तस्वीर(Picture)

सारी सच्चाई तस्वीरें बयां नहीं करती।
कुछ अनकहे किस्से छूट जाया करते हैं।

ज़िंदगी का हाल भी तस्वीर के जैसा ही है,कोई कितनी भी कोशिश कर ले; कुछ किस्से अधूरे ही रह जाते हैं। इन्सान को वो सब कुछ नहीं मिल पाता ,जो उसकी ख्वाहिश होती है। भले ही उसने; उसके लिए क्या कुछ न झेला हो। किसी ने सच ही कहा है एक तस्वीर,पूरी ज़िंदगी बयां नहीं कर सकती।..।

2 thoughts on “तस्वीर(Picture)

Leave a comment