सम्मान के योग्य (Worthy for Respect)

माला बनने के लिए फूलों को एक साथ जुड़ना ज़रूरी होता है।अगर फूल अकेला हो तो भगवान उसे केवल अपने चरणों में ही स्थान देते हैं। जबकि वो उस माला को गले से लगाते हैं,जो फूलों की एकता और प्रेम का प्रतीक है,किसी अकेले फूल के अहंकार का नहीं।ठीक उसी प्रकार यदि हम सभी भारतीय ये चाहते हैं,कि विश्व हमें सम्मान की दृष्टि से देखे ;तो हमें मिलकर एक होना होगा। क्योंकि लड़ाई अगर घर में हो तो फ़ायदा हमेशा कोई तीसरा ही उठा ले जाता है। इसलिए सभी वाद और मतभेदों को भुलाकर हमें एक नई शुरुआत करनी होगी।

अकेलापन(Lonliness)

अकेलेपन का किस्सा कुछ यूं है कि, जिसका साथ देता है उसे ही काट खाता है।

हालांकि अकेले इन्सान की सोच में बड़ी ताकत होती है। वो अपने इस स्थिति को अवसर में बदलना जनता है, वो अपने बहुमूल्य समय का उपयोग अपने ज्ञान और व्यक्तित्व के विकास में कर सकता है। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो अकेलापन एक अजगर भी है जो इन्सान को निगलने की ताकत रखता है। इसलिए जब भी आप अकेले हों, कुछ नया या रचनात्मक करने और सीखने में अपने समय का सदुपयोग करें। खुद को व्यस्त रखे जिससे आपके मन में हीन और नकारात्मक विचार अपनी जगह न बना सकें। इससे आपका विकास होगा और आप बुरे विचारों से दूर भी रहेंगे।

पुराने ज़ख्म (Old wound)

पुराने जख्मों को कुरेदने से क्या फ़ायदा
घाव जब भी हरे होंगे तकलीफ़ ही दे जायेंगे।

पुरानी कड़वी यादों और अनुभवों को बार बार सोचने से आपका दर्द कम नहीं होता बल्कि और बढ़ जाता है। इसलिए अगर खुद की या किसी और की वजह से आपको कोई तकलीफ़ हुई हो तो या तो उसे भुला दो या फ़िर माफ़ कर दो। ज़िंदगी में लकलीफें कम और सुकून ज्यादा पाओगे।

काश! मैने ये गलती न की होती।

दर्द(Pain)

कोई तकलीफ़ में हो तो, इकट्ठी भीड़ होती है
मगर बेगाने जख्मों का, कोई मरहम नहीं बनता।
वो दिन कुछ और थे अश्कों को देखा, अश्क जा निकले।
पर अब किसी का दर्द;दूजे की दवा का काम करती है।
कोई तकलीफ़ में हो तो इकट्ठी भीड़ होती है
मगर बेगाने जख्मों का कोई मरहम नहीं बनता
….।

हमारी ये आदत हो गई है की जब भी कोई तकलीफ़ में होता है तो हम तमाशा देखने चले जाते हैं। लेकिन कभी भी उसकी तकलीफ कम करने के बारे में सोचते तक नहीं। कभी-कभी तो हद ही हो जाती है, उदाहरण के लिए -अगर कोई सड़क पर मदद के लिए गिड़गिड़ा रहा हो या कोई अपंग जो ठीक से चल भी न पा रहा हो, को देखकर हंसने या उपहास करने लगते हैं। मदद तो दूर की बात है हम उससे सहानुभूति तक नहीं रखते। आजकल मानवता कहीं खोती जा रही है। हम चाहते तो हैं कि कोई हमारे बुरे समय में हमारी मदद करे लेकिन जब बारी हमारी होती है तो हम पीछे हट जाते हैं।

हौसला(Morale)

तूं कांटे बिछा,मैं दौड़ता जाऊं।
तूं दीवार खड़ी कर, मैं तोड़ता जाऊं।
तूं खाई खोद ,और मैं पुल बनाऊं।
तूं तूफान ले आ, मैं पहाड़ बन जाऊं।
तूं लाख कोशिशों के बावजूद मुझे हरा नहीं सकती।
क्योंकि अगर तूं मुसीबत है तो मैं भी हौसला हूं किसी का।

बुलन्द हौसलों के आगे,मुसीबतें धूल के सिवा कुछ नहीं। अगर मुसीबतें पहाड़ हैं तो, पहाड़ भी चकनाचूर होते हैं। यह बात किसी से छुपी नहीं है कि मुसीबतें बस हौसला आजमाती हैं।वास्तव में ये उतनी बड़ी नहीं होती जितना बड़ा हम उसे सोच-सोचकर बना देते हैं। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं जो इन्सान के लिए असंभव हो। हमें बस नाकाम हो जाने का डर लगा रहता है इसलिए हम मुसीबतों का सामना करने से कतराते हैं। लेकिन कभी सोचा है कि जो लड़ाई हमनें लड़ी ही नहीं उसमें हार जाने का कैसा डर ?

