प्रतिरोध(Resistance)

व्यक्ति का सरल व शान्त होना भी एक अपराध ही है।सच ही कहा गया है,आप हर किसी के साथ अच्छे नहीं हो सकते।कभी-कभी प्रतिरोध करना भी आवश्यक होता है।क्योंकि विद्युत धारा का प्रवाह भी उसी परिपथ में अधिक सरलता से होता है,जिसका प्रतिरोध अन्य परिपथों की तुलना में अपेक्षाकृत कम होता हैं। इसलिए खुद को इतना भी सस्ता न बनाएं कि कोई भी आए और खेल जाए।

It is also a crime for a person to be simple and calm. It is true that you cannot be nice with everyone. Sometimes resistance is also necessary. Because the flow of electric current also happens more easily in the same circuit, whose resistance is relatively less as compared to other circuits. So don’t make yourself so cheap that just anyone can come and play.

खुद को दिल से अपनाना बहुत मुश्किल है (It’s very difficult to accept yourself wholeheartedly)

किसी को माफ़ करना आसान है लेकिन, खुद को मन से स्वीकारना बहुत मुश्किल। 

हमारे आस-पास कुछ लोग होते हैं ।कुछ अपने,कुछ पराए,कुछ दोस्त,तो कुछ दुश्मन; लेकिन मानो अगर किसी से कोई गलती हो जाए। जिससे आपका जीवन बुरी तरह प्रभावित होता हो,तो आप क्या करेंगे? उससे बदला लेंगे या उसे सजा देंगे। कुछ लोग ऐसा ही करते हैं ,पर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो दूसरों को गलतियों पर उन्हें माफ करने का जिगर रखते हैं। पर दूसरों को माफ़ करना हिम्मत का ही सही पर उतना मुश्किल काम नहीं है, जितना खुद की गलतियों पर खुद को ही दिल से माफ़ करना और खुद को स्वीकार करना।”खुद को माफ़ करना “यह एक बहुत बड़ी बात होती है। ये जितना सुनने में और कहने में आसान लगता है, उससे कहीं ज्यादा कठिन कार्य है। अब आप सोचेंगे कि ख़ुद को माफ़ करना ये तो बहुत ही आसन काम है,लेकिन मै कहूंगा “जी बिल्कुल नहीं”।क्या आपने; अपने जीवन में कुछ ऐसा काम किया है, कोई ऐसी गलती; जिसने आपकी ज़िंदगी का रुख ही बदल कर रख दिया हो।कुछ ऐसा जिसे याद करके आपको पछतावा होता है कि काश मुझसे ये गलती न हुई होती।सभी ने अपने जीवन में कोई न कोई ऐसा काम ज़रूर किया होता है।कोई ऐसी गलती या कोई चूक की होती है ,जिसका उसको जीवन भर पछतावा होता रहता है।अब ख़ुद से पूछिए आपको उस गलती की याद बार बार आ रही है या नहीं।अगर जवाब “नहीं”है तो मुबारक हो आप खुद को माफ़ कर चुके हैं और अगर आपका जवाब “हां” में है। आपको अपनी की हुई गलती बार बार याद आ रही है तो आपको खुद को दिल से माफ़ करने की जरूरत है पर बात यहां ही नहीं खत्म होती।एक बात और है जो मैं आपसे कहना चाहता हूं।आज समाज एक नई तरह की समस्या से जूझ रहा है, और वो है खुद की कमियों को स्वीकार न करना या खुद को खुद की कमियों के साथ स्वीकार न करना। अगर आप अपनी कमियों और गलतियों को दिल से नहीं स्वीकारते हैं तो आप उनसे सीख लेकर कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। कभी-कभी यह समस्या व्यक्तिगत अहंकार से जुड़ी होती है।लेकिन हम यहां उसकी बात नहीं कर रहे।हम बात कर रहे हैं।खुद को खुद की ही कामियों के साथ स्वीकारने की ,जो की अत्यन्त ही दुष्कर कार्य है।यह कमियां शारीरिक, मानसिक या व्यवहारिक किसी भी प्रकार ही हो सकती हैं।हो सकता है आपके अन्दर कोई जन्मजात दोष जैसे-तोतलापन,किसी भी प्रकार ही विकलांगता या फ़िर आपका व्यवहार।हो सकता है आप अन्य लोगों का जल्द ही यकीन कर लेते हैं इसलिए आप जल्दी धोखा खा जाते है।आपके व्यवहार से दूसरों को तो लाभ होता है पर आप हमेशा लोगों की चालाकी और षड्यंत्रों का शिकार हो जाते हैं। लेकिन ये जरूरी नहीं कि आपके साथ ये समस्या जन्मजात ही हो या वास्तव में यह कोई समस्या भी हो।यह आपके मानने पर निर्भर है।अगर मानवीय व्यवहार ही बात करें तो अगर कोई व्यक्ति सीधा है तो यह कोई दोष नहीं है। अपने इस व्यवहार के कारण अगर कोई परेशान है तो उसे बस यह समझने की आवश्यकता है कि हर व्यक्ति के साथ आप अच्छे नहीं हो सकते। यदि आप मे कोई शारीरिक या मानसिक दोष हैं तो इसके लिए रोने या पछताने की आवश्यकता नहीं है।मेरी बातें कड़वी लग सकती हैं, पर आप खुद सोचिए कि किसी भी कमी या दोष या किसी गलती पर यूं ही जीवन रोने और पछताने से कुछ होता है भला । इस चार दिनों की जीवन यात्रा को यदि रोते, पछताते बितायेंगे तो आपने जीवन कब जिएंगे?इसलिए यदि जीवन में आपको आगे हंसते-मुस्कुराते बढ़ना है तो खुद को खुद की कमियों के साथ स्वीकारिए और अपनी गलतियों के लिए खुद को माफ़ करते हुए आगे बढ़ते रहिए, नहीं तो सारा जीवन बस रोने में ही चला जाएगा और आप अपने जीवन में जो कुछ भी पाना चाहते हैं;आप उसे मिलने से पहले ही खो देंगे। इसलिए खुद और खुद के जीवन का सम्मान करें उसका अपमान नहीं क्योंकि ईश्वर ने जो कुछ भी इस धरती पर सृजन करके भेजा है, वो सर्वोत्तम है और यदि आपको कुछ कमी लग रही हो तो एक सत्य जान लीजिए कि इस संसार में ऐसा कुछ भी नहीं जिसमें बेहतर बनने की गुंजाइश न हो।

