चाहत(Desire)

“चाहता था सुकुन के दो पल जी लूं,
मगर जो आराम से कटे वो ज़िंदगी कैसी ?”

कौन कहता तूं अकेला ? (Who says you are alone?)

“अकेलेपन से निराश न हों इसे अवसर की तरह समझें जो आपको; खुद को समझने और अपनी खूबियों को पहचानने में मदद करता है।”

आह्वान(Evoke)

ऐ भारत के वीर सपूतों!
विजय पताका फहराओ।
उठो करो संधान लक्ष्य का,
बिना रुके चल जाओ।
सन्देह नहीं कि मार्ग है दुष्कर,
पर खिलता है पंक(कीचड़ )में पुष्कर
रत्नाकर-वन-नभ-पर्वत-जन,
आज सभी को बतलाओ।
ऐ भारत के वीर सपूतों!
विजय पताका फहराओ।
विपिनचंद्र-आज़ाद-भगत,
सावरकर ने बलिदान किया।
गांधी-सुभाष-पंडित-पटेल,
सबने आधार प्रदान किया।
इनकी अभिमानी गौरव गाथा,
जीवन भर गाते जाओ।
ऐ भारत के वीर सपूतों!
विजय पताका फहराओ।
जन्मभूमि यह दशरथ सुत की,
जिन्होंने जन कल्याण किया।
पितृ वचन के मान हेतु,
दुर्जन वन को प्रस्थान किया।
राम राज्य विस्तार करेंगे,
अब संकल्प करे आओ।
ऐ भारत के वीर सपूतों!
विजय पताका फहराओ।

O brave sons of India!; Hoist the flag of victory . Get up, hit the target, Move on without stopping. There is no doubt that the path is difficult. But the lotus blooms in the mud. Sea-Forest-Sky-Mountain, And People tell everyone today. O brave sons of India!; Hoist the flag of victory . Vipinchandra-Azad-Bhagat Singh And Savarkar are sacrificed. Gandhi-Subhash-Pandit-Patel, All provided the base. Keep singing his pride saga, For the rest of your life. O brave sons of India!; Hoist the flag of victory. This is the birthplace of Dashrath’sson (Lord Rama), Who did public welfare. For the honor of father’s promise, He left his home and went to the fearsome forest. Let’s make a resolution that, We will expand the kingdom of Lord Rama. O brave sons of India!; Hoist the flag of victory.

संपत्ति के बांटे धन घटे।
बन्धु बंटे बल जाय ।
भेद के बांटे मान घटे।
प्रेम बंटे सब जाय।
धर्म के बांटे ईश बंटे।
जाति बंटे मत जाय।
और राष्ट्र के बांटे प्रगति घटे।
परवश(पराधीन) होत सहाय।
उमेश कुमार मिश्र

नसीहतें(Edification)

किसी की नसीहतें लेने लायक है या नहीं ये बात बस उस इन्सान की जेब पर टिकी हुई है,कि उसकी जेब भरी है या ख़ाली है। इसलिए अगर जेब में वज़न हो तो लोगों को आपकी बातें भी अपने आप ही वज़नदार लगने लगती हैं, भले ही वो कितनी भी हल्की ही क्यों न हों।

हार(failure)

हारा हुआ इन्सान तुम्हें वो बातें बता सकता है,
जिसे करने की जीतने वालों ने कभी सोची भी नहीं होंगी। इसलिए इज्ज़त सबकी होनी चाहिए। भले ही कोई हारा हो या जीता हो कोई फ़र्क नहीं पड़ता। क्योंकि जीतने वाला भले ही तुम्हे ये सीखा दे कि तुम्हे करना क्या है, लेकिन ये कभी नहीं सीखा सकता कि तुम्हें क्या नहीं करना चाहिए। बस हारने वाला ही तुम्हें यह सीखा सकता है। अगर दोनों से सलाह लें तो हम अपनी मंज़िल को आसानी से पा सकते हैं।

मुखौटा (Mask)

मुस्कुराहट के पर्दे से तकलीफें छुपाया करता हुं।
मैं हूं बादल कभी आया कभी जाया करता हूं।
यूं तो चुपचाप दबा रक्खी हैं गड़गड़ाहट दिल में।
फिर भी कहां किसी और को बताया करता हूं।

सन्देश (The Massage)

