जो दोगे वही पाओगे

दूजों के दिखलाए पथ को, बोलो किसने दोहराया? राह पड़े दुःख के मारे को, बोलो किसने अपनाया? मन से काम किए ना कुछ भी, आस है फल के बागों की। बोलो ऐसे पथ पर चलकर, किस मंज़िल तक जाओगे? माटी में जो बीज है धारा, अन्त वही तो पाओगे। हां अन्त वही तो पाओगे। सबने … Continue reading जो दोगे वही पाओगे