आलोचना (Criticism)

ज़िंदगी भर एक बात हमेशा याद रखना, जो तुम्हारी बुराई करे उसे हमेशा साथ रखना।

Always remember one thing throughout your life, always keep the one who criticise you with you.

हर इन्सान को अपनी तारीफ़ अच्छी लगती है। दुनियां में ऐसा कोई भी नहीं जिसे तारीफ़ से तकलीफ हो भले ही वो तारीफ झूठी ही क्यों न हो। मगर जब कोई आपकी बुराई करता है और आप में कमियां निकालता है।तब आपको बुरा लगता है और आप अपना मन मसोस कर रह जाते हैं। अगर आप उसे करारा जवाब दे सकने लायक हैं, तो आप वैसा ही करते हैं और अगर नहीं तो आप उसे मन ही मन गालियां देते हैं। पर क्या आपको पता है कि आपके जीवन में कुछ ऐसे ही लोग होने ही चाहिएं जो आपको;आपकी कमियां दिखा सकें।बात बात पर आपमें नुक्स निकालने वाला हर इन्सान आपका दुश्मन ही नहीं आपका दोस्त भी हो सकता है। आपको आईना दिखाने वाला शख्स बस आपको;आपकी सही तस्वीर दिखाए, फ़र्क नहीं पड़ता कि वो आपका दोस्त है या दुश्मन। कभी कभी हम अपनी कमियों को पहचान नहीं पाते और कभी कभी तो हमें एहसास ही नहीं होता कि हममें कोई कमी भी है। ऐसे शख्स से आपको ये फ़ायदा होता कि आपको ;अपनी कमियों को ढूंढना नहीं पड़ेगा। बल्कि कोई है, जो आपके लिए यह काम खुद कर रहा है। इससे आपकी शक्ति भी बचेगी, जिसे आप ख़ुद को तराशने में लगा सकते हैं। मगर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं,जो आपमें यूं ही नुक्स निकालते रहते हैं।उनकी बातों का कोई सिर-पैर नहीं होता। पर उनकी बातों को भी कभी नज़रंदाज़ न करें। उनकी बातें अर्थपूर्ण भी हो सकती हैं। यदि उनकी बातों में थोड़ी भी सच्चाई है तो आपको ख़ुद को निखारने का एक और मौका मिल जायेगा और अगर नहीं है तो आपका उत्साह बढ़ जायेगा,क्योंकि लोग बस उसी का रास्ता काटते हैं ,जो तरक्की के रास्ते पर आगे बढ़ रहा होता है। इसलिए ऐसे लोगों को वरदान मानिए जो आपको आईना दिखाकर, आपको संवारने में मदद कर सकते हैं और साथ ही साथ आपको बेहतर से बेहतरीन बन सकते हैं।

