticed our own shortcomings? If we are not able to get what we want from someone then he becomes bad in our eyes. But we don’t care what we have done for him. We forget that what we give to others is what we get from others. What we cannot give to others, we should not expect to get from them.

मौन(Silence)

कोई व्यंग्य बाण से हो आहत,
पर अधरों पर मुस्कान लिए।
चलता रहता हो अविचल सा,
कड़वी बातों से ज्ञान लिए।
बाधाओं से अविरत लड़कर,
वो ही इतिहास बनाते हैं।
जिनके मुख पर हो मौन सजा,
इक दिन वो पूजे जाते है।
अपमान से हारा कौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
है दो शब्दों का मेल मात्र,
पर अद्भुत क्षमता का श्रोत यही।
जब जुड़ा रहा सद्भावों से,
निर्माण से ओत व प्रोत यही।
यदि मूल छिपी इसके कटुता,
या बैर भाव से हो दूषित।
तब महाविनाश का शस्त्र ये बन,
मानव का नाश कराती है।
जीवन-विनाश इस पर निर्भर,
किस भाव ने धारा मौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो गरजे ना बरसे बादल,
जो बरसे ना गरजे बादल।
जब मुख से फूटे शब्द ध्वनि,
संकल्प के पांव करे घायल।
निज भावों से उपर उठकर,
कुछ करके जो दिखलाते हैं।
जिनके मुख पर हो मौन सजा,
एक दिन वो पूजे जाते हैं।
दुर्भाव से हारा कौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
प्रायः ऐसा ही होता है,
मुख करते हैं आघात यहां।
दूजे के हिय की पीड़ा का,
किसको होता आभास यहां?
खल को ना अपने कर्म खले,
ना अपने कल की हो चिन्ता।
बस प्राण बसे अपकार में ही,
मुख से करते विष की वर्षा।
उपहास-अपमान के बाणों से,
हो घायल जो मुस्काते हैं।
जिनके मुख पर हो मौन सजा,
एक दिन वो पूजे जाते हैं।
कटु शब्द से हारा कौन यहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?
जो मौन रहा वो मौन कहां?

मौन में बड़ी शक्ति होती है। हम जब अपनी भावनाओं को दबाते है अर्थात् प्रर्दशित नहीं करते हैं तो उसमें अपार शक्ति संचित हो जाती है। जिसका उपयोग आप चाहें तो निर्माण के लिए करें अथवा विनाश के लिए, यह आप पर निर्भर है। उदाहरण के लिए जैसे कोई आपका अपमान करता है;आपको नीचा दिखाता है तो आपके पास उसे प्रतुत्तर देने के दो विकल्प हैं। पहला उसे तुरन्त प्रत्युत्तर देकर अर्थात् अपमान के बदले अपमान करके और दूसरा उसे भविष्य में निरुत्तर करके। आप भविष्य में अपना जवाब भी उसे दो तरीकों से दे सकते हैं। पहला भविष्य में उससे अपने अपमान का बदला लेकर अर्थात् उसे कष्ट पहुंचाकर और दूसरा अपने कर्मों से उसकी बोलती बन्द कराके।यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने अपमान के बदले उसका अहित करते हैं या अपनी सफलता से उसे गलत साबित करके उससे बदला लेते हैं। यदि आप उसका बुरा करेंगे तो आप खुले तौर पर उसे अपना दुश्मन बना लेंगे जो आपको हानि पहुंचाने का प्रयत्न करेगा और इससे आपका चरित्र भी दुष्प्रभावित होगा फिर आप भी उसकी ही तरह बन जायेंगे। या फिर इसके ठीक विपरीत आप अपनी उपलब्धियों से; अपनी सफलता से उसे प्रतुत्तर दे सकते हैं। जिससे वह स्वयं ही लज्जित हो जायेगा और अगली बार आपसे दुबारा दुर्व्यवहार नहीं करेगा। चयन आपका है कि आप अपमान के बदले अपमान करते हुए अपनी सज्जनता का नाश करते हैं या अपने कर्मों से ऐसे लोगों को निरुत्तर करते हैं। विचार अवश्य कीजिए।

There is great power in silence. When we suppress our emotions, that is, do not show them, immense power gets accumulated in it. Whether you want to use it for construction or destruction, it is up to you. For example, if someone insults you or puts you down, you have two options to respond to him. First by giving him immediate response i.e. by insulting him in return for insult and secondly by leaving him speechless in the future. You can also give your answer to him in two ways. First by taking revenge of your insult from him in the future by causing him pain and second by making him stop speaking through your actions. It depends on you whether you harm him in return for your insult or take revenge from him by proving him wrong with your success. . If you do bad to him then you will openly make him your enemy who will try to harm you and this will affect your character also and then you too will become like him. Or just the opposite, with your achievements; You can respond to him with your success. Due to which he himself will feel embarrassed and will not misbehave with you again next time. The choice is yours whether you destroy your gentlemanly self by giving insult for insult or render such people speechless with your actions. Please think about it.

