लड़ता रहा, घिसता रहा,संघर्ष में पिसता रहा। कभी मौसमों की मार से,सभी छेनियों के वार से। कितनी ही चोटे खाई हैं,तब जाकर वो सूरत पाई है। जिसको ये जग है पूजता, हर ओर जिसको ढूंढता।
पत्थर को भी भगवान का दर्जा यूं ही नहीं मिल जाता, उसे पाने में पत्थर को कई तकलीफें उठानी पड़ती है। उसे मूर्तिकार द्वारा छेनी से तिल-तिल कर काटा जाता है, घिसा जाता है।तब जाकर कहीं वो भगवान का स्वरूप प्राप्त कर पाता है।ठीक उसी प्रकार मनुष्य को भी यदि बड़ा बनना, महान बनना हो तो उसे भी कर्म और संघर्ष की कसौटी पर घिसना पड़ेगा।तब जाकर कहीं वह वो स्थान प्राप्त कर पाएगा जो अन्य लोगों के लिए दुष्कर है।
गिरने से क्यों घबराता है? छोटा बालक भी गिरता है। जलती भट्टी में तपकर ही तो, स्वर्ण से कुंदन बनता है । फल-फूल के बोझे को सहकर, तरुवर भी यश के पात्र बनें। मानव कष्टों को हरकर ही, गंगा भी जग की मातु बने। कालकूट विष को पीकर, शिव महादेव बन जाते हैं। गुरु-मातु-पिता मे श्रद्धा रख राघव, मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं। यदि बनना है कुछ जीवन में, तो सूरज सा तपना होगा। यश-मान को धारण करना हो, तो कुम्भ सा भी पकना होगा। जिनकी भी ख्याति है जग में, बिन त्याग के कोई नाम नहीं। सच ही कहते है मानव का, संघर्ष बिना सम्मान नहीं।-2
“इन्सान को सफल बनना है तो, मूल्य तो चुकाना पड़ेगा। बिना परिश्रम और त्याग के कोई भी महान नहीं बनता।”
क्या हुआ जो धीरज टूट गया ? क्या हुआ जो साहस छूट गया ? क्या हुआ जो आँखें भर आईं ? क्या हुआ जो विपदा है छाई ? बिगड़ी है तो बन जाएगी, ख़ुद के मन को समझाए रखना। इन तूफ़ानी अंधियारों में बस, इक आस का दीप जलाए रखना।-2 तिनका-तिनका चुनकर चिड़िया, अपना नीड़ गढ़ा करती है। वर्षा-आंधी को सह-सह कर, मौसम से जूझा करती है। नीड़ बिखरने पर वो फ़िर से, अपना नीड़ दोबारा गढ़ती। सोचो पंछी भी हार न मानें, मानव की लाज बचाए रखना। इन तूफ़ानी अंधियारों में बस, इक आस का दीप जलाए रखना।-2 काले-काले मेघ गगन में, चारों ओर भ्रमण करते हैं। कहीं गरजते-कहीं बरसते, कहीं धरा सूखी रखते हैं। बिन वर्षा के कृषक भी अपने, खेतों को जोता करता है। एक कृषक की भांति ही तुम भी, ख़ुद का मन बहलाए रखना। इन तूफ़ानी अंधियारों में बस, इक आस का दीप जलाए रखना।-2 दिन ढलता है,रात निकलती, चहुँ ओर अंधेरा छाता है। सूरज अपनी बारी तकता, मन ही मन मुसकाता है। चाहे बादल और ग्रहण हो, सूरज अपनी हार न माने। हर दिन अंधियारे को चीरे, लेकर भोर निकलता है। अपने मन में ऐसे ही तुम, सूर्य सी चमक जगाए रखना। इन तूफ़ानी अंधियारों में बस, इक आस का दीप जलाए रखना।-2
“कहते हैं दुनिया उम्मीद पर ही कायम है;जिसने उम्मीद छोड़ दी,उसने जीना छोड़ दिया। इसलिए अपने लिए ना सही; दूसरों के लिए ही उम्मीद के हांथ को थामे रक्खे। क्या पता आप किसी की उम्मीद, किसी प्रेरणा हो और नहीं हैं तो क्या पता बन जाएं।”
ना डर तू उठ महारथी चुनौतियां पुकारती। यहां न कृष्ण-पार्थ हैं स्वयं ही है तू सारथी। विपत्तीयों के अंध को तू चीरता प्रकाश है। है संशयों का स्थान क्या तू ही स्वयं विश्वास है। हो भय भले सफल न हो विफल भी हो तो दुख नहीं। जो हुए महान हैं प्रथम कोई सफल नहीं। है कर्म तेरे हाथ में प्रयास कर प्रयास कर। कि लक्ष्य प्राप्ति ध्येय हो न और कुछ विचार कर। समय-2 की बात है तेरा कभी मेरा कभी। ये गूढ़ तथ्य ज्ञान का भला किसे पता नहीं। जीवन यह है युद्ध क्षेत्र व कर्म अस्त्र-शस्त्र हैं। विचारता है क्यों भला यही तो मूल मंत्र है। भले सगे हों या कोई;तेरा कोई सगा नहीं। विपत्तियों के होड़ में तू एक संग कोई नहीं। राह तेरी है कठिन व सामने पहाड़ है। तू भय न खा कदम बढ़ा गगन सा तू विशाल है। ना धीर तज निराश हो थका नहीं तू हारकर। हां वीर है सशस्त्र तूं कि लक्ष्य पर प्रहार कर।
ना डर तू उठ महारथी चुनौतियां पुकारती। यहां न कृष्ण-पार्थ हैं स्वयं ही है तू सारथी। विपत्तीयों के अंध को तू चीरता प्रकाश है। है संशयों का स्थान क्या तू ही स्वयं विश्वास है। हो भय भले सफल न हो विफल भी हो तो दुख नहीं। जो थे हुए महान हैं प्रथम कोई सफल नहीं। है कर्म तेरे हाथ में प्रयास कर प्रयास कर। कि लक्ष्य प्राप्ति ध्येय हो न और कुछ विचार कर। समय-2 की बात है तेरा कभी मेरा कभी। ये गूढ़ तथ्य ज्ञान का भला किसे पता नहीं। जीवन यह है युद्ध क्षेत्र व कर्म अस्त्र-शस्त्र हैं। विचारता है क्यों भला यही तो मूल मंत्र है। भले सगे हों या कोई;तेरा कोई सगा नहीं। विपत्तियों के होड़ में तू एक संग कोई नहीं। राह तेरी है कठिन व सामने पहाड़ है। तू भय न खा कदम बढ़ा गगन सा तू विशाल है। ना धीर तज निराश हो थका नहीं तू हारकर। हां वीर है सशस्त्र तूं कि लक्ष्य पर प्रहार कर।
“चुनौतियां हमारे जीवन के सफलता का आधार हैं। ये हमें सुदृढ़ बनाते हुए हमारे व्यक्तित्व का निर्माण करती हैं। इस धरती पर जितने भी प्रसिद्ध या महान विभूतियां हुईं हैं सभी ने अपने जीवन में चुनौतियों को स्वीकारा और महानतम उपलब्धियां हासिल की हैं।”