Every person likes to be praised. There is no one in the world who is hurt by praise, even if the praise is false. But when someone speaks ill of you and finds faults in you, then you feel bad and feel sad. If you are capable of giving him a befitting reply, you do so and if not, you abuse him in your mind. But do you know that there should be some people in your life who can show you your shortcomings. The person who finds faults in you in every conversation can be not only your enemy but also your friend. The person who shows you the mirror just shows you the true picture of you, it does not matter whether he is your friend or your enemy. Sometimes we are unable to recognize our shortcomings and sometimes we do not even feel that we have any shortcomings. You would benefit from such a person that you would not have to look for your shortcomings. Rather, there is someone who is doing this work for you himself. This will also save your energy, which you can use in carving yourself. But there are some people who keep finding faults in you. Their words have no basis. But never ignore their words either. His words may also be meaningful. If there is even a little truth in what they say then you will get another chance to improve yourself and if not then your enthusiasm will increase, because people only cross the path of those who are moving forward on the path of progress. Therefore, consider it a blessing to have such people who can show you a mirror and help you in grooming you and at the same time can help you become the best of the best.

अपनी गलतियों के लिए दूसरों को दोष देना बन्द करें(Stop blaming others for your mistakes)

हमारी एक बुरी आदत है।जब भी हमारे साथ कुछ गलत होता है,तो हम उसका दोष किसी दुसरे पर मढ़ देते हैं। जबकि हमें यह समझना जरूरी है कि हमारे साथ जो कुछ भी गलत हो रहा है,उसके जिम्मेदार हम स्वयं ही हैं। अगर कोई हमारा फ़ायदा उठाने की कोशिश करता है, तो इसके मतलब ये नहीं कि वो ही गलत है। अगर हम किसी को मौका ही न दे,तो भला हमारा कोई फायदा कैसे उठा सकता है? अगर हमें कोई धोखा देता है तो इसका मतलब बस ये है कि हम सजग नहीं थे। इसलिए अपने साथ जो भी कुछ गलत हो रहा है,उसके लिए किसी दुसरे को दोषी न ठहराना बन्द करें और अपने द्वारा की गई लापरवाही और गलतियों की जिम्मेदारी स्वयं लें।

सच्ची सीख(True lesson)

मुफ़्त में मिले ज्ञान को लोग उपदेश समझते हैं और उपदेश अक्सर भुला दिए जाते है।लेकिन वही ज्ञान जब पैसों से खरीदा जाए तो इन्सान उसे ज़िंदगी भर याद रखने की कोशिश करता है

अपना या पराया ?(Own or stranger?)

बुरे वक्त में ही होती है बस अपनों की पहचान, सच में भला ख़बर है किसे,अपना कौन है?

It is only in bad times that one gets to know one’s own people,who really knows who is one’s own?

जब सब कुछ ठीक या बेहतर चल रहा हो उस वक्त तो सभी साथ देते है ,लेकिन जब भी आप समस्या में हों, खासकर तब जब आपकी माली हालत खस्ता हो।तो ऐसी स्थिति में आप अकेले होते हैं।बस साथ होते हैं तो कुछ सच्चे दोस्त और आपका परिवार और कभी कभी तो वो भी नहीं। कड़वी सच्चाई है मुसीबत के मारे कोई भी सहारा नहीं देता। लेकिन उगते सूरज को सब सलाम करते हैं।जब आपका बुरा समय चल रहा हो तो आपको मालूम पड़ता है कि आपने अपने जीवन में क्या कमाया है । मतलब ऐसा कोई है जो मुसीबत में आपके साथ कंधे से कन्धा मिलाकर खड़ा है या नहीं।अगर आपके पास कोई ऐसा है तो वही आपके जीवन की सच्ची कमाई है। लेकिन अगर नहीं तो या तो आपके सम्बंध अपनों के साथ अच्छे नहीं थे या फिर आपने लोगों को पहचानने में गलती कर दी है।सच ही कहा गया है बुरा वक्त एक आईना है जो सबकी सच्चाई को सामने दिखाता है। इसलिए इससे नफ़रत न करें और परेशान न हों, क्योंकि ये आपको मजबूत बनाएगा और अपने जीवन में सही लोगों को चुनना सिखाएगा।

