देख कलम कहीं रुक ना जाए(See the pen does not stop anywhere)

काले बादल छाए नभ में,
दिन को काली रात बनाए।
सूरज की किरणों के संग को,
धरती बैठी आस लगाए।
सारा जग चाहे उजियारा,
कौन यहां अब राह दिखाए?
कलम उठाकर बना मशालें,
लिख कुछ जो सूरज बन जाए।
सबको राह दिखानी तुझको,
देख कलम कहीं रूक ना जाए।-2
छोटी सी चिंगारी वन को,
धूं-धूं करती और जलाती।
वैसे ही तीखी सी बोली,
है घर घर में आग लगाती।
सबके हित में ऐसा कुछ लिख ,
आग भी शीतल जल बन जाए।
सबको राह दिखानी तुझको,
देख कलम कहीं रूक ना जाए।-2
ऊंच नीच और जाति धर्म ढो,
इक-दूजे से कटते रहते सब।
छोटी छोटी बातें लेकर,
आपस में लड़ते रहते सब।
सब धर्मों में बैर मना है,
फिर भी नफ़रत पाले बैठे।
प्रेम छोड़ मन में कटुता के,
बीजों का रोपा करते हैं।
नफ़रत की जड़ फैली जग में,
प्रेम का दीपक कौन जलाएं?
सबको राह दिखानी तुझको,
देख कलम कहीं रूक ना जाए।-2
सारे जग में लूट मची है,
भ्रष्टाचार है पांव पसारे।
लालच में पागल होते सब,
धरती माता राह निहारे।
कि कोई अपनी आंखें खोले,
जननी मां का मान बचाए।
सबको राह दिखानी तुझको,
देख कलम कहीं रूक ना जाए।-2
दुनिया वाले कुछ भी बोलें,
तूं बस अपनी धुन में रहना।
कोई रोके या फिर टोके,
अपनी राह पे चलते रहना।
लेना होगा ज़िम्मा तुझको,
सबको कुछ ऐसा समझा जा।
आने वाली पीढ़ी को जो,
युग-युग तक सिखलाता जाए।
सबको राह दिखानी तुझको,
देख कलम कहीं रूक ना जाए।-2

फ़िक्र(Tension)

“क्यों फिक्र करूं कि वो समझेगा मुझको।
मैं जानता हूं ख़ुद को क्या ये कम है?…..”

दूसरों से कभी हमदर्दी की उम्मीद न करें। उम्मीद अक्सर दिल को तोड़ देती है क्योंकि आप पर जो बीती है; हो सकता है, उसे सामने वाला समझ न पाये।

आस (Hope )

“कहते हैं दुनिया उम्मीद पर ही कायम है;जिसने उम्मीद छोड़ दी,उसने जीना छोड़ दिया। इसलिए अपने लिए ना सही; दूसरों के लिए ही उम्मीद के हांथ को थामे रक्खे। क्या पता आप किसी की उम्मीद, किसी प्रेरणा हो और नहीं हैं तो क्या पता बन जाएं।”

युद्धक्षेत्र(Battlefield)

ना डर ​​तू उठ महारथी चुनौतियां पुकारती।
यहां न कृष्ण-पार्थ हैं स्वयं ही है तू सारथी।
विपत्तीयों के अंध को तू चीरता प्रकाश है।
है संशयों का स्थान क्या तू ही स्वयं विश्वास है।
हो भय भले सफल न हो विफल भी हो तो दुख नहीं।
जो हुए महान हैं प्रथम कोई सफल नहीं।
है कर्म तेरे हाथ में प्रयास कर प्रयास कर।
कि लक्ष्य प्राप्ति ध्येय हो न और कुछ विचार कर।
समय-2 की बात है तेरा कभी मेरा कभी।
ये गूढ़ तथ्य ज्ञान का भला किसे पता नहीं।
जीवन यह है युद्ध क्षेत्र व कर्म अस्त्र-शस्त्र हैं।
विचारता है क्यों भला यही तो मूल मंत्र है।
भले सगे हों या कोई;तेरा कोई सगा नहीं।
विपत्तियों के होड़ में तू एक संग कोई नहीं।
राह तेरी है कठिन व सामने पहाड़ है।
तू भय न खा कदम बढ़ा गगन सा तू विशाल है।
ना धीर तज निराश हो थका नहीं तू हारकर।
हां वीर है सशस्त्र तूं कि लक्ष्य पर प्रहार कर।

युद्धक्षेत्र(Battlefield)

ना डर ​​तू उठ महारथी चुनौतियां पुकारती।
यहां न कृष्ण-पार्थ हैं स्वयं ही है तू सारथी।
विपत्तीयों के अंध को तू चीरता प्रकाश है।
है संशयों का स्थान क्या तू ही स्वयं विश्वास है।
हो भय भले सफल न हो विफल भी हो तो दुख नहीं।
जो थे हुए महान हैं प्रथम कोई सफल नहीं।
है कर्म तेरे हाथ में प्रयास कर प्रयास कर।
कि लक्ष्य प्राप्ति ध्येय हो न और कुछ विचार कर।
समय-2 की बात है तेरा कभी मेरा कभी।
ये गूढ़ तथ्य ज्ञान का भला किसे पता नहीं।
जीवन यह है युद्ध क्षेत्र व कर्म अस्त्र-शस्त्र हैं।
विचारता है क्यों भला यही तो मूल मंत्र है।
भले सगे हों या कोई;तेरा कोई सगा नहीं।
विपत्तियों के होड़ में तू एक संग कोई नहीं।
राह तेरी है कठिन व सामने पहाड़ है।
तू भय न खा कदम बढ़ा गगन सा तू विशाल है।
ना धीर तज निराश हो थका नहीं तू हारकर।
हां वीर है सशस्त्र तूं कि लक्ष्य पर प्रहार कर।

“चुनौतियां हमारे जीवन के सफलता का आधार हैं। ये हमें सुदृढ़ बनाते हुए हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं। इस धरती पर जितने भी प्रसिद्ध या महान विभूतियां हुईं हैं सभी ने अपने जीवन में चुनौतियों को स्वीकारा और महानतम उपलब्धियां हासिल की हैं।”