दीपक(Lamp)

मैं दीपक जलना कर्म मेरा।
तम हर्ता हूं यह धर्म मेरा।
नित जलता मैं बुझ जाता हूं।
जीवन संदेश सुनाता हूं।
जैसे सूरज व प्रकृति सदा।
करते निश्चल हो कर्म सभी।
ले नेत्र खोल सुन हे मानव।
तज आशाएं है समय अभी।
जैसे सत्कर्मों की ख्याति।
तोड़े साड़ी सीमाओं को।
वैसे ही परहित दूर करे ।
साड़ी मानव विपदाओं को।
यहां जिसने भी जीता बांटा।
उससे ज्यादा वो पाएगा।
ये पूँजी सच्ची जीवन की।
जो ऊपर ले के जाएगा।
माना लोगो की सोच बुरी पर।
तू भी बुरा तो क्या अन्तर।
विश्वास तू कर दिन आएगा ।
जब जगेगा सबका अंतर।
दूजों से उम्मीद जो कर
तू परहित करता जाएगा।
तो सोच सदा ये कर्म तेरा
फिर लेने देंन कहलेगा।
विक्रेता नहीं तू मानव है।
मानवता बिन कैसा जीवन।
बन जा दीपक कर आलोकित।
धरती पर फैला ये उपवन।

दूसरों की मदद करने के बाद उनके चेहरे पर जो खुशी देखकर जो सुकून मिलता है उसे बयां नहीं किया जा सकता। अगर वैसा ही सुकून आपको भी महसूस करना हो तो किसी जरूरतमंद की मदद करके ज़रूर देखिएगा।”

कमियां (Flaws)

मुझे है क्या पड़ी,जो ख़ुद ही ख़ुद को मैं बुरा बोलूं?
ज़माना है खड़ा संग में, वो किस दिन काम आयेगा
?

आजकल किसी को अपनी कमियों या बुराईयों के बारे में सोचने की ज़रूरत ही नहीं होती। दुनिया और आस पड़ोस के लोग; हो ना हो आप में कुछ न कुछ नुक्स ढूंढ़ ही लेते हैं। इसलिए फ़िक्र न करें लोग तो हैं न आपका ज़िक्र करने के लिए।

भलाई और बुराई(Gudness & Badness)

ज़माने को भलाई अब कहीं भी रास ना आती,
भलाई संग बुराई की भी थोड़ी सी ज़रूरत है।

बात कड़वी है फिर भी सच हैं अच्छे इंसान हालत जानवर की उस पूंछ की तरह रह गई हैं, जिसकी ज़रूरत तो होती है मगर सिर्फ मक्खियां उड़ाने के लिए। उसके सिवा उससे किसी और कोई लेना देना नहीं होता।जब भी लोगों को ज़रूरत होती इस्तेमाल करते हैं और जब नहीं होती तो दूध की मक्खी सा हाल करते हैं।

चुगली(Backbiting)

आजकल किसी की बुराई करना;मसाला चाय की तरह हो गई है।जिसे पीने और पिलाने वाले दोनों को मज़ा आता है।और ये जो हाल है वो हर घर,हर गली और मुहल्ले की कहानी हो गई है।पता नहीं कैसे मगर लोगों को अपने गिरेबान झांकने का मौक़ा मिले ना मिले,दूसरों की खिड़की में झांकने का मौक़ा निकाल ही लेते हैं। इसे ही कहते हैं सच्चा जनकल्याण,जिसमें किसी का कल्याण हो न हो एक दिन किसी की जान ज़रूर निकल जायेगी।

मतलबी लोग(Selfish People)

सभी हैं मतलबी यारों,
कहीं मतलब की यारी है।
कहीं मतलब के रिश्ते है,
कहीं ये दुनियादारी है।
कोई मतलब का भूखा हैं,
कोई मतलब का है प्यासा,
कहीं मतलब की बोली है,
कहीं मतलब की है भाषा।
सभी हैं मतलबी जग में,
बातें मतलब की प्यारी हैं ।
जो भी कुछ दिख रहा तुमको,
सभी मतलब से भारी है।
सभी हैं मतलबी यारों,
कहीं मतलब की यारी है।
कहीं मतलब के रिश्ते है,
कहीं ये दुनियादारी है।

आजकल लोग बस मलतब के लिए रिश्ते निभाते या बनाते हैं। ये जानते हुए भी कि इन्सानी रिश्ते लेन देन पर टिके होते हैं, मतलब पर नहीं।इसमें अगर प्यार और सच्ची भावनाओं का लेन देन करोगे; तो मतलब तो अपने आप ही निकल जायेगा। फिर भी यहां देने की किसको पड़ी है,आजकाल सभी बस लेना जानते हैं। अगर काम निकालना हो तो अपना और निकल गया तो बुरा सपना।