When everything is going well or better, then everyone supports you, but whenever you are in trouble, especially when your financial condition is bad, then in such a situation you are alone. Friends and your family and sometimes not even that. The bitter truth is that no one provides support in times of trouble. But everyone salutes the rising sun. When you are going through bad times, you realize what you have earned in your life. Meaning whether there is someone who stands shoulder to shoulder with you in trouble or not. If you have someone like that then he is the true income of your life. But if not, then either your relations were not good with your loved ones or you have made a mistake in recognizing people. It is rightly said that bad times are a mirror which shows everyone’s truth. So don’t hate it and don’t be upset because it will make you stronger and teach you to choose the right people in your life.

मन की इतनी सुनता क्यूं है?(Why do you listen to your mind so much?)

जब-जब तूने पंख उठाए,
मन ने कितने खेल रचाए।
कोशिश तेरी है बिन मतलब,
पथ पर पग-पग ये भरमाए।
हुए पांव घायल जब तेरे,
फिर उठने से डरता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
हर बार जो तूने ज़िद ठानी,
चाहा जो सागर को तरना।
मन ने फिर प्रश्न खड़े करके,
चाहा बाधाओं को रखना।
बस अनसुलझे से धागे हैं ये,
मन में जाले बुनता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
कुछ भी सोचे कुछ भी चाहे,
मन ने कब मुश्किल राह चुनी।
भय खाता ये बदलावों से,
इसको तेरी परवाह नहीं।
हर बार है हारा जीवन में,
पछताया इसकी सुन-सुनकर।
कह दे अब तक क्या मिल पाया?
तुझको जीवन में डर-डरकर।
जीवन तो संग्राम है ठहरा,
लड़ने से फिर डरता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
बढ़ चला सफ़र की राह में जो,
हिम्मत की मुट्ठी को बांधे।
बाधाओं की परवाह न कर,
चलता चल तूं डर के आगे।
मंज़िल भी बाहें फैलाकर,
फ़िर तुझको गले लगाएगी।
राहों में बिछी जो शूल तेरे,
फूलों का पथ बन जायेगी।
बाधाओं से ही निखरेगी,
तेरे व्यक्तिव की हर क्षमता।
तूं छोड़ दे डर अब कदम बढ़ा,
पूरी होगी फिर हर मंशा।
आशा है,सपने भी होंगे,
पूरा करने से डरता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
लक्ष्य का पथ आसान कहां,
कहीं कंकड़ है कहीं कीचड़ है।
बिन कष्ट उठाए जीवन में,
पाना कुछ भी अति दुष्कर है।
बिन गूंथे माटी ना चाक चढ़े,
बिन स्वर्ण तपे कुन्दन कैसा?
बिन बाधाओं विपदाओं के
बिन जीत-हार जीवन कैसा?
हर हार तुझे सिखलाएगी,
असफलता से डरता क्यूं है?
हार गया तो जीतेगा भी,
मन की इतनी सुनता क्यूं है?
मन की इतनी सुनता क्यूं है?

जब भी हम कुछ करना चाहते हैं तो हमारा मन हमें रोकता है। ये हमें डराता है,भ्रमित करता है और हमारे हृदय में शंका का बीज बोता है जिससे हम अपने लक्ष्य पथ से विमुख हो जाएं।एक बात समझ लिजिए कि हमारा मन हमें इन्द्रिय सुखों की ओर भटकता है जैसे-हद से ज्यादा सोना,आराम करना, आलस करना, नए बदलावों से इंकार करना आदि। ये हमें हर उस काम में लगाने की कोशिश करता है जिससे हमारा भला दूर दूर तक न हो सके।इसलिए हमें अपने मन की उन बातों को मानने से इनकार कर देना चाहिए जो हमारे विकास के मार्ग में बाधक हैं।

Whenever we want to do something our mind stops us. It scares us, confuses us and sows the seeds of doubt in our heart due to which we deviate from our target path. Understand one thing that our mind wanders towards physical pleasures like excessive sleeping, resting etc. , being lazy, refusing new changes etc. It tries to involve us in every work which cannot do us any good. Therefore, we should refuse to accept those things in our mind which are obstacles in the path of our development.

हकीकत(Reality)

कितना भी खुद से भाग लो लेकिन। हकीकत से छुपकर कहां जाओगे?

