तस्वीर(Picture)

सारी सच्चाई तस्वीरें बयां नहीं करती।
कुछ अनकहे किस्से छूट जाया करते हैं।

ज़िंदगी का हाल भी तस्वीर के जैसा ही है,कोई कितनी भी कोशिश कर ले; कुछ किस्से अधूरे ही रह जाते हैं। इन्सान को वो सब कुछ नहीं मिल पाता ,जो उसकी ख्वाहिश होती है। भले ही उसने; उसके लिए क्या कुछ न झेला हो। किसी ने सच ही कहा है एक तस्वीर,पूरी ज़िंदगी बयां नहीं कर सकती।..।

घाव(Wound)

दूसरा मार भी डाले तो कोई ग़म नही, पर अपनों के दिए घाव बर्दाश्त नहीं होते….।

अपनों का मारा हुआ इन्सान खुद ही मर जाता है, किसी और को ये ज़हमत उठाने ही ज़रूरत नहीं पड़ती।

घटिया सोच(Poor thinking)

सड़क पर मर रहे घायल की मदद कौन करे?
मुसीबत मोल लेने से अच्छा उसकी वीडियो ही
वायरल करते हैं।
😔

Who will help the injured dying on the road? It is better to make a video of it and make it viral than to get in trouble.😔

आज कल हमारी सोच इतनी घटिया होती जा रही है कि अगर कोई सड़क पर मर रहा हो या या कहीं कोई तकलीफ़ से गुजर रहा हो तो हम उसकी मदद करनी के बजाय उसका तमाशा देखते रहते हैं। सोशल मीडिया पर उसका वीडियो और तस्वीरें अपलोड कर देते हैं ।लेकिन बात जब हम पर आती है तो हम लोगों को इंसानियत की दुहाई देते हैं । क्या यही हमारी सोच है? क्या इसीलिए मानव को ईश्वर की सबसे उत्कृष्ट रचना माना गया हैं ? यदि मानव ही मानवता छोड़ दे तो हममें और पशुओं में अन्तर ही क्या है….?

Nowadays our thinking is becoming so bad that if someone is dying on the road or someone is going through trouble, instead of helping them, we keep watching their spectacle. We upload his videos and pictures on social media. But when it comes to our turn, we make people cry for humanity. Is this what we think? Is that why human is considered the excellent creation of God? If humans leave humanity, then what is the difference between us and animals…..?

अकड़(Flaunt)

दो दिन की जीत पर इंसान,यूं इतराना नहीं अच्छा।
ये तो बस इक खेल था,अभी तो पूरी जंग बाकी है।

Man, on the victory of two days, it is not good to boast like this. This was just a game, the whole war is yet to come.

अपनी उपलब्धियों पर गर्व किया जा सकता है लेकिन घमंड नहीं। चन्द कामों में सफलता पाकर दूसरों के साथ अकड़कर बात करना अच्छी बात नहीं होती। इन्सान को अपनी विनम्रता कभी भी खोनी नहीं चाहिए।

कड़वा सच(Bitter truth)

सोशल मीडिया पर लोगों का दर्द देखकर आंखों में आंसुओं की बाढ़ सी आ जाती है।पर न जाने क्यों खुद के घर मे तड़प रहे मां-बाप किसी को नज़र ही नहीं आते।फ़र्क बस नज़रों का नहीं नज़रिए का है।

Seeing the pain of people on social media, tears well up in the eyes. But don’t know why no one can see the parents who are suffering in their own house. The difference is not just in the eyes but in the attitude.

ग़म(Sadness)

दिल के अंधेरे कोने में झांकने की इजाज़त कैसे दे दूं ? अपनों के दिए ज़ख्म ख़ुद से ही छुपाए बैठा हूं।

अपनों का दिया दर्द ना ही छुपाते बनता हैं और ना ही दिखाते…….।

धैर्य(Patience)

धैर्य एक सकारात्मक भावना है,जो हमारे असुरक्षात्मक ;नकारात्मक विचारों से हमारी सुरक्षा करता है। इससे एक आशा जुड़ी होती है कि एक दिन सब अच्छा हो जायेगा। धैर्य रखने की आवश्यकता तब होती है जब परिस्थितियां हमारे नियंत्रण से बाहर हो।यह विपत्ति या किसी भी परिणाम की प्रतीक्षा से होने वाली बेचैनी के समय स्वयं पर आत्मनियंत्रण रखने का एक शक्तिशाली साधन है, जो हमें जल्दबाज़ी मे गलत निर्णय लेने से रोकता है।इसीलिए जब तक परिस्थितियां और परिणाम आपके अनुकूल न हों,स्वयं पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए धैर्य रखें।

यदि कोई इस बात से असहमत हो तो कृपया इस पर अपने बहुमूल्य सुझाव दें।

Patience is a positive emotion, which protects us from our insecure; negative thoughts. There is a hope attached to it that one day everything will be fine. Patience is needed when circumstances are out of our control. It is a powerful means of self-control in times of adversity or uneasiness of waiting for any outcome, which prevents us from making rash decisions. That’s why be patient to maintain control over yourself until the circumstances and results are not in your favor. .

f anyone disagrees with this, please give your valuable suggestions on this.

रिश्ते (Relation)

अपनों से नाराज़ होकर दूर जाने से अच्छा।
संग बैठकर मसले सुलझा लिए जाएं।
शायद कोई गुंजाईश बची हो इन रिश्तों में।

“It is better to get angry with loved ones than to go away.
The issues should be resolved by sitting together.
Maybe there is some scope left in these relationships.”

रिश्तों को तोड़ना बहुत ही आसान है पर निभाना मुश्किल। रिश्ते बने ही हैं एक-दूसरे को संभालने, समझने और बुरे वक्त में एक-दूसरे का साथ निभाने के लिए। इसलिए जब भी कोई रूठ जाए तो उसे समझा बुझा कर माना लेना चाहिए।

“खुशनसीब हैं वो लोग जिनके पास कोई तो है खयाल रखने को,कुछ बदनसीबों को तो बस ठोकरें ही नसीब होती हैं।”

फ़िक्र(Tension)

“क्यों फिक्र करूं कि वो समझेगा मुझको।
मैं जानता हूं ख़ुद को क्या ये कम है?…..”

दूसरों से कभी हमदर्दी की उम्मीद न करें। उम्मीद अक्सर दिल को तोड़ देती है क्योंकि आप पर जो बीती है; हो सकता है, उसे सामने वाला समझ न पाये।

ज़रूरत(Need)

कभी तो उठानी पड़ेगी कुदाल तुझको। ये पेट भरना है तो मेहनत करनी होगी। पता है साथ देते हैं अपने मगर कब तक? ज़िंदगी की जंग तुझे खुद ही लड़नी होगी।