अकड़(Flaunt)

दो दिन की जीत पर इंसान,यूं इतराना नहीं अच्छा।
ये तो बस इक खेल था,अभी तो पूरी जंग बाकी है।

Man, on the victory of two days, it is not good to boast like this. This was just a game, the whole war is yet to come.

अपनी उपलब्धियों पर गर्व किया जा सकता है लेकिन घमंड नहीं। चन्द कामों में सफलता पाकर दूसरों के साथ अकड़कर बात करना अच्छी बात नहीं होती। इन्सान को अपनी विनम्रता कभी भी खोनी नहीं चाहिए।

धर्मयुद्ध(Crusade)

महाभारत युद्ध में जब अर्जुन अपने प्रियजनों और संबंधियों को अपने विरुद्ध खड़ा देख युद्ध से विमुख होकर अपना गाण्डीव रख देते हैं ।तब भगवान श्रीकृष्ण उन्हें समझाते हुए कहते हैं –

शिथिल भुजायें,शीश झुका,चुपचाप खड़ा क्यों?
दृष्टि उठा,कर अवलोकन ये वही स्वजन हैं।
की पदधूलि तिलक;मस्तक पर जिनकी तूने,
आज उन्हीं को रण में तेरा आमंत्रण है।
देखी द्युत सभा में जिनकी थी प्रभुताई,
अग्निसुता का चीर छीनते लाज ना आई।
जिनके मोह को धार भुजाएँ कंपित तेरी,
देख सुनाते समरांगण में वो रण भेरी।
मूंक पड़े प्रतिमा सम जो थे शीश नवाए,
आज खड़े परकोटे बन हैं सम्मुख आए।
मनन करो उस कपट सभा की वो अनदेखी,
धर्म निबाह की आड़ में स्त्री की लाज ना रक्खी।
तात-गुरु-धर्मज्ञ थे अपना धर्म बचाए,
तब तूं भी तो मौन खड़ा था शीश झुकाये।
केश पकड़ जब खींच रहा था खल-उत्पाती,
चीख रही थी कुल मर्यादा बन बेचारी।
पर कैसे मैं चुप रहता रव-क्रंदन सुनकर,
आना पड़ा था मुझको फिर योगेश्वर बनकर।
अब देख रहा क्या चाप उठा प्रत्यंचा कस ले,
शर वर्षा कर आज समूचे नभ को ढक दे।
महाकाल बन जा ऐसे की काल भी कांपे,
कोई आंख उठा कर किसी स्त्री को ना ताके।
एक-एक के शीश गिरा दे रणभूमि में,
जैसे तिनके उड़ जाते मदमस्त पवन में।
यदि अब भी तूं मूक रहा तो यह भी सुन ले,
हर युग होंगे चीरहरण अब तो तू सुध ले…..।
यह सब सुन अर्जुन उठकर है धनुष उठाता,
फिर बाणों के बादल से अम्बर छा जाता।

नोट: ऊपर दी गई कविता में महाभारत युद्ध के श्री कृष्ण और अर्जुन के सारे प्रसंग को एक छोटी सी रचना में संजोना संभव नहीं था। इसलिए इसका एक अंश मात्र प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

कड़वा सच(Bitter truth)

सोशल मीडिया पर लोगों का दर्द देखकर आंखों में आंसुओं की बाढ़ सी आ जाती है।पर न जाने क्यों खुद के घर मे तड़प रहे मां-बाप किसी को नज़र ही नहीं आते।फ़र्क बस नज़रों का नहीं नज़रिए का है।

Seeing the pain of people on social media, tears well up in the eyes. But don’t know why no one can see the parents who are suffering in their own house. The difference is not just in the eyes but in the attitude.