No matter how much you run away, Where will you go to hide from reality?

हम अपनी वास्तविकता से भले ही कितना भी किनारा क्यूं न कर लें। जो सच्चाई है वो कभी बदल नहीं सकती। चाहे यह बात हमारी पहचान से सम्बंध रखती हो या फिर हमारी तत्कालीन परिथितियों से। ज्यादातर लोग समस्याएं आने पर दूसरों को और भगवान को दोष देते हैं या अपने बुरे वक्त का रोना रोते हैं और सोचते हैं कि कोई आए और हम पर तरस खाए।वो देखे की हम ज़िंदगी के किस दौर से गुजर रहे हैं। इससे बात नहीं बनी तो हम खुद को नशे के अंधे कुएं में झोंक देते है,बस चन्द पल के लिए खुद को भरमाने के लिए कि अब जिंदगी में कोई गम नहीं है। इसके बाद अगली सुबह एक नया रोना या फिर नशे की लत।बस यही ज़िंदगी बन कर रह गई है। अपने हालातों पर रोना भी एक तरह का नशा है, जिससे हम अपने जीवन की वास्तविकता झुठला सकें।हम दूसरों के आगे जीवन भर रोते रहते हैं। हमें पता है कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा और न ही हमारी मुसीबतें कम होंगी। फिर भी हम अपनी हरकतों से बाज नहीं आते। ज़रा सोचिए किसी को अपनी परेशानियां बताने से क्या हाल मिल जायेगा और अगर कोई दूसरा इन्सान इसका हल दे भी दे तो ये किस्सा कितने दिन चलेगा ?आप फिर नई मुसीबत आते ही किसी और को ढूंढोगे। इसका सीधा मतलब यह है कि आप हर परेशानी के लिए दूसरे पर आश्रित हो चुके हैं। आकर्षण का सिद्धांत ये कहता है कि हम जिस किसी वस्तु या भावना के बारे में ज्यादा सोचते हैं, उसे हम उतना ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसका मतलब है कि यदि हम ज्यादातर अपनी परेशानियों का रोना रोयेंगे और लगातार उसके बारे में सोचेंगे तो हमें और भी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इसलिए परेशानियों और जीवन की समस्याओं पर रोना नहीं , बल्कि उन्हें हल करना,उनसे लड़ना सीखिए और हो सके तो उन पर हंसना शुरू कीजिए। फिर आपकी ज़िंदगी भी मुस्कुराने लगेगी।

No matter how much we move away from our reality. The truth can never change. Whether it is related to our identity or our current circumstances. Most of the people blame others and God when they face problems or cry about their bad times and think that someone should come and take pity on us. He should see what phase of life we are going through. If this doesn’t work then we throw ourselves into the blind well of addiction, just to deceive ourselves for a few moments that there is no sorrow in life anymore. After this, the next morning a new cry or drug addiction. This is what life has become. Crying over our circumstances is also a kind of addiction, due to which we can deny the reality of our life. We keep crying in front of others throughout our life. We know that this will not make any difference nor will our troubles reduce. Still we do not desist from our actions. Just imagine what kind of situation you will get by telling your problems to someone and even if someone else gives the solution, how long will this story continue? You will then look for someone else as soon as a new problem arises. This simply means that you have become dependent on others for every problem. The law of attraction says that the more we think about any object or emotion, the more we attract it towards us. This means that if we mostly cry about our problems and constantly think about them, we will have to face even more problems. Therefore, do not cry over the troubles and problems of life, but learn to solve them, fight them and if possible, start laughing at them. Then your life will also start smiling.

सुकून(Peace of Heart)