एक बात बताता हूं सुन लो,
क्या क्लेश-द्वेष में रखा है?
जब मन के भीतर प्रेम बसा,
फिर क्या मंदिर; क्या मक्का है?
है रही बंटी चौराहे की,
पर मिलना सबको बस एक जगह।
न राम ने बोला मंदिर जा,
न खुदा कहे मस्जिद में रह।
जो बात लिखी कोरे मन पे,
जो पढ़ा-पढ़ाया-सीखा है।
जो छुपा कुरान-ए-शरीफ में है,
वो ही पैगम तो गीता है।
सब का बस एक सबक है जी,
जो चाहोगे देना होगा।
ये बात भी है तुम पर ठहरी,
तुम्हारे मन में क्या रखा है?
एक बात बताता हूं सुन लो,
क्या क्लेश-द्वेष में रखा है
जब मन के भीतर प्रेम बसा,
फिर क्या मंदिर;क्या मक्का है?
हो जाति धर्म का प्रश्न भले,
कब इसे किसका भला किया?
दिल को बस टुकड़ों में बांटा,
भाई-भाई से जुदा किया।
बच्चों से तुम लो सीख सदा,
क्या धर्म जाति का भान उन्हें?
जिसको पाया वो अपना है,
मेरा तेरा न ज्ञान उन्हे।
बच्चे प्रतिरूप है ईश्वर का,
ये सारा जग समझाता है।
जब इनको भेद नहीं आता,
तो तुम्हें कौन सिखता है?
उपरवाला न सिखलाये,
ये ऊंच-नीच-जाति-मज़हब।
ये उपज है तुच्छ विचारों की,
मुर्दे ना चुने श्मशान या कब्र।
हम सब धरती की संताने,
जो बस इंसान ही थे पहले।
जब मुस्लिम-हिंदू-सिख बने,
बस आप में टकराते हैं।
एक बात बताता हूं सुन लो,
क्या क्लेश-द्वेष में रखा है?
जब मन के भीतर प्रेम बसा,
फिर क्या मंदिर; क्या मक्का है?

“जैसे जल की एक बूंद कभी भी सागर नहीं बन सकती। वैसे ही राष्ट्र का विकास कोई भी जाति-धर्म या सम्प्रदाय स्वयं अपने बल पर नहीं कर सकता।उसके लिए सभी को एक साथ आना पड़ेगा।”

क्योंकि हांथ की पांचों उंगलियां मिलकर ही मुट्ठी बनाती है

और एक अकेली ऊंगली दुश्मनी और गुस्से को भड़काती है।”

सहारा(Support)

“If the crutches are not destined, then they cannot take the traveler far with their support. Those who want to reach their destination have to decide their own path.”

दम तोड़ते सपने(Dying dreams)

न जाने कितने ही सपने दम तोड़ते हैं,
मुफलिसी की चादरों की घुटन से।
तड़पता रहा रात भर सड़कों पे कोई,
कोई मखमल पे लेटा सो रहा है।

Don’t know how many dreams die, From the suffocation of the sheets of poverty. Someone kept on suffering on the streets all night, Someone is sleeping lying on velvet.

युद्धक्षेत्र(Battlefield)

ना डर ​​तू उठ महारथी चुनौतियां पुकारती।
यहां न कृष्ण-पार्थ हैं स्वयं ही है तू सारथी।
विपत्तीयों के अंध को तू चीरता प्रकाश है।
है संशयों का स्थान क्या तू ही स्वयं विश्वास है।
हो भय भले सफल न हो विफल भी हो तो दुख नहीं।
जो हुए महान हैं प्रथम कोई सफल नहीं।
है कर्म तेरे हाथ में प्रयास कर प्रयास कर।
कि लक्ष्य प्राप्ति ध्येय हो न और कुछ विचार कर।
समय-2 की बात है तेरा कभी मेरा कभी।
ये गूढ़ तथ्य ज्ञान का भला किसे पता नहीं।
जीवन यह है युद्ध क्षेत्र व कर्म अस्त्र-शस्त्र हैं।
विचारता है क्यों भला यही तो मूल मंत्र है।
भले सगे हों या कोई;तेरा कोई सगा नहीं।
विपत्तियों के होड़ में तू एक संग कोई नहीं।
राह तेरी है कठिन व सामने पहाड़ है।
तू भय न खा कदम बढ़ा गगन सा तू विशाल है।
ना धीर तज निराश हो थका नहीं तू हारकर।
हां वीर है सशस्त्र तूं कि लक्ष्य पर प्रहार कर।