ग़म(Sadness)

दिल के अंधेरे कोने में झांकने की इजाज़त कैसे दे दूं ? अपनों के दिए ज़ख्म ख़ुद से ही छुपाए बैठा हूं।

अपनों का दिया दर्द ना ही छुपाते बनता हैं और ना ही दिखाते…….।

धैर्य(Patience)

धैर्य एक सकारात्मक भावना है,जो हमारे असुरक्षात्मक ;नकारात्मक विचारों से हमारी सुरक्षा करता है। इससे एक आशा जुड़ी होती है कि एक दिन सब अच्छा हो जायेगा। धैर्य रखने की आवश्यकता तब होती है जब परिस्थितियां हमारे नियंत्रण से बाहर हो।यह विपत्ति या किसी भी परिणाम की प्रतीक्षा से होने वाली बेचैनी के समय स्वयं पर आत्मनियंत्रण रखने का एक शक्तिशाली साधन है, जो हमें जल्दबाज़ी मे गलत निर्णय लेने से रोकता है।इसीलिए जब तक परिस्थितियां और परिणाम आपके अनुकूल न हों,स्वयं पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए धैर्य रखें।

यदि कोई इस बात से असहमत हो तो कृपया इस पर अपने बहुमूल्य सुझाव दें।

Patience is a positive emotion, which protects us from our insecure; negative thoughts. There is a hope attached to it that one day everything will be fine. Patience is needed when circumstances are out of our control. It is a powerful means of self-control in times of adversity or uneasiness of waiting for any outcome, which prevents us from making rash decisions. That’s why be patient to maintain control over yourself until the circumstances and results are not in your favor. .

f anyone disagrees with this, please give your valuable suggestions on this.

संघर्ष (Struggle)

गिरने से क्यों घबराता है?
छोटा बालक भी गिरता है।
जलती भट्टी में तपकर ही तो,
स्वर्ण से कुंदन बनता है ।
फल-फूल के बोझे को सहकर,
तरुवर भी यश के पात्र बनें।
मानव कष्टों को हरकर ही,
गंगा भी जग की मातु बने।
कालकूट विष को पीकर,
शिव महादेव बन जाते हैं।
गुरु-मातु-पिता मे श्रद्धा रख राघव,
मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं।
यदि बनना है कुछ जीवन में,
तो सूरज सा तपना होगा।
यश-मान को धारण करना हो,
तो कुम्भ सा भी पकना होगा।
जिनकी भी ख्याति है जग में,
बिन त्याग के कोई नाम नहीं।
सच ही कहते है मानव का,
संघर्ष बिना सम्मान नहीं।-2

“इन्सान को सफल बनना है तो, मूल्य तो चुकाना पड़ेगा। बिना परिश्रम और त्याग के कोई भी महान नहीं बनता।”

रिश्ते (Relation)

अपनों से नाराज़ होकर दूर जाने से अच्छा।
संग बैठकर मसले सुलझा लिए जाएं।
शायद कोई गुंजाईश बची हो इन रिश्तों में।

“It is better to get angry with loved ones than to go away.
The issues should be resolved by sitting together.
Maybe there is some scope left in these relationships.”

रिश्तों को तोड़ना बहुत ही आसान है पर निभाना मुश्किल। रिश्ते बने ही हैं एक-दूसरे को संभालने, समझने और बुरे वक्त में एक-दूसरे का साथ निभाने के लिए। इसलिए जब भी कोई रूठ जाए तो उसे समझा बुझा कर माना लेना चाहिए।

“खुशनसीब हैं वो लोग जिनके पास कोई तो है खयाल रखने को,कुछ बदनसीबों को तो बस ठोकरें ही नसीब होती हैं।”

फ़िक्र(Tension)

“क्यों फिक्र करूं कि वो समझेगा मुझको।
मैं जानता हूं ख़ुद को क्या ये कम है?…..”

दूसरों से कभी हमदर्दी की उम्मीद न करें। उम्मीद अक्सर दिल को तोड़ देती है क्योंकि आप पर जो बीती है; हो सकता है, उसे सामने वाला समझ न पाये।

ज़रूरत(Need)

कभी तो उठानी पड़ेगी कुदाल तुझको। ये पेट भरना है तो मेहनत करनी होगी। पता है साथ देते हैं अपने मगर कब तक? ज़िंदगी की जंग तुझे खुद ही लड़नी होगी।

आस (Hope )

“कहते हैं दुनिया उम्मीद पर ही कायम है;जिसने उम्मीद छोड़ दी,उसने जीना छोड़ दिया। इसलिए अपने लिए ना सही; दूसरों के लिए ही उम्मीद के हांथ को थामे रक्खे। क्या पता आप किसी की उम्मीद, किसी प्रेरणा हो और नहीं हैं तो क्या पता बन जाएं।”