दिल क्या ढूंढे दिल क्या चाहे?
क्यूं मारा मारा फिरता है?
अब इसे कौन सी कमी हुई?
जो बन बेचारा फिरता है।
कभी मन्दिर में मत्थे टेकें,
कभी गलियों की है खाक छनी।
कभी दरगाहें कभी गुरुद्वारे,
पर कहीं न कोई बात बनी।
कुछ तो चाहे ये दिल मेरा,
जो बन आवारा फिरता है।
दिल क्या ढूंढे दिल क्या चाहे?
क्यूं मारा मारा फिरता है?
अब इसे कौन सी कमी हुई?
जो बन बेचारा फिरता है।
हर राहों पर ढूंढा इसको,
कितनी सारी महफ़िल देखी।
पर चकाचौंध की दुनियां में,
खोजा जिसको मुझको न मिली।
लख किए जतन है हार गया,
अब हारा-हारा फिरता है।
दिल क्या ढूंढे दिल क्या चाहे?
क्यूं मारा मारा फिरता है?
अब इसे कौन सी कमी हुई?
जो बन बेचारा फिरता है।
हां लौटा थककर आया मैं,
घर की दहलीज़ के जब अन्दर।
होकर बेफिक्र जो सर रक्खा,
मैने अपनी मां के आंचल।
है सुकून मिला जो ढूंढा रहा ,
था मैं अपने घर के बाहर।
जिसकी खातिर दर-दर भटका,
वो पाया है खुद के अन्दर।
अब जान गया है दिल मेरा,
क्यूं बन बंजारा फिरता है।
ये क्या ढूंढे ये क्या चाहे,
क्यूं मारा-मारा फिरता है।
अब इसे कौन सी कमी हुई,
जो बन बेचारा फिरता है।

What does the heart seek?
What does the heart desire?
Why does he roam around?
Now what did it lack?
Who wanders around like a pauper.
Sometimes bow down in the temple, Sometimes the streets are filled with dust & ashes.
Sometimes Dargahs,sometimes Gurudwaras,
But somewhere something happened.
This heart of mine wants something,
Who wanders around like a vagabond.
What does the heart seek?
What does the heart desire?
Why does he roam around?
Now what did it lack?
Who wanders around like a pauper.
Saw so many gatherings.
But in the world of glitz,
Searched for something I couldn’t find.
I tried my best but got defeated.
Now he wanders around defeated.
What does the heart seek?
What does the heart desire?
Why does he roam around?
Now what did it lack?
Who wanders around like a pauper.
Yes, I came back tired.
When inside the threshold of the house.
Who kept his head carefree,I my mother’s lap.
I have found the peace I was looking for.
I was outside my house.
For whom I wandered from door to door,
He has found it within himself.
Now my heart knows,
Why does he roam around like a nomad?
What does he seek,
what does he want?
Why does he wander around?
Now what lack did it have?
Who wanders around like a pauper.

“भागता रहा ज़िंदगी भर सुकुन के पीछे मगर मां की गोद जैसा सुकुन दुनियां में कहीं भी और नहीं।”

“I kept running after peace all my life, but there is no peace like mother’s lap anywhere else in the world.”

जो दोगे वही पाओगे(You get what you give)

जो हम दूसरों से अपने लिए चाहते हैं, हमें वो दूसरों को पहले देना पड़ेगा। तब जाकर हम उस लायक बन पाएंगे, कि किसी से कोई उम्मीद कर सकें।

What we want from others for ourselves, we have to give to others first. Only then will we be able to become worthy enough to have expectations from anyone.

हमारी एक बुरी आदत है कि हम अपने लिए दूसरों से अच्छे बर्ताव की उम्मीद करते हैं। हम चाहते हैं कि कोई हमारे बुरे वक्त में हमारा साथ दे और हमारी मदद करे। हमारा सम्मान करे, हमसे प्रेम करे, हमारी कमियों के साथ हमें अपनाए और हमारी बड़ी से बड़ी गलतियों पर हमें माफ़ भी कर दे। लेकिन क्या दूसरों को भी हमसे यही उम्मीद रखने का हक है? हम दूसरों में तो लाखों कमियां निकलते हैं।लेकिन क्या हमने खुद की खामियों पर कभी गौर किया है? अगर किसी से हमें वो नहीं मिल पाता जो हम उससे अपने लिए चाहते हैं तो वो हमारी निगाह में बुरा बन जाता है। लेकिन हमने उसके लिया क्या किया है, इस बात से हमें कोई भी मतलब नहीं है। हम ये बात भूल जाते हैं कि हम दूसरों को जो देते हैं वही दूसरों से पाते हैं। हम दूसरों को जो दे नहीं सकते वो हमें उनसे पाने की उम्मीद भी नहीं करनी चाहिए।

One of our bad habits is that we expect good behavior from others. We want someone to support and help us in our bad times. Respect us, love us, accept us with our shortcomings and forgive us even our biggest mistakes. But do others also have the right to expect the same from us? We find millions of shortcomings in others. But have we ever noticed our own shortcomings? If we are not able to get what we want from someone then he becomes bad in our eyes. But we don’t care what we have done for him. We forget that what we give to others is what we get from others. What we cannot give to others, we should not expect to get from them.