सुकून(Inner Peace)

यहां हूं दर बदर भटका मैं तेरी चाह में लेकिन, न तेरा अक्स ही देखा न तेरी आहटें पाईं। भटकता चाह में तेरी कहीं तो पा सकूं तुझको, मगर मैं ही नहीं हर शख्स तुझको ढूंढता होगा।

Here I have wandered from place to place in search of you, but neither have I seen your reflection nor found your voice. I wander longing for you, I wish I could find you somewhere, but not only I, but every person must be searching for you.

हम दुनिया की चकाचौंध में खोए रहते हैं और बाहर खुशियों की तलाश करते हैं जिससे हमें सुकून मिल सके; शांति मिल सके। लेकिन हम जब भी खुद को दूर से देखते हैं , तो खुद को अकेला पाते हैं। सच कहें तो असली सुकून बाहर नहीं खुद के दिल के भीतर होना चाहिए। लेकिन इसी सुकून की तलाश में हम ज़िंदगी भर बाहर भटकते रहते हैं।

We remain lost in the glamor of the world and look for happiness outside which can give us peace. But whenever we look at ourselves from a distance, we find ourselves alone. To be honest, real peace should not be outside but within one’s own heart. But in search of this peace we keep wandering outside throughout our lives.

कवि की रचनाएं(Poet’s Creations)

गगन-धरा को एक करे जो,
मरू;सागर से भर लाए।
निर्जन में भी प्राण फूंक दे,
ऐसी कवि की रचनाएं।
हैं ऐसी कवि की रचनाएं ।
शब्दों को लय में जो गूंथे,
भावों का जो सार भरे।
जीवन को प्रकृति से जोड़े,
मानव मन की सृष्टि करे।
शोक के सागर में डूबे की,
तत्क्षण हरती विपदायें।
निर्जन में भी प्राण फूंक दे,
ऐसी कवि की रचनाएं।
हैं ऐसी कवि की रचनाएं।
राजसभा या रंगमंच,
या युद्धक्षेत्र की रणभेरी।
परमप्रभु का भक्तिनाद,
या निर्धन जन की हो डेरी।
प्रतिक्षण-प्रतिपल स्थिति विशेष में,
भिन्न भिन्न यह रूप धरे।
मानव मन में शौर्य,प्रेम
और भक्ति का संचार करे।
रण का भीषण दृश्य दिखाए,
हरि दर्शन भी करवाए।
निर्जन में भी प्राण फूंक दे,
ऐसी कवि की रचनाएं।
हैं ऐसी कवि की रचनाएं ।
कई रसों से व्याप्त काव्य,
यह शिव ताण्डव कहलाता है।
कभी वीर रस में डूबा,
महाराणा प्रताप बन जाता है।
भक्ति रस से सराबोर हो,
ये तुलसी-मीरा-सूर बने।
कभी कृष्ण के प्रेम में डूबा,
राधा का यह रूप धरे।
कभी धरे श्रृंगार रूप तो,
सिया-राम बन जाता है।
कभी कथाओं का माध्यम ले,
रामायण भी कहलाता है।
पग-पग,नव-नव वेष ये धारे,
जन जीवन को सिखलाए।
निर्जन में भी प्राण फूंक दे,
ऐसी कवि की रचनाएं।
हैं ऐसी कवि की रचनाएं ।

कविताओं और कहानियों का हमारे जीवन में सदैव से ही विशेष स्थान रहा है। चाहे वो बचपन में दादा-दादी से सुनी हुई कहानियां हों या किताबों में छपी हुई कविताएं। ये कवियों और लेखकों की रचनाएं ही तो हैं, जो हमारे मन को कल्पनाओं और भावनाओं से भर देती हैं। इन्हें पढ़ते ही हमारा मन कल्पनाओं से सागर में गोते लगाना शुरू कर देता है। ये कल्पनाओं के साथ साथ जीवन की वास्तविकताओं से तो हमारा परिचय कराती ही हैं।साथ ही साथ हमारे भीतर प्रेम, उत्साह,साहस,भक्ति आदि भावनाओं को जगाते हुए हमारा मार्गदर्शन भी करती हैं।

सहारा(Support)

“If the crutches are not destined, then they cannot take the traveler far with their support. Those who want to reach their destination have to decide their own path.”