गिरने से क्यों घबराता है?
छोटा बालक भी गिरता है।
जलती भट्टी में तपकर ही तो,
स्वर्ण से कुंदन बनता है ।
फल-फूल के बोझे को सहकर,
तरुवर भी यश के पात्र बनें।
मानव कष्टों को हरकर ही,
गंगा भी जग की मातु बने।
कालकूट विष को पीकर,
शिव महादेव बन जाते हैं।
गुरु-मातु-पिता मे श्रद्धा रख राघव,
मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाते हैं।
यदि बनना है कुछ जीवन में,
तो सूरज सा तपना होगा।
यश-मान को धारण करना हो,
तो कुम्भ सा भी पकना होगा।
जिनकी भी ख्याति है जग में,
बिन त्याग के कोई नाम नहीं।
सच ही कहते है मानव का,
संघर्ष बिना सम्मान नहीं।-2



“इन्सान को सफल बनना है तो, मूल्य तो चुकाना पड़ेगा। बिना परिश्रम और त्याग के कोई भी महान नहीं बनता।”

अति सुंदर भाव
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Thank you very much
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Wow, devinely beautiful and powerful. Your deep n practical knowledge is amazingly magical 👌👌👌❤
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Thank you
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